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दुनिया

ड्राइवर रेलों में नहीं चढ़ेंगे, ओलांद फिर भी अड़ेंगे

राष्ट्रपति फ्रांसोआ ओलांद ने सख्त रवैया अपनाते हुए साफ कह दिया है कि श्रम कानून में बदलाव के प्रस्ताव को वापस नहीं लिया जाएगा. यूरो कप आ रहा है और हड़ताल जारी है.

फ्रांस में आम हड़ताल का सीधा असर रेल सेवाओं पर भी पहुंच गया है लेकिन राष्ट्रपति फ्रांसोआ ओलांद ने सख्त रवैया अपनाते हुए साफ कह दिया है कि श्रम कानून में बदलाव के प्रस्ताव को वापस नहीं लिया जाएगा.

ओलांद ने कहा, "बिल तो वापस नहीं लिया जाएगा. इसके प्रस्ताव उद्योगों के लिए सर्वोत्तम प्रदर्शन सुनिश्चित करते हैं और कर्मचारियों को नए अधिकार देते हैं."

देशभर के कर्मचारी इस नए बिल के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. इस बिल में एक प्रावधान ऐसा भी है जिसके बाद नौकरी पर रखना और निकालना आसान हो जाएगा.

अगले हफ्ते से देश में यूरो फुटबॉल चैंपियनशिप शुरू होनी है लेकिन लोग प्रदर्शनों के लिए सड़कों पर उतरे हुए हैं. रेल यातायात पर काफी असर पड़ा है. ईंधन की सप्लाई भी प्रभावित है. पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यही हालात रहे तो पर्यटकों की आमद में कमी आएगी. टूरिस्ट बोर्ड ने कहा, "पैरिस में गुरिल्ला कार्रवाई जैसे दृश्य पूरी दुनिया में देखे जा रहे हैं. इससे लोगों में डर और गलतफहमियां पैदा हो रही हैं." पिछले हफ्ते पैरिस में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी झड़पें हुई थीं.

बुधवार को ट्रेन ड्राइवर हड़ताल पर जा रहे हैं. कई पुलिस अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य सरकारी कर्मचारी ड्राइवरों की हड़ताल में शामिल होंगे. जेल के गार्ड तो पहले से ही हड़ताल पर चल रहे हैं. पैरिस मेट्रो के कर्मचारी गुरुवार को हड़ताल करेंगे.

देश के आठ में से छह तेलशोधक कारखाने या तो बंद हैं या फिर कम काम कर रहे हैं क्योंकि कर्मचारी हड़ताल पर हैं. एयर फ्रांस के पायलटों ने जून में कम से कम छह दिन की हड़ताल की चेतावनी दी है.

श्रम सुधारों के जरिए सरकार बाजार को ज्यादा लचीला बनाने की बात कह रही है. 14 जून को यह बिल सीनेट में जाएगा. उस दिन देश में बड़ी आम हड़ताल की योजना बनाई गई है.

इसी तरह की हड़ताल बेल्जियम में भी हो रही है. वहां सरकारी कर्मचारी एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर चले गए हैं. बजट में कटौती, रिटायरमेंट की आयु में बढ़ोतरी और काम के घंटों में बदलाव के विरोध में यह हड़ताल बुलाई गई है.

फ्रांस में श्रम सुधारों की मुख्य बातें

हफ्ते में 35 घंटे काम की सीमा बनी रहेगी, लेकिन अब औसतन 35 घंटे काम करना होगा. यानी किसी हफ्ते ज्यादा काम भी कराया जा सकेगा. हालांकि एक हफ्ते में 46 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जा सकेगा.

कंपनियों को तन्ख्वाह कम करने की ज्यादा आजादी होगी.

कर्मचारियों को निकालना आसान होगा. सरकार का तर्क है कि ऐसा होने पर कंपनियां ज्यादा लोगों को भर्ती करेंगी.

वीके/आईबी (एपी, रॉयटर्स)

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