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दुनिया

पंजाब में ड्रग्स बांटकर वोट बटोरने का सियासी खेल

अफीम के आदी राजिंदर को नशा करने के लिए कभी भीख मांगनी पड़ती है, तो कभी उधार. कई बार तो उसने चोरी भी की है. लेकिन पंजाब में आजकल चुनावी मौसम है और हर दिन एक पुड़िया उसके घर पहुंच जाती है. बस राजिंदर का वोट चाहिए.

Indien Pakistan Drogen (DW/Murali Krishnan)

पंजाब को भारत की ड्रग्स राजधानी कहा जाता है (सांकेतिक तस्वीर)

38 साल के राजिंदर का कहना है, "नशे के आदी दूसरे लोगों की तरह, मुझे भी चुनाव बहुत पंसद हैं. मैं तो चाहता हूं कि हर महीने चुनाव हों. चुनाव के दौरान जिसको जो चाहिए सब मिल जाता है. आम तौर पर हमें बाहर जाकर लोगों से लेनी पड़ती है लेकिन चुनाव के दौरान तो हमारे घर पर ही सब मिल जाता है."

राजिंदर खेतों में काम करने वाला एक मजदूर है जिसके दो बच्चे हैं. वह उन हजारों लोगों में से एक है जिनके चलते लोग पंजाब को भारत में ड्रग्स की राजधानी कहने लगे हैं. अधिकारियों का कहना है कि चुनावी उम्मीदवार जहां अन्य राज्यों में लोगों को घरेलू सामान, शराब और पैसा देकर लुभाने की कोशिश करते हैं, वहीं पंजाब में फ्री ड्रग्स मुहैया कराई जा रही है.

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भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी कहते हैं, "2012 में हमने पंजाब में चुनाव कराए थे, तो हमें चुनावों में ड्रग्स के इस्तेमाल का संदेह है. हमें पता चला कि ड्रग्स पंजाब में एक बड़ी समस्या है." वह बताते हैं, "एक ही महीने में, हमें 55 किलो हेरोइन और 430 किलो अफीम बरामद हुई. हमें पता चला कि हर तरह की ड्रग्स वहां इस्तेमाल हो रही थी."

2015 में आई एक सरकारी आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2.7 करोड़ की आबादी वाले पंजाब में तीन लाख 20 हजार लोग ड्रग्स की लत के शिकार हैं. सबसे ज्यादा लोग हेरोइन इस्तेमाल करते हैं और इसके बाद अफीम का नंबर आता है. इस बार भी चुनाव से चार हफ्ते पहले पंजाब से 2.63 टन ड्रग्स बरामद की गई जबकि 20 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में 2.03 टन ड्रग्स पकड़ी गई.

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पंजाब के चुनावों में भी ड्रग्स की समस्या एक बड़ा मुद्दा है. विपक्ष इसके लिए सत्ताधारी अकाली-भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराता है. पार्टियां इस समस्या से निपटने के लिए कड़े कानूनों और दोषियों को सख्त सजा का वादा कर रही हैं. लेकिन ड्रग्स के शिकार लोगों के लिए पुर्नवास केंद्र चलाने वाले रोमेश महाजन पार्टियों के वादों को खोखला बताते हैं. वह कहते हैं कि पार्टियां वोटों की खातिर ड्रग्स से लोगों को लुभा रही हैं, तो फिर उनके वादों पर कैसे विश्वास किया जाए.

राजिंदर का कहना है कि उनका वोट उसी उम्मीदवार को जाएगा जो ड्रग्स देगा, भले ही वह किसी भी पार्टी का हो. उसके मुताबिक, "यह बात तो सब जानते हैं कि चुनाव जीतने के बाद तो कई भी शक्ल नहीं दिखाएगा. इसलिए चुनाव से पहले जो मिल रहा है उसका मजा लो.”

एके/वीके (एएफपी)

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