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विज्ञान

यहां नहीं चलेगा "मुफ्त का चंदन, घिस मेरे नंदन"

चाय-कॉफी पीने गये और वहीं फोन या लैपटॉप चार्जिंग पर लगा दिया. सब वहीं चार्ज कर लिया. मुफ्तखोर मेहमानों पर नकेल लगनी शुरू हो चुकी है.

ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना के टैरासनकैफे ने इसकी शुरूआत कर दी है. कई घंटों तक फोन और लैपटॉप चार्ज करने वाले ग्राहकों से परेशान होकर कैफे ने चार्जिंग का पैसा लेना शुरू किया. कैफे चलाने वाली गालिना पोकोर्नी ज्यादा देर तक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस चार्ज करने वालों से एक यूरो (करीब 71 रुपये) अतिरिक्त लेती हैं.

गालिना कहती हैं, "माफ कीजिए लेकिन मेरा बिजली का बिल कौन देगा? लोग सोचते हैं कि सब कुछ मुफ्त मिल सकता है. आप हर सुबह भी अपनी आंख मुफ्त में नहीं खोलते हैं." 15 मिनट की चार्जिंग से उन्हें कोई परेशानी नहीं, लेकिन अगर इससे ज्यादा देर बिजली इस्तेमाल की गई तो ज्यादा बिल देना पड़ता है. एक साथ फोन, टैबलेट या लैपटॉप चार्ज करने वालों से गालिना हर डिवाइस के हिसाब से अलग अलग पैसा लेती हैं.

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गालिना के मुताबिक वह इसकी शुरुआत दिसंबर 2016 में ही कर चुकी हैं. हाल ही में ऑस्ट्रिया के एक अखबार ने "अटपटा बिल" नाम से खबर छापी, जिसके बाद बाकी लोगों को इसका पता चला. कुछ लोग उनके इस कदम को वाजिब करार देते हैं.

वहीं दूसरे इसकी आलोचना कर रहे हैं. उनका दावा है कि गालिना चार्जिंग के नाम पर बहुत ज्यादा पैसा ले रही हैं. टेक्नोलॉजी वेबसाइट ZDNet के मुताबिक साल भर तक मोबाइल चार्ज किया जाए तो भी एक यूरो के बराबर बिल नहीं आता.

लेकिन गालिना कहती हैं कि परेशानी बिल से ज्यादा उन ग्राहकों से है जो सिर्फ मुफ्त वाई फाई और बिजली का इस्तेमाल करने के इरादे से आते हैं.  ऑस्ट्रिया के कुछ और कैफे मालिक भी ऐसे ग्राहकों से परेशान हैं. कैफे मालिकों के मुताबिक ऐसे ग्राहक परिवार या दोस्तों के साथ आने वाले लोगों के लिये माहौल खराब कर देते हैं.

मुफ्त वाई फाई और चार्जिंग की सुविधा देने की होड़ के बीच वियना के कई कैफे अब एकदम उल्टी दिशा में जा रहे हैं. कई कैफे मालिकों ने बिजली के सॉकेट छुपा दिये हैं. कुछ ने वाई फाई टाइम पर लिमिट लगा दी है. कुछ ने तो वाई फाई बंद ही कर दिया है.

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