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विज्ञान

क्या जरूरी है गर्भावस्था में सप्लीमेंट लेना?

गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर कई तरह के सप्लीमेंट लेने को कहते हैं. लेकिन क्या दिन भर फॉलिक एसिड, मल्टीविटामिन, आयरन और कैल्शियम की गोलियां लेना सच में जरूरी है?

जैसे ही कोई महिला गर्भवती होती है, उसे चारों तरफ से नसीहतें मिलने लगती हैं कि ये खाओ, वो खाओ, इतना खाओ, उतना खाओ. सिर्फ घर वाले ही नहीं डॉक्टर भी खाने के लिए बहुत कुछ दे देते हैं. कोई डॉक्टर ढेर सारी सप्लीमेंट की गोलियां पकड़ा देता है, तो कोई टॉनिक की शीशी. लेकिन जच्चा बच्चा को क्या वाकई इतनी खुराक की जरूरत होती है? ब्रिटेन में हुई एक रिसर्च दिखाती है कि अधिकतर मामलों में यह सिर्फ पैसे की बर्बादी है.

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इस शोध के अनुसार दवा बनाने वाली कंपनियां गर्भवती महिलाओं को "सॉफ्ट टारगेट" के रूप में इस्तेमाल करती हैं. कंपनियां जानती हैं कि गर्भवती महिला दवाएं नहीं ले सकती, इसलिए उन्हें सप्लीमेंट बेचने के तरीके निकाले जाते हैं. अधिकतर सप्लीमेंट आप बिना डॉक्टर की रसीद दिखाए भी केमिस्ट से खरीद सकते हैं. बाजार में इनकी भरमार है और हर कंपनी अपने प्रोडक्ट को दूसरे से बेहतर साबित करने में लगी रहती है.

इन गोलियों में कई बार 20 से भी अधिक तरह के विटामिन और मिनरल मौजूद होते हैं. कमाल की बात यह है कि इन चीजों को कॉम्बिनेशन में लिया जाना जरूरी होता है ताकि वे अपना असर दिखा सकें. मिसाल के तौर पर आयरन को विटामिन सी के साथ लेना जरूरी होता है, नहीं तो वह खून में मिल ही नहीं पाता. इसके विपरीत आयरन को यदि कैल्शियम के साथ लिया जाए, तो उसका कोई असर नहीं हो पाता. लेकिन इन गोलियों में सभी चीजें एक साथ मौजूद होती हैं. इसलिए इस बात पर भी सवाल उठते हैं कि क्या ये वाकई असर करती भी हैं.

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गर्भवती महिलाओं को पहले तीन महीने 400 एमजी फॉलिक एसिड लेने की सलाह दी जाती है. इसी तरह पूरी गर्भावस्था के दौरान 10 एमजी विटामिन डी भी जरूरी बताया जाता है. लेकिन अधिकतर पश्चिमी देशों में आटे में फॉलिक एसिड पहले से ही मिला होता है. इस तरह से ब्रेड खा कर ही फॉलिक एसिड की जरूरत पूरी हो जाती है. वहीं भारत में जहां साल भर सूरज चमकता है, शरीर को धूप के जरिये ही विटामिन डी मिल जाता है.

ऐसे में रिसर्च यह दावा करती है कि सप्लीमेंट की जरूरत सिर्फ तब पड़नी चाहिए जब डॉक्टरी जांच में पता चले कि शरीर में किसी चीज की कमी है. इस तरह से लोगों को पैसे बर्बाद करने से बचाया जा सकता है. पश्चिमी यूरोप में गर्भवती महिलाएं इन सप्लीमेंट पर औसतन महीने के 30 यूरो यानी करीब दो से ढाई हजार रुपये खर्च करती हैं.

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रिसर्च के अनुसार जरूरत से ज्यादा सप्लीमेंट बच्चे की सेहत के लिए हानिकारक भी हो सकता है, खास कर विटामिन ए. ऐसे में यह सुझाव दिया गया है कि महिलाओं को सप्लीमेंट से ज्यादा पौष्टिक आहार पर ध्यान देना चाहिए. भारत समेत जिन देशों में अनाज से बनी चीजों में फॉलिक एसिड नहीं मिला होता है, वहां गर्भवती महिलाओं के लिए फॉलिक एसिड लेना जरूरी है. अगर शरीर में किसी भी चीज की कमी है, तो सप्लीमेंट के जरिये उसे पूरा करें, अन्यथा अच्छे खानपान के जरिये अपना और अपने बच्चे का ख्याल रखें.

ईशा भाटिया (एएफपी)

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