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दुनिया

दो ब्लैक मरे तो पांच पुलिस वाले मार दिए गए

अमेरिका में बीते हफ्ते दो एफ्रो-अमेरिकी लोगों की पुलिस की गोली से मौत के बाद पांच पुलिस वालों की हत्या.

अमेरिका में एक दिन पहले एक एफ्रो-अमेरिकन व्यक्ति की पुलिस की गोली से हुई मौत अब एक ऐसी आग में तब्दील हो गई है जिसमें 5 पुलिस वालों की जान जा चुकी है और धमकियां दी जा रही हैं कि शहर भर में बम लगा दिए गए हैं. एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कई पुलिस वालों को गोली मार दी गई. 5 की मौत हो गई जबकि 6 पुलिसकर्मी घायल हुए. अमेरिकी इतिहास में इस तरह की यह सबसे बुरी घटना है.

बीते एक हफ्ते में पुलिस की गोली से दो एफ्रो-अमेरिकी मारे गए. इसके बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. डैलस में ऐसे ही एक प्रदर्शन के दौरान स्नाइपर्स ने किसी ऊंची जगह से निशान बनाकर पुलिस पर गोलियां चलाईं. कुछ अफसरों को तो पीठ में गोलियां लगीं. डैलस के पुलिस प्रमुख ने बताया कि दो स्नाइपर्स ने किसी ऊंची जगह से 11 पुलिस वालों को गोली मारी. पुलिस ने जिन लोगों को हिरासत में लिया है उनमें से एक ने बताया है कि शहर में कई जगह बम रखे गए हैं. उसने कहा, "अंत नजदीक है."

टेक्सस सिटी के मेयर माइक रॉलिंग्स ने कहा, "हमारा सबसे बुरा सपना सच हो गया है. शहर की सेवा करने वाले उन चार अफसरों को खोना बहुत दुखद है."

बुधवार को एक पुलिस अफसर ने 32 साल के एफ्रो-अमेरिकी फिलैंडो कैस्टीले को गोली मार दी थी. मिनेसोटा के सेंट पॉल में वह अपनी गर्लफ्रेंड और उसकी बेटी के साथ कार से जा रहे थे. एक जगह उन्हें रोका गया और लाइसेंस दिखाने को कहा गया. लेकिन इससे पहले की वह जेब से कागज निकाल पाते, अफसर ने उन्हें चार गोलियां मारीं. उनकी वहीं मौत हो गई. उनकी गर्लफ्रेंड ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर डाला है जिसमें कैस्टीलो को खून में लथपथ तड़पते हुए देखा जा सकता है.

इसके एक दिन पहले ही लुइजियाना के बैटन रोग में 37 साल के एल्टन स्टर्लिंग को गोली मार दी गई थी. इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर मौजूद है जिसमें स्टर्लिंग को दो पुलिस वालों से झगड़ते देखा जा सकता है.

इन दोनों घटनाओं से गुस्साए लोग सड़कों पर उतर आए. अमेरिका में कई जगह प्रदर्शन हुए हैं. शिकागो में प्रदर्शनकारियों ने डैन रेयान एक्सप्रेस वे पर प्रदर्शन किया जिसकी वजह से यह मुख्य मार्ग करीब 10 मिनट तक बंद रहा. न्यू यॉर्क में भी टाइम्स स्क्वेयर पर ट्रैफिक को प्रदर्शनकारियों ने रोक दिया. वे लोग "हैंड्स अप, डोंट शूट" के नारे लगा रहे थे. पुलिस ने बताया कि एक दर्जन से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है.

डैलस में उस सेंट पॉल में भी प्रदर्शन हुआ जहां कैस्टीले को गोली मारी गई थी. भीड़ 'हत्यारे पुलिस वालों को जाना होगा' के नारे लगा रही थी. मिनेसोटा के गवर्नर मार्क डेटन भी प्रदर्शन में पहुंचे और भीड़ को शांत करने की कोशिश की. उन्होंने कहा, "अगर ड्राइवर और उसका सहयात्री कोई गोरा होता तो क्या ऐसा होता? मुझे तो नहीं लगता. इसलिए मुझे कहना ही पड़ेगा कि इस तरह का नस्लवाद होता है और यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि ऐसा दोबारा ना हो, कभी ना हो."

2014 में भी ऐसे ही दंगे भड़के थे, देखें तस्वीरें

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी इन हत्याओं की आलोचना की है. पोलैंड में नाटो सम्मेलन की एक बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, "इस गोलीबारी से हम सभी अमेरिकियों को चिंतित होना चाहिए. ये कभी-कभार होने वाली घटनाएं नहीं हैं. ये घटनाएं दिखाती हैं कि हमारी आपराधिक न्याय व्यवस्था में नस्लवाद मौजूद है."

वॉशिंगटन पोस्ट ने कहा कि 2016 में पुलिस की गोली से मरने वालों की तादाद कैस्टिलो के साथ 506 पर पहुंच गई है. इनमें से 123 एफ्रो-अमेरिकी थे.

वीके/एमजे (एपी, रॉयटर्स)

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