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दुनिया

हंगरी अब भी आप्रवासियों को न लेने पर अड़ा

यूरोपियन कोर्ट ऑफ जस्टिस के फैसले के बावजूद हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान आप्रवासियों को न लेने के अपने रुख पर कायम हैं. उनका कहना है कि आप्रवासियों को बसाने के मुद्दे पर "असल जंग" तो अब शुरू हुई है.

शरणार्थी संकट के चरम पर यूरोप आये शरणार्थियों को कोटे के आधार पर यूरोपीय संघ के देशों में बसाने की यूरोपीय संघ की योजना को यूरोपीय अदालत ने सही ठहराया है. लेकिन हंगरी अपने रुख में किसी तरह की नरमी को तैयार नहीं है. शुक्रवार को ओरबान ने कहा कि हंगरी अदालत के फैसले को स्वीकार करेगा और यूरोपीय संघ का सदस्य होने के नाते कानून के राज का सम्मान करता है. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले के कारण वह आप्रवासियों को खारिज करने वाली अपनी नीति को नहीं बदलेंगे.

हंगरी के सरकारी रेडियो के साथ इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "अदालत के फैसले में हंगरी से कुछ करने को नहीं कहा गया है." लक्जमबर्ग स्थित यूरोपियन कोर्ट ऑफ जस्टिस ने बुधवार को हंगरी और स्लोवाकिया की तरफ से दायर अपील को खारिज कर दिया और यूरोपीय संघ के इस अधिकार को मजबूत किया कि वह सदस्य देशों को शरणार्थियों को लेने का आदेश दे सके.

इस नीति के तहत हंगरी को 1,294 और स्लोवाकिया को 902 शरणार्थी लेने होंगे. अगर ये दोनों देश यूरोप आने वाले शरणार्थियों में से अपने हिस्से के शरणार्थियों को स्वीकार नहीं करते हैं तो उन्हें जुर्माना भरना पड़ सकता है.

शुक्रवार को ओरबान ने इस मुद्दे पर अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कही और यूरोपीय संघ से 2015 के कोटे में बदलाव की मांग भी की. उन्होंने कहा, "असली लड़ाई (यूरोपीय संघ के खिलाफ) तो अब शुरू हो रही है."

2015 में जब शरणार्थी संकट अपने चरम पर था तो दक्षिणपंथी नेता ओरबान ने कई प्रवासी विरोधी नीतियों को लागू किया. उन्होंने शरणार्थियों को रोकने के लिए अपनी सीमा पर कांटेदार तारों की बाड़ भी लगा दी. ओरबान ने आप्रवासियों को "जहर" और "आतंकवाद का ट्रोजन घोड़ा" बताया है.

पिछले हफ्ते ओरबान ने यूरोपीय आयोग के प्रमुख जाँ क्लोद युंकर को पत्र लिखा और 80 करोड़ यूरो की उस रकम में से आधा हिस्सा मांगा जो हंगरी ने कथित तौर पर अपनी सीमाओं को सुरक्षित बनाने के लिए खर्च की. युंकर ने इस आग्रह को ठुकरा दिया. उन्होंने कहा कि हंगरी आप्रवासियों को लेने से भी इंकार कर रहा है और रकम भी मांग रहा है.

युंकर ने गुरुवार को ओरबान को जबाव दिया, "एकजुटता एकतरफा रास्ता नहीं है." ओरबान ने इस पर कहा कि इस एकजुटता के चलते हंगरी आप्रवासियों के देश में तब्दील हो जायेगा और लोग इसके खिलाफ हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि हंगरी आप्रवासियों का देश नहीं है. उन्होंने कहा, "मेरी राय में यह एकजुटता नहीं है, यह हिंसा है." ओरबान ने यह भी कहा कि यूरोप के बहुत से अन्य देशों की तरह हंगरी के पास कोई "औपनिवेशिक विरासत" नहीं है.

एके/एमजे (एएफपी, एपी, डीपीए, रॉयटर्स)

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