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दुनिया

भारत में एर्दोवान: मुस्लिम राष्ट्रवादी और हिंदू राष्ट्रवादी नेता की मुलाकात

हाल के रेफरेंडम के बाद और मजबूत हो कर उभरे तुर्क राष्ट्रपति एर्दोवान दो दिनों के दौरे पर भारत में हैं. देखिए कौन से मुद्दे होंगे द्विपक्षीय वार्ता के केंद्र में.

अपने दो दिनों के भारत दौर पर पहुंचे तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोवान का भव्य स्वागत तो हुआ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात भी कम देखने लायक नहीं होगी. दोनों नेताओं में कई समानताएं हैं. जैसे कि दोनों ही दक्षिणपंथी राष्ट्रवाद के समर्थक हैं. दोनों ही विशाल बहुसांस्कृतिक लोकतंत्रों और उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाले देशों के नेता हैं. दोनों नेता अक्सर बेहद साधारण स्तर से अपनी शुरुआत करने के बारे में बातें करते हैं, धार्मिक समूहों से संबंधित रहे हैं और व्यक्तिगत रूप से भी गहरे धार्मिक माने जाते हैं.

दोनों अच्छे वक्ता हैं और आम आदमी के जीवन को और बेहतर बनाने की बातें करते हैं. दोनों सोशल मीडिया पर भी अपने फॉलोअर्स से सीधे संवाद करते हैं और भविष्य को लेकर अपने विजन से परिचित कराते रहते हैं. यहां तक कि दोनों के चुनावी वायदे भी समान हैं - ठोस आर्थिक विकास करना और गुड गवर्नेंस देना.

कुछ अंतर भी हैं. जैसे दोनों धार्मिक-राष्ट्रवादी समूहों से संबंधित तो रहे हैं, हालांकि एक मुस्लिम राष्ट्रवादी तो दूसरा हिंदू राष्ट्रवादी नेता है. मोदी और उनके समर्थक हिंदू राष्ट्रवाद के एक उदार रूप की बात करते हैं, लेकिन एर्दोवान और उनके समर्थक रुढ़िवादी मुस्लिम व्यवस्था चाहते हैं.

व्यापार और कारोबार

दोनों नेताओं के बीच व्यापारिक संबंधों को गहरा करने पर बातचीत होनी है. तुर्क नेता के साथ करीब 150 लोगों का बिजनेस डेलिगेशन पहुंचा है. भारत एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में तुर्की का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है. भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 2015-16 में द्विपक्षीय कारोबार करीब 28 फीसदी कम रहा. जहां तुर्की को भारत के निर्यात में 22 फीसदी से ज्यादा की कमी आयी, वहीं तुर्की के निर्यात में तो 47 फीसदी की भारी कमी दर्ज हुयी.

आतंकवाद और परमाणु सहयोग

आतंकवाद और एनएसजी में भारत की उम्मीदवारी के मुद्दे इस वार्ता में छाए रह सकते हैं. भारत और तुर्की दोनों ने ही आतंकवादी हमलों का दंश झेला है और इस बारे में किसी साझा रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं.

इसके अलावा 48 देशों का न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप ऐसा महत्वपूर्ण समूह है, तुर्की जिसका सदस्य है और भारत जिसकी सदस्यता चाहता है. यह समूह परमाणु शक्ति पैदा करने से जुड़ी तकनीक और मटीरियल पर नियंत्रण रखता है और भारत इस क्लब में प्रवेश की कोशिशें करता आया है.

तुर्की ने पहले कहा है कि भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ क्लब में शामिल होने के मामले में एक जैसा व्यवहार होना चाहिये. दोनों नेताओं की बातचीत से इस मुद्दे पर क्या दिशा निकलती है, इस पर सबकी निगाहें होंगी. एर्दोवान की कई देशों की यात्रा के कार्यक्रम में भारत उनका पहला ठिकाना है. इसके बाद वे रूस, चीन और अमेरिका भी जाने वाले हैं.

श्रीनिवासन मजूमदारु/आरपी

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