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विज्ञान

एकदम सही थे आइनस्टाइन - फिर से मिली गुरूत्वीय तरंग

कुछ महीने पहले गुरुत्वीय तरंग के अस्तित्व को किताबों से बाहर असल में खोज लेने की घोषणा की गई थी. इसी सिलसिले में एक बार फिर से इसे खोजा गया है.

लिगो और विर्गो के सांझे शोध अभियान को पिछले साल एक जबरदस्त सफलता हाथ लगी जब लिगो के पर्यवेक्षक यंत्रों ने पहली बार गुरुत्वीय तरंगों को रिकॉर्ड किया. अब एक बार फिर से ऐसे ही सिग्नल दोबारा देखे गए हैं. नेश्नल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च (सीएनआरएस) का कहना है, ''यह सिग्नल दो ब्लैकहोल्स के मिलने के आखिरी ​क्षण में उठी हलचल से आए हैं.''

गुरुत्वीय तरंगों में उनके स्रोत और गुरुत्व की प्रकृति से जुड़ी जानकारियां होती हैं, जिन्हें इसके अलावा और कहीं से नहीं पता किया जा सकता. लिगो और विर्गो के साथ काम कर रहे भौतिकविज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि पिछले साल 26 दिसंबर को दिखाई दी तरंगें उन दो ब्लैकहाल्स के आपस में मिलने के समय गुरुत्वीय तरंगें उपजी थीं.

पहली बार देखी गई इन गुरुत्वीय तरंगों के मुकाबले दूसरी बार देखी गई तरंगें कमजोर हैं. हालांकि इससे इस बात की पुष्टि हुई है इस प्रकार की भयावह घटनाएं अंतरिक्ष में अपेक्षाकृत लगातार होती रहती हैं. इसका मतलब है कि 2016 के आखिरी तक इसे और भी कई बार देखे जा सकने की संभावना है. सीएनआरएस का कहना है, ''फिर से देखी गई ये तरंगें वैज्ञानिकों को इन दोनों ब्लैकहोल्स को और समझने में मदद पहुंचाएगा.''

आइनस्टाइन ने अपने सिद्धांत में समझाया था कि ये लहरें या तो तालाब में पत्थर फेंकने से उठी लहरों की तरह दिख सकती हैं या एक कसी हुई जाली की तरह जो कि उस पर रखे गए भार से झुकी हुई है. इसमें जाली को दिक् और काल के झुकाव के बतौर बताया गया है. इन तरंगों का गुणधर्म प्रकाशीय तरंगों के गुणधर्म से बिलकुल अलग है. लेजर इंटरफर्मेटर ग्रैविटेशनल वेब ऑब्जरवेटरी ग्रैविटेशन वेब का पता लगाने के लिए किया जा रहा एक प्रयोग है. 1992 में शुरू हुए शोध की सफलता अब सामने आई है. दुनिया भर से इससे 900 वैज्ञानिक जुड़े हुए हैं.

इस तरह आइनस्टाइन के एक शताब्दी पहले दिए सिद्धांत को दो बार पुष्टि हो चुकी है. पिछले साल तक वैज्ञानिकों के पास इन तरंगों के बारे में कुछ अप्रत्यक्ष साक्ष्य ही थे. जिससे उसके बारे बहुत तथ्यपरक कल्पना कर पाना संभव नहीं है.

जेसी विंगर्ड/आरजे

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