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दुनिया

एक भारतीय समेत 14 कैदियों का आखिरी दिन

ताबूत आ चुके हैं, आखिरी ख्वाहिश भी पूछी जा चुकी है. फायरिंग स्क्वॉड भी द्पीव पर पहुंच चुका है. एक भारतीय समेत 14 कैदियों को इंडोनेशिया में गोली मारकर मौत की सजा दी जानी है.

इंडोनेशियाई अधिकारियों के मुताबिक गुरुवार रात मौत की सजा पाने वाले सभी कैदियों के परिवारों को सूचना दे दी गई है. मौत के बाद धार्मिक कर्मकांड करने वाले मौलवी, पुजारी और पादरी को भी तैयार कर दिया गया है. गुरुवार सुबह नुसा कामबांगान द्वीप पर ताबूत भी पहुंचा दिये गए. जिंदगी के आखिरी पल देख रहे कैदियों को उनके परिवार और धार्मिक नेताओं ने भी मिलने दिया गया.

सजा पाने वालों में एक भारतीय नागरिक गुरुदीप सिंह भी है. भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के मुताबिक गुरदीप सिंह को बचाने की कोशिश की जा रही है. लेकिन इस बात की बहुत कम संभावना है कि इंडोनेशिया गुरदीप को रियायत देगा.

पाकिस्तान भी अपने नागरिक जुल्फिकार अली को बचाने की कोशिश कर रहा है. जकार्ता में तैनात पाकिस्तान के राजदूत के मुताबिक कैदी और उसके परिवार को बता दिया गया है कि रजा को गुरुवार रात गोली मारी जाएगी.

गुरुवार को अपने आखिरी दिन के तौर पर देखने वाले कैदियों में नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया के नागरिक भी हैं. सभी 14 कैदी ड्रग्स अपराधों के दोषी पाए गए. बुरी तरह ड्रग्स की चपेट में आए इंडोनेशिया ने 2013 में फिर से मौत की सजा देना शुरू किया.

(मौत की सजा देने के तरीके)

2012 में चुनाव जीतकर राष्ट्रपति बने जोको विडोडो ने ड्रग्स की समस्या को इमरजेंसी बताया और मौत की सजा बहाल की. अब तक 19 लोगों को मौत की सजा दी जा चुकी है. बीते साल दो ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों समेत आठ लोगों को मौत के घाट उतारा गया. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी बेहद कड़ी आलोचना हुई. एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी मानवाधिकार संस्थाओं के साथ ही यूरोपीय संघ भी इंडोनेशिया से मौत की सजा खत्म करने की मांग कर रहा है.

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