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दुनिया

स्कैंडल और कटौती में उबलता यूरोप

आर्थिक संकट के दौर में राजनीतिक घोटालों की आंधी ने यूरोप के लोगों का गुस्सा आसमान पर पहुंचा दिया है. लोगों की नाराजगी कहीं सड़कों पर तो कहीं चुनावों में निकल रही है.

इटली, स्पेन और ग्रीस इन तीनों देशों में शीर्ष नेताओं और अधिकारियों के घोटालों में कथित रूप से शामिल होने का बुरा असर हुआ. अब इस कड़ी में फ्रांस भी जुड़ गया है. फ्रांस की पूर्व वित्त मंत्री पर टैक्स में गड़बड़ी करने का आरोप लगा है. पेरिस के थिंक टैंक आईआरआईएस में अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर शोध करने वाले एडी फोगियर का कहना है, "सब इस तरह से सामने आ रहा है जिससे लोकप्रिय सिद्धांत की पुष्टि हो रही है, यह सिद्धांत कहता है कि सब कुछ बिगड़ चुका है."

फ्रांस और इटली

फ्रांस में पूर्व वित्त मंत्री के विवाद में घिरने के बाद लोगों का गुस्सा अभी सड़कों पर नहीं उतरा है. हालांकि दक्षिणी यूरोप के कुछ दूसरे देशों में, जो पिछले कई सालों से सरकारी खर्च में कटौती कर रहे हैं, वहां लोगों का गुस्सा तुरंत उबाल खा रहा है. इटली को ही देखिये कई घोटालों और विवादों के सामने आने के बाद यूरोप का यह देश फिलहाल राजनतिक गतिरोध में फंसा है. पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बैर्लुस्कोनी टैक्स घोटाला, पैसे दे कर सेक्स करने और दूसरे आरोपों में घिरे हैं. बैर्लुस्कोनी की हरकतों से तंग आ चुके इटली के लोगों ने अपना गुस्सा जताने के लिए फरवरी के आम चुनावों में पूर्व हास्य अभिनेता बेप्पे ग्रिलो की नई भ्रष्टाचार विरोधी पार्टी को 25 फीसदी वोट दे दिए. नतीजा यह हुआ कि देश में सत्ता का सारा समीकरण ही उलटा पुलटा हो गया. तीन अलग अलग खेमों में बंटी राजनीतिक पार्टियों के पास एक एक तिहाई जनमत है और कोई इस हालत में नहीं कि सरकार बना सके. यूरोजोन की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था राजनीतिक गतिरोध में फंस गई है. रोमा ट्रे यूनिवर्सिटी में राजनीतिक दर्शन पढ़ाने वाले गियाकोमो मारामाओ कहते हैं, "निश्चित रूप से राजनीतिक दल किसी भ्रम में हैं. उन सब ने एक ही तरह का काम नहीं किया लेकिन फिर भी लोगों में उनके लिए गुस्सा है."

भड़का स्पेन

इसी तरह स्पेन में भी कई विवादों पर लोगों का गुस्सा खूब भड़का. यहां तो लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन और ऑनलाइन अभियानों में लिफाफे का प्रतीक बना कर नेताओं और अधिकारियों को चिढ़ा रहे हैं. मैड्रिड की कॉम्प्लुटेंस यूनिवर्सिटी में समकालीन इतिहास पढ़ाने वाले प्रोफेसर एमिलियो डे डियेगो कहते हैं, "स्पेन में लोगों ने कभी भी पैसे की गड़बड़ियों को स्वीकार नहीं किया और अगर यह संकट के दौर में हो तो लोगों का गुस्सा सीमाओं के पार हो जाएगा."

2011 के आखिर से स्पेन की सत्ता पर काबिज पॉपुलर पार्टी दो जांच का सामना कर रही है. पार्टी पर प्रधानमंत्री मारिया राखोय समेत अपने वरिष्ठ अधिकारियों को चोरी छिपे पैसे देने का आरोप लगा है. प्रधानमंत्री इससे इनकार कर रहे हैं इसके अलावा उन पर सरकारी ठेके से जुड़े घोटाले में भी शामिल होने के आरोप हैं. सिर्फ इतना ही नहीं स्पेन का शाही परिवार भी भ्रष्टाचार की आंधी का सामना कर रहा है. स्पेन के एक जज ने राजकुमारी क्रिस्टीना पर भी घोटाले के संदिग्धों में शामिल होने की बात कही है. यह मामला राजकुमारी के पति और उनके पूर्व कारोबारी साझेदार से जुड़ा है.

नाराज ग्रीस भी 

ग्रीस में टैक्स की चोरी व्यापक रूप से फैली है लेकिन बीते महीनों में हजारों लोग संसद में बैठे "चोरों" को हटाने के लिए सड़कों पर उतर आए. लोग सरकारी खर्चों में कटौती से भी नाराज हैं. ग्रीस में 2000 से ज्यादा प्रमुख राजनेताओं, मीडिया मुगल और उद्योग जगत के लोगों से जुड़े एक घोटाले ने भी हलचल मचा रखी है जिसमें पैसा स्विस बैंक के खातों में गया है. इस विवाद में दोषियों के नाम साल 2010 में ही पेरिस से भेज दिए गए थे लेकिन दो साल तक इसे दो सरकारों ने दबाए रखा. हाल ही में यह प्रेस में आया है. उत्तरी यूरोप में भी कई जगहों पर सत्ता के दुरूपयोग और भ्रष्टाचार पर बवाल मचा है. बेल्जियम में 2012 में महारानी फाबियोला ने जब एक निजी संस्था बनाई तो बवाल मच गया क्योंकि लोगों ने इसे टैक्स देने से बचने का उपाय माना. यहां विरासत में मिलने वाली संपत्ति पर 70 फीसदी की दर से टैक्स देना होता है. इसके बाद 84 साल की महारानी ने समाजसेवी संस्था को भंग कर दिया है और उनकी सरकारी आमदनी भी सालाना 14 लाख यूरो से घट कर नौ लाख यूरो पर पहुंच गई है.

एनआर/एएम (एएफपी)

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