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मनोरंजन

बॉलीवुड के दीवाने निडर भारतीयों पर फ्रांस की नजर

पिछले एक साल में एक के बाद एक हुए कई आतंकी हमलों की मार फ्रांस के पर्यटन उद्योग पर पड़ी है. पर्यटकों की संख्या में खासी कमी आई है. अब यह देश बॉलीवुड की मदद से भारत की ओर देख रहा है कि पर्यटन उद्योग को कुछ सहारा मिले.

फ्रांस की सरकार को उम्मीद है कि बॉलीवुड की नई कॉमेडी फिल्म "बेफिक्रे" देश के कमजोर पड़ते पर्यटन उद्योग के लिए मददगार साबित हो सकती है. इस फिल्म में कोट डे अजूर के सुनहरी समुद्र तटों से लेकर पैरिस की साइन नदी और मशहूर ओपेरा हाउस की छत तक देश की सबसे खूबसूरत लोकेशंस को कैमरे में कैद किया गया है. फिल्म इस शुक्रवार रिलीज हो रही है. फिल्मकारों का कहना है कि यह पहली ऐसी बॉलीवुड फिल्म है जिसे पूरी तरह फ्रांस में फिल्माया गया है.

भारत में फ्रांस के राजदूत एलेग्जांडर सीगलर कहते हैं कि यह फिल्म दुनिया की तमाम मार्किटिंग कैंपन्स के बराबर है. वह कहते हैं, "भारत जैसे देश में लोगों के घूमने के सपनों पर फिल्में बहुत ज्यादा असर डालती हैं. इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत के मध्य वर्ग पर फिल्मों का असर सबसे ज्यादा होता है."

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हाल के सालों में दुनिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों की निगाह चीनी पर्यटकों पर रही है. लेकिन अब वे भारत पर भी ध्यान दे रहे हैं. देश के बढ़ते मध्य वर्ग में विदेश जाने की चाह बढ़ी है. 2014 में दो करोड़ लोगों ने विदेश यात्राएं कीं. एक अनुमान है कि 2020 तक इनकी संख्या 5 करोड़ तक पहुंच जाएगी. पिछले साल पांच लाख 24 हजार लोग फ्रांस गए हैं. हालांकि चीन और जापान के लोगों की संख्या कहीं ज्यादा रही थी. फ्रांस की एक मार्किटिंग एजेंसी की मार्किटिंग डाइरेक्टर सोफी लाकरेसोनिएरे कहती हैं कि भारत में लोग सुरक्षा को लेकर कम चिंतित होते हैं और हाल में फ्रांस में हुए हमलों के बाद यह एक अहम कड़ी हो सकती है.

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पर्यटकों पर बॉलीवुड के असर को पहले भी कई यूरोपीय देश भुना चुके हैं. 2012 में "जिंदगी ना मिलेगी दोबारा" फिल्म के आने के बाद स्पेन जाने वाले भारतीयों की संख्या दोगुनी हो गई थी. स्विट्जरलैंड तो 1970 के दशक से ही भारतीयों का पसंदीदा देश रहा है जबकि यश चोपड़ा ने कई फिल्मों की शूटिंग वहां की थी. इसलिए जब बेफिक्रे के निर्माता फिल्म बनाने का प्रस्ताव लेकर फ्रांसीसी अधिकारियों के पास पहुंचे थे तो उन्हें हाथोहाथ लिया गया.

वीके/एके (एएफपी)

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