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दुनिया

एलन मस्क ने बताया, मंगल पर कैसे बसाएंगे बस्ती

स्पेसक्राफ्ट के एलन मस्क ने मंगल पर बस्ती बसाने का ख्वाब देखा है. उसकी एक योजना भी पेश कर दी है.

स्पेसएक्स कंपनी के प्रमुख एलन मस्क अब मंगल पर बस्ती बसाने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने इस हफ्ते अपनी योजना को दुनिया के सामने पेश किया जिसमें बताया गया कि वह एक बार में 100 लोगों को मंगल पर ले जाएंगे और उनकी बस्ती वहां बसा देंगे. इसके लिए एक अति विशाल स्पेसक्राफ्ट बनाया जाएगा. एक आदमी के मंगल पर जाने का खर्च भी एक लाख डॉलर से ज्यादा नहीं होगा.

पश्चिमी मेक्सिको में हुई इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉटिकल कांग्रेस में मस्क ने अपनी योजनाओं का खुलासा किया. उन्होंने बताया कि वह हमारे जीवनकाल में ही एक ऐसा रॉकेट मंगल पर भेजने में कामयाब हो जाएंगे. मस्क को उम्मीद है कि 2024 तक ऐसा पहला मानव मिशन मंगल की करोड़ों किलोमीटर की यात्रा पर रवाना हो जाएगा. लेकिन उससे पहले स्पेसएक्स एक मानवरहित मिशन मंगल पर भेजेगा जो सामान लेकर जाएगा. यह कार्गो मिशन 2018 में रवाना किया जा सकता है.

मस्क ने कहा, "मुझे लगता है कि मंगल की पहली यात्रा बहुत खतरनाक होगी. मौत का डर बहुत ज्यादा होगा. और कोई विकल्प नहीं होगा. असल में वहां जाने वालों के सामने सवाल यही होगा कि क्या आप मरने के लिए तैयार हैं. अगर हां तो फिर आप सही उम्मीदवार हैं."

मस्क की प्रेजेंटेशन में एक एनिमेटेड वीडियो भी दिखाया गया जिसमें एक हजार रॉकेट मंगल पर जाते दिखे. हर रॉकेट में 100 लोग दिखाए गए. स्पेसक्राफ्ट में रेस्तरां, केबिन, जीरो ग्रैविटी में खेले जाने लायक गेम्स और सिनेमा भी होंगे. मस्क ने कहा, "यह मजेदार तो होना ही चाहिए. इसे बोरिंग तो नहीं बनाया जा सकता."

दक्षिण अफ्रीका में जन्मे कनाडाई-अमेरिकी उद्योगपति मस्क को इस योजना के लिए बहुत बड़ी निजी और सरकारी मदद की जरूरत होगी. लेकिन अभी तक किसी सरकारी सहयोग की जानकारी नहीं दी गई है. मस्क का मानना है कि पहली उड़ान ज्यादा महंगी होगी लेकिन वह कोशिश करेंगे कि यह यात्रा हर उस व्यक्ति के बजट में हो जो मंगल पर जाना चाहता है.

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वैसे विशेषज्ञ मस्क के इस ऐलान को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं हैं. मस्क को लग रहा है कि अपनी जिंदगी को खतरे में डालकर पहले मिशन पर जाने वाले लोग मानवता के लिए नया रास्ता बनाएंगे लेकिन एक विशेषज्ञ ने कहा कि इस योजना में दूरदृष्टि तो है लेकिन यह जानकारी नहीं है कि होगा कैसे. मंगल से धरती की दूरी 22.5 करोड़ किलोमीटर है. वहां रहने के लिए बस्ती बसाना भी बेहद महंगा काम होगा. वहां रहने लायक वातावरण वाली बस्तियां बनाने पर कितना पैसा खर्च आएगा, इसका अनुमान तक नहीं है. जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में स्पेस पॉलिसी इंस्टिट्यूट के मानद प्रोफेसर जॉन लोग्सडन कहते हैं कि बहुत सारी तकनीकी चुनौतियां होंगी मसलन यात्रा के दौरान रॉकेटों में ईँधन कैसे भरा जाएगा. ऐसा आज तक नहीं किया जा सका है. फिर मार्स पर भी एक ईंधन डिपो बनाना होगा.

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स्पेसएक्स ने इंजीनियरिंग की दुनिया में बड़े और अहम मुकाम हासिल किए हैं. फाल्कन 9 रॉकेट को सीधा खड़ा जमीन पर उतारना उसका एक अजूबा था. उसने ऐसे रॉकेट बनाए हैं जो दोबारा इस्तेमाल किए जा सकते हैं. लेकिन मंगल का ख्वाब अभी पूरा होने से काफी दूर है, कम से कम 22.5 करोड़ किलोमीटर दूर.

वीके/एके (एएफपी)

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