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दुनिया

माओ के बाद सबसे ताकतवर नेता बनते शी जिनपिंग

चीन ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी विचारधारा को कम्युनिस्ट पार्टी के संविधान का हिस्सा बना दिया है. इससे संकेत मिलता है कि शी माओ त्सेतुंग के बाद चीन के सबसे ताकतवर नेता बनना चाहते हैं.

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने मंगलवार को घोषणा की कि वह राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नाम और उनके राजनीतिक दर्शन को पार्टी के संविधान का हिस्सा बना रही है. आधुनिक कम्युनिस्ट चीन के संस्थापक माओ त्सेतुंग के साथ संविधान में "एक नये दौर के लिए चीनी विशेषताओं वाले समाजवाद के बारे में शी जिनपिंग के विचार को" शामिल किया गया है. पूर्व राष्ट्रपति देंग शियाओपिंग का नाम उनके निधन के बाद संविधान में शामिल किया गया था.

ताजा कदम से पता चलता है कि 2012 में सत्ता संभालने वाले शी ने कितनी तेजी से चीन की सत्ता पर अपनी पकड़ को मजबूत किया है. पार्टी संविधान संशोधन के बारे में आधिकारिक बयान में कहा गया है कि शी की विचारधारा "पार्टी के काम के लिए एक प्रकाशपुंज होगी." इसके बुनियादी सिद्धांतों में अर्थव्यवस्था से लेकर आम नागरिक की गतिविधियों और सोशल मीडिया तक, समाज के सभी पहलुओं को नियंत्रित करने में कम्युनिस्ट पार्टी की भूमिका पर जोर दिया गया है.

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हांगकांग की चाइनीज यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर विली लाम कहते हैं कि संविधान में शी को शामिल किये जाने के बाद वह खुद को माओ जैसा नेता बनाने में सक्षम होंगे, यानी जब तक वह स्वस्थ रहेंगे, तब तक नेता बने रहेंगे.

यह घोषणा चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की अहम कांग्रेस के समापन सत्र में हुई. हर पांच साल में होने वाले इस आयोजन में पार्टी के लगभग 2,300 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. बुधवार को नयी सेंट्रल कमेटी और पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी चुनी जायेगी. शी जिनपिंग को पार्टी महासचिव के तौर पर पांच साल का दूसरा कार्यकाल मिलना तय माना जा रहा है.

चीनी राष्ट्रपति ने कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस के उद्घाटन भाषण में "नए दौर" की बात कही थी जिसके तहत चीन को 2050 तक "एक ग्लोबल लीडर" बनाना है. शी ने अपनी छवि एक जिम्मेदारी नेता की बनायी है.

एके/एनआर (एएफपी, एपी)

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