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दुनिया

सदी की सबसे भयावह बाढ़ से जूझता पूर्वोत्तर

पूर्वोत्तर भारत में असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में इस साल सदी की अब तक की सबसे भयावह बाढ़ से जूझ रहे हैं. इन तीनों राज्यों में अब तक बाढ़ और इसकी वजह से होने वाले हादसों में मरने वालों की तादाद 90 पार हो गई है.

इलाके में 18 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में हैं. खेतों में लगी फसलों और दूसरी संपत्ति के नुकसान का तो अभी अनुमान लगाना भी संभव नहीं हो सका है. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू के नेतृत्व में एक केंद्रीय टीम ने बृहस्पतिवार को असम और अरुणचाल प्रदेश के बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा कर नुकसान का आकलन करने की कवायद शुरू की.

केंद्र ने नुकसान के आकलन के लिए भारतीय अंतरिक्ष शोध संगठन इसरो की सहायता लेने की भी बात कही है. उधर, असम में मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के चुनाव क्षेत्र माजुली की किस्मत अब भी नहीं बदली है. जिले का दर्जा मिलने के बावजूद. यह द्वीप इस साल भी देश के बाकी हिस्सों से कट गया है. बाढ़ से एक सींग वाले गैंडों की जान पर भी खतरा पैदा हो गया है.

असम में हालत गंभीर

असम में तो बीते दो सप्ताह से बाढ़ की भयावहता लगातार बढ़ी है. बीती दो जुलाई को जहां राज्य के आठ जिलों के 2.9 लाख लोग बाढ़ की चपेट में थे वहीं 12 जुलाई को 24 जिलों के 16 लाख लोग इसकी चपेट में आ गए. इस दौरान 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. एक सींग वाले गैंडों का सबसे बड़ा घर कहे जाने वाले काजीरंगी समेत नामेरी और पवित्रा नेशनल पार्क का ज्यादातर हिस्सा पानी में डूब गया है.

काजीरंगा में अब तक चार गैंडों की मौत हो चुकी है. वहां ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. राज्य में बने अस्थायी शरणार्थी शिविरों में हजारों लोगों ने शरण ले रखी है. मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा करने के बाद बताया कि केंद्र सरकार ने इस प्राकृतिक आपदा से निपटने में राज्य सरकार को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी फोन पर सोनोवाल से बातचीत की है.

चीन से सटे अरुणाचल प्रदेश में भी भारी बारिश से होने वाली भूस्खलन की घटनाओं से जान-माल का भारी नुकसान हुआ है. बीते मंगलवार को ही यहां ऐसी ही एक घटना में एक परिवार के 14 लोग मलबे में धंस गए. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने उस इलाके का भी दौरा किया. मणिपुर में भी भारी बारिश से राजधानी इंफाल के कई निचले इलाकों में पानी भर गया है. पर्वतीय इलाका होने की वजह से यहां भूस्खलन की घटनाएं बढ़ी हैं. इससे नेशनल हाइवे 37 समेत कई सड़कों पर वाहनों की आवाजाही ठप हो गई है.

खतरे में जानवर

असम में बाढ़ के मौजूदा दौर ने काजीरंगा नेशनल पार्क समेत कई पार्कों में रहने वाले जानवरों को भी खतरे में डाल दिया है. शिकारी इस मौके का लाभ उठा कर उनको निशाना बनाने का प्रयास कर रहे हैं. काजीरंगा नेशनल पार्क के निदेशक सत्येंद्र सिंह बताते हैं, "राज्य में आई बाढ़ की वजह से पार्क में अब तक 58 जानवरों की मौत हो चुकी है. इनमें एक सींग वाले गैंडों और हिरणों की तादाद ज्यादा है."

पार्क के ज्यादातर हिस्से में पानी भर गया है. इससे बचने के लिए तमाम जानवरों ने पार्क के बीच से गुजरने वाले नेशनल हाइवे पर शरण ली है. उनको हादसे का शिकार होने से बचाने के लिए हाइवे पर वाहनों की स्पीड पर अंकुश लगाने के उपाय किए गए हैं. वहां जगह-जगह अवरोधक लगाए गए हैं और ड्राइवरों को 40 किमी प्रति घंटे की स्पीड से चलने को कहा जा रहा है.

माजुली भी डूबा

ब्रह्मपुत्र के बीच में बसा दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली हर साल की तरह इस साल भी भारी बाढ़ और तटकटाव से जूझ रहा है. बीते साल मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने यहां से विधानसभा चुनाव लड़ा था. तब लगा था कि माजुली की किस्मत शायद अब बदलेगी. इसे जोरहाट से काट कर अलग जिले का भी दर्जा दे दिया गया. लेकिन वहां हालात जस के तस हैं.

हर साल की तरह अबकी भी द्वीप का ज्यादातर हिस्सा पानी के नीचे है. सोनोवाल ने इस सप्ताह माजुली का दौरा कर हालात का जायजा लिया है. उन्होंने इलाके के लोगों को पर्याप्त राहत सामग्री भेजने का भरोसा दिया. माजुली के 58 गांव पानी में डूब गए हैं और लगभग 50 हजार लोग बाढ़ की चपेट में हैं. इलाके में 1,760 एकड़ में खड़ी फसलें नष्ट हो चुकी हैं. सैकड़ों मकान को भी नुकसान पहुंचा है.

केंद्रीय टीम का दौरा

केंद्रीय गृह मंत्री किरण रिजिजू ने बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए कल राष्ट्रीय आपदा कार्रवाई बल (एनडीआरएफ) और नीति आयोग के सदस्यों के साथ असम व अरुणाचल के प्रभावित इलाकों का दौरा किया. बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित लखीमपुर जिले का दौरा करने के बाद उन्होंने पत्रकारों को बताया, "टीम ने नुकसान का जायजा लिया है और इसके प्राथमिक आंकड़े भी जुटाए गए हैं. इस रिपोर्ट के तैयार होने के बाद केंद्र सरकार की ओर से दोनों राज्यों को हरसंभव सहायता दी जाएगी."

दूसरी ओर, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी कल दिल्ली में एक उच्च-स्तरीय बैठक में इलाके के तीन राज्यों में बाढ़ और उससे उपजी हालत की समीक्षा की. उन्होंने इस साल बाढ़ से होने वाले को अभूतपूर्व करार देते हुए कहा कि इलके के तीन राज्यों के 58 जिले बाढ़ की चपेट में हैं. सिंह ने इन तीनों राज्यों में हुए नुकसान का आकलन करने के लिए इसरो की सहायता लेने की बात भी कही है.

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि सदी की सबसे भयावह बाढ़ से जूझते हुए लोगों के जान-माल की रक्षा करना सोनोवाल सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती है. केंद्र सरकार की सहायता मिलने के बावजूद इस नुकसान की भरपाई संभव नहीं है. बाढ़ के दौरान राहत और बचाव कार्यों से भी ज्यादा गंभीर चुनौती बाढ़ का पानी उतर जाने के बाद पैदा होने वाली महामारी के खतरे से निपटना है.

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