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दुनिया

कश्मीरी उतने ही आजाद हैं जितने बाकी भारतीयः जमाल

जो कश्मीर भारत के पास नहीं है, क्या वह आजाद है? हमने बात की पाकिस्तान और इस्लामिक मामलों के विशेषज्ञ आरिफ जमाल से. जमाल इस वक्त अमेरिका में रहते हैं.

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चुनाव हो रहे हैं. ये चुनाव इसलिए भी अहम हो जाते हैं क्योंकि भारत अधिकृत कश्मीर में एक हफ्ते से ज्यादा समय से हिंसा जारी है और आजादी के नारे लग रहे हैं. लेकिन जो कश्मीर भारत के पास नहीं है, क्या वह आजाद है? हमने बात की पाकिस्तान और इस्लामिक मामलों के विशेषज्ञ आरिफ जमाल से. जमाल इस वक्त अमेरिका में रहते हैं. उन्होंने कॉल फॉर ट्रांसनेशनल जिहादः लश्कर ए तैयबा, 1985-2014 जैसी कई चर्चित किताबें लिखी हैं. पेश हैं, उनसे बातचीत के मुख्य अंश.

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में चुनाव प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष है?

वैसे तो पाकिस्तान दावा करता है कि उसके हिस्से वाले कश्मीर में आजाद सरकार है लेकिन सच्चाई यही है कि यह पाकिस्तानी सेना के कब्जे का इलाका है. वहां की सरकार इस्लामाबाद के हुक्म पर चलती है और वहां की विधायिका वही कानून बनाती है जो पाकिस्तान की सरकार को मंजूर हों. वहां के चुनाव में भी वही लोग हिस्सा लेते हैं जो पाकिस्तान को मंजूर होते हैं. इस आजाद कश्मीर की आजादी की बात करने वाला कोई भी इन चुनावों में हिस्सा नहीं ले सकता. पहले तो पाकिस्तानी पार्टियां वहां चुनाव नहीं लड़ सकती थीं लेकिन 1970 के बाद यह भी बदल गया. इसलिए वहां की चार में से तीन बड़ी पार्टियां तो पाकिस्तान की मुख्य पार्टियों की शाखाएं ही हैं.

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पाकिस्तान भारत के हिस्से के कश्मीर में आजादी की मांग का समर्थन करता है और दमन के लिए भारत की आलोचना करता है. क्या उसे इसका हक है?

मुझे तो लगता है कि भारत के हिस्से वाले कश्मीरियों को वही आजादी और हक हासिल हैं जो भारत के किसी भी इलाके के लोगों को हैं. कश्मीर वहां का एक प्रांत है लिहाजा वहां के लोगों को हर संवैधानिक अधिकार हासिल है. बहुत से कश्मीरी इस बात को मानेंगे कि धारा 370 की वजह से उन्हें बाकी हिंदुस्तानियों के मुकाबले ज्यादा अधिकार हासिल हैं. इसीलिए दक्षिणपंथी पार्टियां कश्मीर की आजादी के खिलाफ हैं.

जरूरी बातः एक कश्मीर लड़की कुछ जवाब चाहती है

भारत कहता है कि पाकिस्तान कश्मीर के अलगाववादियों की मदद करता है. आपको इसमें कितनी सच्चाई लगती है?

भारत ठीक ही कहता है. कश्मीर के ज्यादातर अलगाववादियों को पाकिस्तान की सरजमीं पर ट्रेनिंग मिलती है. वहां का सबसे बड़ा आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन पाकिस्तान स्थित जमात ए इस्लामी पार्टी की सैन्य शाखा ही तो है. इस संगठन में कश्मीरी भी हैं और पाकिस्तानी मुजाहिदीन भी. यूसुफ शाह उर्फ सैयद सलाहुदीन इसका सरगना है. जमात उद दावा और लश्कर ए तैयबा भी पाकिस्तान में सक्रिय हैं. और 1990 के दशक में पाकिस्तान की सेना के जनरलों ने पाकिस्तान की आजादी की मांग को एक राजनीतिक चेहरा देने के लिए हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का गठन करवाया. इसके नेता भारतीय कश्मीर में हैं जबकि ऑफिस पाकिस्तान के शहर रावलपिंडी में है.

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कुछ विश्लेषकों का दावा है कि दोनों तरफ के कश्मीरी भारत और पाकिस्तान दोनों से आजादी चाहते हैं. लेकिन आजादी का जैसा आंदोलन भारतीय कश्मीर में है, वैसा पाकिस्तानी कश्मीर में क्यों नहीं दिखता?

मेरे ख्याल से तो यह दावा सही नहीं है. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में तो आज देश के लिए कोई समर्थन नहीं है. 1960 में जम्मू-कश्मीर की आजादी के लिए जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नाम से जो संगठन बना था, उसे किसने कुचला? पाकिस्तानी सेना ने. हालांकि 1980 के दशक में पाक सरकार ने इस संगठन को थोड़ा समर्थन दिया ताकि अलगाववादी आंदोलन को फिर से हवा दी जा सके. लेकिन पाकिस्तानी कश्मीर में आजाद कश्मीर का विचार कतई पसंद नहीं किया जाता. वहां आजादी के लिए रैली करना गैरकानूनी है. पाकिस्तानी कश्मीरी अपने राजनीतिक हालात से कोई खुश नहीं हैं. जिस तरह का सलूक इस्लामाबाद से उन्हें मिलता है, वह उन्हें अच्छा नहीं लगता. अगर जेकेएलएफ जैसी कश्मीर की आजादी का समर्थन करने वाली पार्टियों को ज्यादा राजनीतिक आजादी मिले तो बात कुछ आगे बढ़ सकती है.

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क्या जनमत संग्रह कश्मीर की समस्या का हल है?

मुझे नहीं लगता कि जनमत संग्रह इसे हल कर पाएगा क्योंकि दोनों ही तरफ से विवाद को सुलझाने की कोई राजनीतिक इच्छा नहीं है. पाकिस्तान की ताकतवर सेना चाहती है कि यह विवाद जिंदा रहे ताकि विशालकाय बजट उसे मिलता रहे. यह मसला तभी हल हो सकता है जब पाकिस्तान की चुनी हुई सरकार अपनी मर्जी से फैसले ले पाए और सेना का कोई दखल न हो.

इंटरव्यू: शामिल शम्स

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