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दुनिया

सियासत के साथ पुण्य कमाना नहीं भूले बीजेपी नेता

इलाहाबाद में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्याकारिणी की बैठक के बहाने बीजेपी नेता गंगा स्नान कर गए. किसी ने इलाहाबाद में तो किसी ने बनारस में पुण्य कमा लिया.

Bildergalerie Kumbh Mela (das größte religiöse Fest Indiens)

प्रतीकात्मक तस्वीर

बीजेपी के अधिकांश नेता राष्ट्रीय कार्यकारिणी में आए तो कुंभ नगरी के पवित्र संगम में धार्मिक डुबकी लगाना नहीं भूले. कुछ ने तो वाराणसी से ही पूजा अर्चना शुरु कर दी. वैसे भी बीजेपी के इतने बड़े आयोजन में धर्म का तड़का न हो, किसके गले से उतरता, वह भी तब जब यूपी के चुनाव सिर पर हों. लेकिन फिर भी कार्यकारिणी यूपी के आसन्न विधान सभा चुनाव में अखिलेश यादव से टक्कर लेने के लिए किसी चेहरे की घोषणा करने में नाकाम रही.

संगम में मंगल

बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के लिए कुंभ नगरी इलाहाबाद का चयन भी तो धार्मिक सियासत की बोली में कुछ कह ही रहा है. पंच प्रयाग, पुराणों में यहां पांच पवित्र नदियों के संगम का वर्णन है, लेकिन वर्तमान में गंगा यमुना और सरस्वती के संगम तट पर बीजेपी के नेताओं के लिए पूजा अर्चना का भी स्वर्णिम अवसर बन गया. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मी कांत पारसेकर, कानून मंत्री सदानंद देवगौड़ा और गुजरात के शिक्षा मंत्री निलिन पटेल समेत दर्जनों बीजेपी नेताओं ने बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल होने के साथ-साथ सुबह संगम पर पहुंच डुबकी भी लगाई.

बीजेपी के प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा, गोपाल अग्रवाल और संबित पात्रा भी संगम में डुबकी लगाने के बाद तीर्थ राज प्रयाग की पूजा करना नहीं भूले. संगम में बीजेपी नेताओं डुबकी लगाने पर यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने आम्बेडकर एक कार्यक्रम में चुटकी ली कि 'हो सकता है संगम में डुबकी लगाने से अच्छे दिन आ जाएं'.

संगम में डुबकी लगाने वाले बीजेपी नेताओं के साथ-साथ गुजरात की मुख्यमंत्री ने आनंदी बेन पटेल ने कार्यकारिणी के पहले दिन की शाम को संगम पर जाकर पूजा अर्चना की तो रेल मंत्री सुरेश प्रभु भी पहले दिन ही संगम पर पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना में व्यस्त देखे गए. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस भी संगम पर बड़े हनुमान जी के पूजन अर्चन में तल्लीन दिखे.

वाराणसी में बम भोले

कुछ ऐसे भी थे जो प्रयाग आने से पहले वाराणसी में पूजा अर्चना कर कार्यकारिणी में शमिल हुए. इनमें राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे अव्वल हैं. वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट पर चार्टर्ड प्लेन से उतर कर वसुंधरा राजे सीधे काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचीं. आचार्य श्रीकांत मिश्र के आचार्यत्व में 11 ब्राम्हणों ने विधिवत पूजन और 21 लीटर दूध से बाबा विश्वनाथ का अभिषेक कराया. इसके बाद उन्होंने मां अन्नपूर्णा मंदिर में कुमकुम पूजन और बाबा काल भैरव का भी दर्शन पूजन किया. इसी दिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिव राज सिंह चैहान की पत्नी इलाहाबाद जाने से पहले बाबा विश्वनाथ के मंदिर में जाकर पूजन अर्चन किया. इनके अलावा केंद्रीय मंत्री राज्य वर्धन सिंह राठौर ने भी पहले बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए फिर इलाहाबाद गए.

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बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के लिए इलाहाबाद के बमरौली सैन्य एयरपोर्ट पर सिर्फ पीएम नरेन्द्र मोदी का हवाई जहाज उतरा. बाकी अधिकांश नेता वाराणसी के बाबतपुर हवाई अड्डे पर उतरे और लगे हाथ बाबा विश्वनाथ को याद करते गए. इतना ही नहीं, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच इलाहाबाद से तकरीबन दो दर्जन कारों का काफिला मां विंध्यवासिनी देवी के दर्शन के लिए विंध्याचल की ओर रवाना हुआ. विंध्याचल विख्यात शक्ति पीठ के रूप में विख्यात है और इसे सिद्ध स्थान का दर्जा भी प्राप्त है. गृह मंत्री राजनाथ सिंह विंध्यासिनी देवी के उपासक हैं. कहा जाता है कि उन पर विंध्यवासिनी देवी की विशेष कृपा है.

कहां पहुंची रणनीति

बीजेपी की इस कार्यकारिणी में शामिल हुए नेताओं ने पुण्य चाहे जितना कमाया हो पर सियासी रूप से कार्यकारिणी का कोई बड़ा फलित नहीं दिखा. पीएम नरेन्द्र मोदी ने विकास की बात की तो बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह कैराना और मथुरा के इर्द गिर्द ही सिमटे रहे. यूपी के चुनाव के लिए किसी ठोस घोषणा या यूपी के भावी मुख्यमंत्री का नाम तक इस कार्यकारिणी में तय नहीं हो पाया.

एस. वहीद

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