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दुनिया

क्या प्रवासियों को गले लगाना मैर्केल को महंगा पड़ेगा?

जर्मनी में चुनावों से पहले गर्माते सियासी माहौल में चांसलर अंगेला मैर्केल को अपनी प्रवासी नीति के चलते आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. उनके प्रतिद्ंवद्वी सोशल डेमोक्रैट मार्टिन शुल्त्स उन्हें निशाना बना रहे हैं.

एसपीडी की तरफ से चांसलर पद के उम्मीदवार बनाये गये मार्टिन शुल्त्स महीनों से ऐसा कोई मुद्दा तलाश रहे थे जिसके सहारे वह चांसलर मैर्केल की बढ़ती लोकप्रियता का मुकाबला कर सकें. मैर्केल की प्रवासी नीतियों के रूप में अब उन्हें यह मुद्दा मिल गया है. उन्होंने जर्मन अखबार "बिल्ड" के साथ इंटरव्यू में मुख्यतः मुस्लिम देशों से आने वाले शरणार्थियों को लेकर मैर्केल की नीतियों पर वार किया है.

उन्होंने कहा, "2015 में दस लाख शरणार्थी जर्मनी में आये और ज्यादा सरकार की निगरानी के बिना." उन्होंने कहा, "चांसलर ने ऑस्ट्रिया से लगने वाली सीमा को मानवीय आधार पर खोल दिया लेकिन दुर्भाग्य से उन्होंने यूरोप में हमारे साझीदारों से कोई सलाह मशविरा नहीं किया. अगर हमने कदम नहीं उठाया, तो यही हालात फिर से दोहराये जा सकते हैं."

मैर्केल ने जर्मन मतदाताओं से वादा किया है कि जो कुछ दो साल पहले हुआ, फिर से वैसा नहीं होगा. 2015 में लाखों की तादाद में शरणार्थी जर्मनी आये जिनमें से ज्यादातर युद्ध प्रभावित सीरिया से थे. पिछले साल शरणार्थियों की संख्या में कमी आयी, लेकिन यह संख्या फिर बढ़ सकती हैं क्योंकि नाइजीरिया, इरिट्रिया और लीबिया जैसे उत्तरी अफ्रीकी देशों में मुश्किल हालात के कारण लोगों के वहां से भागने का सिलसिला थमा नहीं है.

हालांकि शुल्त्स इस मुद्दे का चुनावी फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मैर्केल उनकी तरफ से होने वाले हमलों से ज्यादा परेशान नहीं दिखायी देती हैं. उनकी मौजूदा सरकार में शुल्त्स की एसपीडी पार्टी जूनियर पार्टनर के तौर पर शामिल है और उसने भी मैर्केल की शरणार्थी का स्वागत करने की नीति का समर्थन किया था. लेकिन मौजूदा हालात का सबसे ज्यादा फायदा धुर दक्षिणपंथी ताकतों को हो सकता है. एएफडी पार्टी की हालिया चुनावी सफलताओं को इससे जोड़ कर देखा जा रहा है.

देश में प्रवासियों की जितनी संख्या बढ़ेगी, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका से यूरोप में आने वाले लोगों को नियंत्रित करने के लिए दबाव उतना ही ज्यादा बढ़ेगा. शरणार्थियों के मुद्दे पर मैर्केल को अपनी सहयोगी पार्टी सीएसयू का विरोध झेलना पड़ रहा है. सीएसयू का कहना है कि जर्मनी आने वाले सालाना शरणार्थियों की संख्या दो लाख से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. हालांकि मैर्केल इस विचार को खारिज कर चुकी हैं.

सीएसयू के प्रमुख होर्स्ट जेहोफर ने "डी वेल्ट" अखबार को दिये इंटरव्यू में कहा कि सब जानते हैं कि प्रवासियों की लहर जारी रहेगी. उन्होंने अनुमान जताया था जर्मनी की सीमाएं खोलने के मैर्केल के फैसले के कारण सीडीयू-सीएसयू को सितंबर में होने वाले चुनावों में बहुमत गंवाना पड़ सकता है

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रवासी और शरणार्थियों से जुड़ा मुद्दा अकेला ऐसा विषय है जो लोगों को एएफडी को वोट देने के लिए प्रेरित करेगा. "ज्यूडडॉयचे त्साइटुंग" अखबार ने सितंबर 2016 में एएफडी की एक बड़ी चुनावी जीत के बाद एक विश्लेषण किया था. इसके अनुसार एएफडी को वोट देने वाले 82 प्रतिशत लोगों ने कहा कि प्रवासन उनके लिए सबसे बड़ा मुद्दा है. वहीं 17 प्रतिशत लोगों कहना था कि एएफडी शरणार्थी मुद्दे से निपटने के मामले में सबसे बेहतर स्थिति में है.

जाहिर है जर्मनी में प्रवासियों की संख्या जितनी बढ़ेगी, उसका सीधा फायदा एएफडी को होगा. और चौथी बार चांसलर बनने की कोशिशों पर इसका असर हो सकता है.

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