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दुनिया

महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित है गोवा

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार गोवा महिलाओं के लिए देश का बेहतरीन राज्य है. सूची में सबसे नीचे है बिहार. दिल्ली के भी हालात बेहद खराब.

देश में पहली बार जेंडर वलनरेबिलिटी इंडेक्स (जीवीआई) जारी किया गया है. इसमें महिलाओं की सुरक्षा के लिए चार पैमानों पर ध्यान दिया गया है- शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी और हिंसा के खिलाफ रक्षा. गोवा के अलावा केरल, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर महिलाओं के लिए बेहतरीन राज्य साबित हुए हैं. बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और दिल्ली हर पैमाने पर सूचकांक में नीचे रहे हैं. कुछ समय पहले आई थॉम्पसन रॉयटर्स फाउंडेशन की एक रिपोर्ट ने दुनिया के बड़े शहरों में दिल्ली को महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित शहर बताया था. अब यह ताजा रिपोर्ट राजधानी को देश के सबसे असुरक्षित शहरों में से एक बताती है.

इस रिपोर्ट को प्लैन इंडिया ने तैयार किया है. प्लैन इंडिया की कार्यकारी निदेशक भाग्यश्री डेंगले ने अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, "हालांकि 18 साल से कम उम्र के बच्चों में आधी आबादी लड़कियों की है लेकिन उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है." भारत में बच्चों की कुल संख्या का 29 फीसदी हिस्सा शून्य से पांच साल के बच्चों का है. इनमें लिंग अनुपात 919 का है. वहीं जन्म के दौरान लिंग अनुपात महज 900 है.

सूचकांक में हर राज्य को 0 से 1 तक स्कोर दिया गया है. स्कोर जितना ज्यादा, राज्य का प्रदर्शन उतना ही बेहतर. गोवा का कुल स्कोर 0.656 रहा. यह देश के औसत 0.5314 से अधिक है. हिंसा के खिलाफ महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से गोवा को पहला स्थान मिला है. शिक्षा के लिहाज से यह पांचवे साथ पर है, सेहत के लिहाज से छठे और गरीबी के लिहाज से आठवें स्थान पर है.

इसके बाद 0.634 के स्कोर के साथ केरल का नंबर है. महिलाओं की सेहत के लिहाज से यह राज्य सबसे आगे है. सूचकांक में सबसे नीचे 0.410 के स्कोर के साथ बिहार है. सभी 30 राज्यों के मुकाबले यहां महिलाएं सबसे असुरक्षित, अस्वस्थ और गरीब हैं. बिहार में 39 प्रतिशत लड़कियों की शादी कानूनी उम्र पहुंचने से पहले ही हो जाती है. 15 से 19 साल की 12.2 प्रतिशत लडकियां सर्वे के दौरान या तो गर्भवती थीं, या मां बन चुकी थीं.

29वें नंबर पर उत्तर प्रदेश, 28वें पर दिल्ली और 27वें पर झारखंड के नाम हैं. इंडेक्स दिखाता है कि यदि एक क्षेत्र में काम किया जाए, तो अन्य क्षेत्रों पर भी उसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है. राजधानी दिल्ली को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाने की जरूरत है. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का कहना है कि इस तरह की रिपोर्ट से नीति निर्माताओं को मदद मिलेगी और वे लक्षित रूप से महिलाओं की स्थिति बेहतर बनाने की दिशा में काम कर सकेंगे.

आईबी/ओएसजे

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