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दुनिया

झुग्गी बस्ती वालों ने खड़ा कर लिया अपना मीडिया

अपराधों के लिए बदनाम रियो की झुग्गी बस्तियों के लोग अपना मीडिया प्रोजेक्ट चला रहे हैं ताकि अपनी सही छवि को पेश कर सकें.

ब्राजील की कार्ला सिकोस इस बात से खुश नहीं थीं कि उनके समुदाय के बारे में मीडिया में खराब खबरें छपती हैं. उन्होंने फैसला किया कि वह अपने समुदाय की, अपने इलाके की दूसरी छवि दुनिया के सामने लाएंगी और उन्होंने अपना एक वैल्पिक मीडिया प्लैटफॉर्म तैयार कर लिया.

अपराधों के लिए बदनाम रियो के सिटी ऑफ गॉड के लोगों ने अपना मीडिया प्लैटफॉर्म तैयार कर लिया है. और यह प्लैटफॉर्म उस पूरे चलन का हिस्सा भर है जो अपनी आपराधिक छवि से परेशान सिटी ऑफ गॉड के लोगों को बदल रहा है. इस काम में सोशल मीडिया का विस्फोटक विस्तार लोगों के काम आया है. इस इलाके के लोगों के पास अक्सर जमीन या संपत्ति के वैध अधिकार नहीं होते और वे हर वक्त उजाड़ दिए जाने के डर में जीते हैं. लेकिन उनकी कहानियां अक्सर खबरों में तब होती हैं जब इलाके में कोई कत्ल होता है या गोलीबारी अथवा पुलिस मुठभेड़. अब लोगों ने अपना एक मीडिया प्लैटफॉर्म शुरू किया है. सिटी ऑफ गॉड हैपनिंग्स नाम के इस प्लैटफॉर्म को स्वयंसेवी ही चलाते हैं. इसकी संपादक सिकोस हैं. वह बताती हैं, "बाहर से रिपोर्टर्स बस बुरी खबरें कवर करने आते हैं. अच्छी खबरें तो यूं ही बह जाती हैं. मैंने यह प्लैटफॉर्म तैयार किया ताकि लोग इस समुदाय की अच्छी खबरें भी जान सकें."

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केंद्रीय रियो से करीब 20 किलोमीटर दूर अपने घर से काम करने वाली सिकोसी कहती हैं कि वह ऐसी कहानियां सामने लाना चाहती हैं जो लोगों को जोड़ सकें. 'सिटी ऑफ गॉड हैपनिंग्स' के फेसबुक पेज को 53 हजार लोगों ने लाइक किया है. इसके अलावा वाट्सऐप ग्रुप्स के जरिये भी हजारों लोगों को जोड़ा गया है. इस प्लैटफॉर्म पर आमतौर पर स्थानीय घटनाओं, नए ट्रेनिंग कोर्स, नौकरियां या फिर पार्टियों की सूचनाएं रहती हैं.

वेबसाइट पर ऐसे लोगों के बारे में भी जानकारियां हैं जो कभी सिटी ऑफ गॉड्स में रहे लेकिन वे कामयाब होकर आगे बढ़ चुके हैं. सिकोस मिसाल के तौर पर एक बैले डांसर का जिक्र करती हैं जो अब अमेरिका में सिनसिनाटी बैले की सदस्य हैं. हाल ही में रियो में हुए ओलंपिक के दौरान सिटी ऑफ गॉड्स हैपनिंग्स को तो सबसे बड़ी खबर मिली जब उन्हीं के इलाके की लड़की जूडोका रपाएला सिल्वा ने ब्राजील के लिए रियो में पहला गोल्ड मेडल जीता. इसके बाद मुख्य धारा के मीडिया का ध्यान भी इलाके पर गया.

टेक्सास एएंडएम यूनिवर्सिटी में कम्युनिकेशंस के प्रोफेसर स्टुअर्ट डेविस कहते हैं कि सिटी ऑफ गॉड्स में जो हो रहा है वह ब्राजील के पिछड़े इलाकों में दिख रहे सामुदायिक मीडिया के उफान का हिस्सा है. लेकिन ऐसा नहीं है कि सब जगह बस अच्छी अच्छी खबरों के लिए काम हो रहा है. झुग्गी बस्तियों में कई मीडिया प्रोजेक्ट चल रहे हैं जिनमें विवादास्पद मुद्दे भी उठाए जा रहे हैं. मसलन भ्रष्टाचार, विस्थापन और मानवाधिकार उल्लंघन पर भी लोग बात कर रहे हैं. डेविड बताते हैं, "अति स्थानीय मीडिया प्रोजेक्ट में बढ़ोतरी हुई है और लोग अपने आसपास के स्थानीय मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं."

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पापो रेटो या स्ट्रेट टॉक ऐसा ही एक प्रोजेक्ट है जिसमें कॉम्पलेक्स डो अलेमाओ नामक बस्ती में पुलिस द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों को दस्तावेजी रूप दिया जा रहा है. ऐसा कोई आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है कि अलग अलग बस्तियों में कितने मीडिया प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं क्योंकि तुलाने यूनिवर्सिटी में इंडिपेंडेंट मीडिया की पढ़ाई कर रहे विकी मायर कहते हैं कि ये प्रोजेक्ट या तो बंद हो जाते हैं या फिर इनका मुख्य विषय बदलता रहता है. लेकिन मायर कहते हैं कि इस तरह के अवसर उन नागरिकों के लिए बहुत अहम हैं जिनकी बात आमतौर पर सामने नहीं आ पाती है.

वीके/एमजे (रॉयटर्स)

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