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दुनिया

नीतीश का खौफ: प्रमोशन नहीं चाहते पुलिसवाले

बिहार में शराबबंदी पुलिसवालों के लिए मुसीबत बन रही है. सरकार की सख्ती से पुलिस अफसरों में हलचल है. डर इतना ज्यादा है कि प्रमोशन तक लेने को राजी नहीं हैं.

बिहार के पुलिसवाले प्रमोशन नहीं चाहते. वे लिख-लिख कर दे रहे हैं कि हमें प्रमोशन नहीं चाहिए. एक, दो नहीं कम से कम से 200 पुलिस अफसर लिखकर दे चुके हैं कि उन्हें प्रमोशन नहीं चाहिए. भारतीय टीवी चैनल एनडीटीवी की वेबसाइट ने यह खबर छापी है.

अपराधों के लिए आलोचना झेल रही बिहार सरकार के सामने यह नई समस्या खड़ी हो गई है कि पुलिस अफसर ड्यूटी ही नहीं चाहते. एनडीटीवी ने बिहार पुलिस असोसिएशन में अपने सूत्रों के हवाले लिखा है कि 200 से ज्यादा पुलिस अफसर लिखित में थाना इंचार्ज के रूप में प्रमोशन को नकार चुके हैं.

एनडीटीवी का कहना है कि यह मामला शराबबंदी और उसे लागू करने को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सख्ती से जुड़ा है. पिछले महीने ही राज्य ने शराबबंदी कानून को और सख्त कर दिया है. अब यदि कोई व्यक्ति शराब पीता पाया जाता है तो उसके पूरे परिवार को सजा हो सकती है. साथ ही उस इलाके के पुलिसवाले को भी सख्त कार्रवाई से गुजरना होगा. इसका नतीजा यह हुआ है कि पिछले हफ्ते 11 थाना इंचार्ज 10 साल के लिए निलंबित कर दिए गए. उनके इलाके में शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाला साज ओ सामान मिला था. इसका खामियाजा उन्हें निलंबन के रूप में उठाना पड़ा.

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इस तरह की कार्रवाई से पुलिस अफसर नाखुश हैं. बिहार पुलिस असोसिएशन के सचिव मृत्युंजय कुमार सिंह ने एनडीटीवी से कहा, "अच्छे काम करने के लिए पुरस्कृत किए जाने के बजाय पुलिसवालों को संदिग्ध आधारों पर सजा दी जा रही है."

पुलिस संगठन चाहता है कि यूं ही किसी को निलंबित करना ठीक नहीं है और पुलिसवालों को सस्पेंड करने से पहले सीनियर अधिकारियों द्वारा मामले की जांच की जानी चाहिए. नए शराबबंदी कानून से भी पुलिस अफसर नाखुश हैं. उनका कहना है कि इससे उनके करियर को लेकर मुश्किलें खड़ी हो गई हैं. पुलिस वालों की राय है इस कानून ने सारी ताकत एक्साइज डिपार्टमेंट को सौंप दी है जो प्रतिबंध को सफल दिखाने के लिए बेवजह दबाव बना रहे हैं.

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पिछले साल सितंबर में तीसरी बार मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार ने चुनाव प्रचार के दौरान बिहार में शराबबंदी का वादा किया था जिसे उन्होंने सत्ता में आते ही पूरा कर दिया था. लेकिन पहले यह प्रतिबंध चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना था. इस साल अप्रैल में उन्होंने तय किया कि चरणबद्ध प्रतिबंध की जरूरत नहीं है और सारे राज्य में शराब पर पाबंदी लगा दी. इससे राज्य को 4000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है.

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