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दुनिया

फर्जी खबरों से लड़ने वाले गठजोड़ का हिस्सा बने फेसबुक और ट्विटर

फर्जी खबरों और गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकने में सोशल मीडिया की भूमिका सबसे अहम हो सकती है क्योंकि वे वहीं से फैलती हैं. इसलिए फेसबुक और ट्विटर का इस गठजोड़ का हिस्सा बनना अहम है.

फर्जी खबरों से मुकाबला करने के लिए फेसबुक और ट्विटर ने हाथ मिला लिया है. सोशल मीडिया की दुनिया की दो सबसे बड़ी और सबसे प्रभावशाली वेबसाइट्स के इस गठजोड़ का मकसद ऐसी फर्जी खबरों से लड़ना है जो सोशल मीडिया पर फैलती हैं और अक्सर जिंदगियां तबाह कर देती हैं. इस गठजोड़ में 30 से ज्यादा न्यूज और टेक कंपनियां भी साथ होंगी. यह गठजोड़ सोशल मीडिया पर सूचनाओं की गुणवत्ता के सुधार के लिए काम करेगा.

इस गठजोड़ की शुरुआत पिछले साल जून में हुई थी. अल्फाबेट इंक की कंपनी गूगल ने इस शुरुआत का समर्थन किया था. फेसबुक और ट्विटर के साथ आने से यह और मजबूत हुआ है. गठजोड़ ने कहा है कि वह ऐसे निर्देशक सिद्धांत बनाएगा जिनके पालन से सोशल मीडिया के यूजर्स को ज्यादा जागरूक बनाया जा सकेगा. इसके अलावा ऐसा एक प्लैटफॉर्म बनाया जाएगा जहां यूजर्स संदिग्ध खबरों की पुष्टि कर सकेंगे.

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इस गठबंधन के प्रबंध निदेशक जेनी सार्जेंट ने बताया कि अक्टूबर के आखिर तक इस प्लैटफॉर्म के तैयार हो जाने की उम्मीद है. इस गठजोड़ में न्यू यॉर्क टाइम्स, वॉशिंगटन पोस्ट, बजफीड न्यूज, समाचार एजेंसी एएफपी और सीएनएन शामिल हैं. हर महीने 1.7 अरब लोगों तक पहुंचने वाली सबसे बड़ी सोशल मीडिया साइट फेसबुक की फर्जी खबरें और गलत सूचनाएं फैलाने को लेकर सबसे ज्यादा आलोचना होती है. ट्विटर पर रोजाना 14 करोड़ लोग सक्रिय होते हैं और वह ब्रेकिंग न्यूज को लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है. साथ ही किसी घटना को लेकर चश्मदीद गवाहों के अनुभव सबसे पहले ट्विटर के जरिये ही दुनिया तक पहुंचते हैं. इसलिए बहुत संभावना रहती है कि गलत सूचनाओं का प्रसार हो जाए.

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अगस्त में फेसबुक ने अपने लोकप्रिय फीचर 'ट्रेंडिंग' में ऐसे कई तकनीकी बदलाव किए कि इन टॉपिक्स के चुनाव में इंसानी पूर्वाग्रहों की संभावना न्यूनतम हो जाए. ट्विटर भी इस तरह के कदम उठाता रहता है. जुलाई में जब फ्रांस के नीस में आतंकवादी हमला हुआ था तो ट्विटर ने ऐसे कई ट्वीट डिलीट किए थे जिनमें इस्लामिक कट्टरपंथी हमले की तारीफ कर रहे थे.

वीके/एमजे (रॉयटर्स)

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