1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

विज्ञान

लास वेगास शूटर के दिमाग में घुसेगी पुलिस

लास वेगास के हमलावर स्टीफन पैडॉक का दिमाग अमेरिका के लिए शोध का विषय बन गया है. हमलावर का इरादा क्या था, क्यों उसने ऐसा किया, यह पता लगाने के लिए दिमाग की बारीकी से जांच होगी.

अक्टूबर की शुरुआत में लास वेगास के एक रॉक कंसर्ट के दौरान लोगों पर गोलियां बरसाने वाले हमलावर का मकसद क्या था, इस पर अभी भी सवालिया निशान लगा हुआ है. पुलिस 64 वर्षीय स्टीफन पैडॉक के किसी भी तरह के आतंकी संपर्कों के बारे में पता नहीं लगा पाई है. 58 लोगों को मौत के घाट उतारने के बाद पैडॉक ने अपनी भी जान ले ली. लेकिन उसने ऐसा क्यों किया, इस सवाल का जवाब अब पुलिस पैडॉक के दिमाग के जरिये लगाना चाहती है.

पैडॉक के दिमाग की अटॉप्सी पहले ही हो चुकी है लेकिन इसमें पुलिस को कुछ भी खास या असामान्य नहीं मिला. इसलिए अब दिमाग को माइक्रोस्कोप के जरिये परखा जाएगा. इस काम के लिए दिमाग को कैलिफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी भेजा गया है. अटॉप्सी के दौरान दिमाग को अलग अलग हिस्सों में बांटा जाता है और डॉक्टरों की प्रशिक्षित निगाहें बताती हैं कि कहीं कोई ट्यूमर या सामान्य से अलग कुछ तो नहीं है. लेकिन अब जो फोरेंसिक जांच की जाएगी उसमें जगह जगह से दिमाग के ऊतकों को निकाल कर माइक्रोस्कोप से देखा जाएगा. 

कौन था लास वेगास का हमलावर?

इस जांच में एक महीने तक का समय लग सकता है. यहां डीएनए और तंत्रिका तंत्र संबधी बीमारियों पर ध्यान दिया जाएगा. साथ ही पता लगाया जाएगा कि पैडॉक को स्ट्रोक, मल्टीपल स्क्लेरॉसिस या मिरगी जैसी कोई बीमारी तो नहीं थी. दिमाग में किसी भी तरह के इंफेक्शन या फिर रक्त वाहिकाओं में किसी तरह की रुकावट का भी पता लगाया जाएगा. इस तरह की जांच अमेरिका में केवल हाई प्रोफाइल मामलों में ही की जाती है. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी को निर्देश दिए गए हैं कि वह जांच में खर्चे की चिंता ना करे.

हालांकि कई जानकार इसे वक्त की बर्बादी बता रहे हैं. न्यूरोसाइंटिस्ट डगलस फील्ड्स ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि मास शूटिंग और आतंकवाद से जुड़ी भयानक घटनाओं में मस्तिष्क की बीमारी का बहुत कम हाथ होता है, जरूरी नहीं है कि मानसिक रोगियों को किसी तरह की बीमारी भी हो. उनका कहना है, "जब पुलिस मकसद की खोज करती है, तो इस तरह के मामलों में यह तरीका ठीक नहीं बैठता क्योंकि ये रोष में किए गए अपराध हैं और रोष की कोई वजह नहीं होती. इस तरह के अपराध जुनून में किए जाते हैं."

इससे पहले अमेरिका में 1966 में टेक्सास में इस तरह का मामला देखने को मिला था. उस वक्त के व्यक्ति ने क्लॉक टावर पर खड़े हो कर गोलियां चलाई थीं, जिसमें 13 लोगों की जान गयी थी. अटॉप्सी में पता चला था कि उसके दिमाग में करीब एक इंच का ट्यूमर था. हालांकि इस पर अब भी बहस जारी है कि ट्यूमर उस शूटआउट की वजह था या नहीं.

लास वेगास की वारदात आधुनिक अमेरिका के इतिहास में सबसे बड़ा नरसंहार है. एक होटल के 32वे माले से पैडॉक ने लोगों पर हजार से भी ज्यादा गोलियां बरसाईं. इसमें 58 लोगों की जान गयी और सैकड़ों घायल हुए.

आईबी/एनआर (एपी)

DW.COM