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दुनिया

सऊदी अरब में प्रदर्शनों में शामिल महिला के खिलाफ मुकदमा

सऊदी अरब में शिया विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के आरोप में पहली बार किसी महिला के खिलाफ अदालत में मुकदमा शुरू हुआ. आखिर इस महिला के खिलाफ क्या आरोप हैं, जानिए.

43 साल की इस महिला पर देश के शिया बहुल इलाके में विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने का आरोप है. सऊदी अरब के ओजाक अखबार ने खबर दी है कि इस महिला के खिलाफ कातिफ शहर में मुकदमा शुरू हुआ है. सुन्नी बहुल सऊदी अरब में कातिफ एक तटीय शहर है और यहां शिया लोग बहुलता में हैं. अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, "यह पहली महिला है जिस पर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे हैं." हालांकि रिपोर्ट में महिला का नाम नहीं दिया गया है, सिर्फ उसकी उम्र बताई गई है, 43 साल.

2011 में कातिफ में शियाओं ने प्रदर्शन किए थे और सऊदी अरब में अपने लिए बराबर अधिकारों की मांग की थी. सऊदी अरब के ज्यादातर शिया देश के पूर्वी हिस्से में रहते हैं, जो तेल संसाधनों से मालामाल है. लेकिन सऊदी शिया लंबे समय से अपने साथ भेदभाव होने के आरोप लगाते रहे हैं.

बर्लिन में यूरोपियन सऊदी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स के निदेशक अली अब्दुबीसी कहते हैं कि सऊदी अरब में शिया प्रदर्शनों के सिलसिले में 200 से ज्यादा लोगों को दोषी करार दिया गया है और इनमें से कुछ को मौत की सजा भी सुनायी गयी है.

जिस महिला के खिलाफ मुकदमा शुरू हुआ है, अब्दुबीसी उसकी पहचान नेमा अलमात्रोड के तौर पर करते हैं जो पेशे से नर्स हैं. वह भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि अलमात्रोड ऐसी पहली महिला हैं जिन पर कातिफ के प्रदर्शनों के सिलसिले में मुकदमा चलाया जा रहा है.

अब्दुबीसी कहते हैं कि प्रदर्शनों में शामिल होने के अलावा अलमात्रोड का और कोई दोष नहीं है. ओजक की रिपोर्ट में कहा गया है कि रियाद में मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजकों ने उनके खिलाफ "सुरक्षा व्यवस्था को अस्थिर करने, सामाजिक ताने बाने पर नकारात्मक असर डालने, विध्वंस और दंगा भड़काने के आरोप लगाए." अब्दुसीसी नहीं जानते हैं कि अगर अलमात्रोड को दोषी करार दिया जाता है तो उन्हें कितनी सजा हो सकती है.

एके/आरपी (एएफपी)

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