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दुनिया

पाकिस्तान में पांचवां सामाजिक कार्यकर्ता लापता

पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान में मुखर आवाजों के गायब होने का सिलसिला सा शुरू हो गया है. चार ब्लॉगर्स के गायब होने के बाद अब एक और मानवाधिकार कार्यकर्ता के लापता होने का मामला सामने आया है.

एक ओर जहां संयुक्त राष्ट्र अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सिकुड़ते दायरे पर चिंता जता रहा है तो वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान में अपने अधिकारों की मांग कर रहे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के गायब होने का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. हाल में पाकिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ता के गायब होने का पांचवां मामला सामने आया है. आईटी क्षेत्र में काम करने वाले और आतंकवाद विरोधी सिविल प्रोग्रेसिव अलायंस का मुखिया समर अब्बास बीती 7 जनवरी को कराची से इस्लामाबाद पहुंचे थे. इसके बाद से ही वह गायब हैं. उनके साथी तालिब रजा ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि हमने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक संगठन तैयार किया है. उन्होंने कहा, "हम प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों के खिलाफ संघर्ष और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम करते हैं."

यह भी देखिए: चूर चूर होते पाकिस्तानियों के ख्वाब

इसके पहले पाकिस्तान में 4 से 7 जनवरी के दौरान भी चार वामपंथी ब्लॉगर्स के गायब होने की खबरें सामने आई थीं. गैर सरकारी संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने इन लोगों की गायब होने की घटनाओं पर चिंता जाहिर करते हुए सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. हालांकि सरकार ने इसे पूर्ण रूप से खारिज किया है. मंगलवार को गृह मंत्री निसार अली खान ने कहा कि जल्द ही इन लापता लोगों को ढूंढ़ निकाला जाएगा.

संयुक्त राष्ट्र और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने गायब होते इन कार्यकर्ताओं पर चिंता जाहिर की है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत डेविड के ने कहा कि किसी भी सरकार को अपने नागरिकों पर ऐसे हमलों को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि इन मामलों की जांच को तत्काल प्राथमिकता देते हुए पाकिस्तान सरकार यह संदेश दे सकती है कि वे अपने नागरिकों की जान और उनकी हिफाजत को लेकर कितनी गंभीर है, खासकर तब, जब मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा हो.

तस्वीरों में: इनका भी है पाकिस्तान

पाकिस्तान, पत्रकारों के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से एक माना जाता है. इसकी सेना भी पत्रकारों के साथ आराम से पेश नहीं आती. वर्ष 2014 में एक बंदूकधारी ने देश के मशहूर टीवी एंकर हामिद मीर पर हमला किया था. खुशकिस्मती से मीर इस हमले से बच गए थे. बाद में इनके परिवार और इनकी कंपनी ने इस हमले के लिए देश की खुफिया एजेंसी आईएसआई के मुखिया के हाथ होने की बात कही थी.

एए/वीके (एएफपी)

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