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दुनिया

जर्मनी में फिर किया प्रवासी ने हमला, लोगों में चिंता

रविवार रात एक सीरियाई प्रवासी ने आत्मघाती हमला किया. 12 लोग घायल हुए. एक हफ्ते के भीतर जर्मनी में यह तीसरा हमला है. हमलावर मारा गया है.

जर्मनी में फिर एक रिफ्यूजी ने हमला किया है. एक हफ्ते के भीतर यह तीसरा हमला है जिसके बाद रिफ्यूजी पॉलिसी को लेकर शुरू में छिड़ी बहस न सिर्फ ताजा हो गई है बल्कि चांसलर अंगेला मैर्केल के लिए मुश्किल भी बन गई है क्योंकि युद्ध पीड़ित रिफ्यूजियों के लिए उन्होंने बाहें खोल दी थीं और काफी विरोध के बावजूद उनका स्वागत किया था.

रविवार रात एक सीरियाई रिफ्यूजी ने एक कॉन्सर्ट के बाहर आत्मघाती हमला किया. उसके पिट्ठू बैग में विस्फोटक थे जिनसे उसने धमाका किया. धमाके में उसकी मौत हो गई जबकि 12 लोग घायल हुए. इनमें से तीन की हालत गंभीर बनी हुई है.

यह रिफ्यूजी 27 साल का सीरियाई युवक था. एक साल पहले ही उसकी असायलम की अर्जी को नामंजूर किया जा चुका था और उसे अस्थायी तौर पर रहने की इजाजत दी गई थी. रविवार को बवेरिया प्रांत के आंसबाख शहर में वह एक कॉन्सर्ट में प्रवेश चाहता था. आयोजकों ने उसे प्रवेश नहीं करने दिया जिसके बाद उसने गेट पर ही धमाका कर दिया.

देेखें, म्यूनिख हमले की तस्वीरें

बवेरिया में शुक्रवार को भी एक ईरानी मूल के जर्मन ने हमला किया था. म्यूनिख में हुए इस हमले में हमलावर सहित 10 लोग मारे गए थे. लेकिन अधिकारियों का कहना था कि वह इस्लामिक आतंकवादी हमला नहीं था. हालांकि रविवार को हुए हमले को लेकर अभी असमंजस बना हुआ है. राज्य के गृह मंत्री योआखिम हेरमन ने कहा, "मेरा विचार है कि दुर्भाग्य से यह एक इस्लामिक आत्मघाती हमला हो सकता है."

यह भी पढ़ें: यह है आतंकवाद का सबसे डरावना चेहरा

हमलावर के बारे में मिली जानकारी बताती है कि वह मानसिक रूप से बीमार था. हेरमन ने बताया कि उसका मानसिक रोगों के लिए इलाज चल रहा था और वह एक बार आत्महत्या की कोशिश भी कर चुका था. जब गृह मंत्री से पूछा गया कि क्या हमलावर के संबंध इस्लामिक स्टेट से हो सकते हैं तो उन्होंने कहा कि इस संभावना को नकारा नहीं जा सकता लेकिन अभी कोई सबूत नहीं मिला है. उन्होंने कहा, "उसकी मंशा और ज्यादा से ज्यादा लोगों को मार डालने की थी जिससे लगता है कि उसका कोई आतंकी संबंध हो सकता है."

लेकिन अधिकारी अभी इस नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं कि हमलावर की असली मंशा क्या था. आंसबाख में सरकारी प्रवक्ता मिषेल श्रोटबेर्गर ने कहा, "इस वक्त यह सिर्फ अटकलबाजी होगी कि उसका आतंकी संगठन से कोई संबंध था या नहीं." हालांकि इस बात को लेकर सभी स्पष्ट हैं कि यदि हमलावर कॉन्सर्ट के भीतर चला गया होता तो बड़ा नुकसान पहुंचा सकता था.

देखिए, सीरिया से जर्मनी कैसे पहुंचे लोग

जर्मनी में पिछले एक साल में लगभग 11 लाख प्रवासियों को प्रवेश मिला है. इस नीति को लेकर चांसलर अंगेला मैर्केल को विरोध भी झेलना पड़ा है लेकिन उन्होंने पूरी सख्ती के साथ इस विरोध का सामना किया है. लेकिन एक के बाद एक प्रवासियों के लगातार हमलों के बाद आलोचकों की आवाज तेज होती जा रही है. म्यूनिख हमले के बाद तो बवरेयिाई गृह मंत्री ने ऐसे हमलों के वक्त सेना की तैनाती की अपील की है. जर्मनी के कानून के मुताबिक देश में किसी जगह पर सेना तभी तैनात की जा सकती है जबकि कोई राष्ट्रीय आपातकाल हो. हेरमन इस स्थिति की तुलना आपातकाल से कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सेना की तैनाती का कानून पुराना पड़ चुका है और जर्मन लोगों को अपनी सुरक्षा का अधिकार है.

इसी साल जनवरी में आंसबाख शहर में एक कार्यक्रम शुरू किया गया था जिसके तहत प्रवासियों को जर्मनी के कानूनों की सामान्य जानकारी दी जा रही थी. देश में यह बहस लगातार जारी है कि इतनी बड़ी तादाद में आए प्रवासियों का समेकन कैसे होगा. इसी मकसद से उन्हें देश के कानून की जानकारी देने की योजना बनाई गई थी. कक्षाओं में लोगों को अपनी राय जाहिर करने की आजादी, धर्म और राज्य के अलग-अलग वजूद और महिलाओं और पुरुषों को बराबर के अधिकार जैसी बातें सिखाई गई थीं. इस दौरान एक फिल्म भी दिखाई गई थी जिसमें कहा गया, "जर्मनी एक आकर्षक देश है क्योंकि यहां हर इंसान का सम्मान होता है. और इसे ऐसा ही बनाए रखना है."

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