बगराम जेल अब अफगान हाथों में | दुनिया | DW | 26.03.2013
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दुनिया

बगराम जेल अब अफगान हाथों में

अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य शिविर बगराम के पास परवान जेल की बागडोर अब अफगान सरकार को दी जा रही है. बगराम जेल के 50 विदेशी कैदी ऐसे हैं जिनकी जिम्मेदारी अभी भी अमेरिका के ही पास रहेगी.

2002 में अमेरिकी सैनिकों ने बगराम को अपने हाथ में लिया. बगराम काबुल के पास है. इसे अफगानिस्तान के ग्वांतानामो के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस कैदखाने का मकसद था, खतरनाक माने जाने वाले आतंकवादियों को ग्वांतानामो तक पहुंचाना. अफगानिस्तान में अमेरिकी कमांडर जनरल जोसेफ डनफर्ड ने कहा, "जेल की जिम्मेदारी सौंपना अफगान सुरक्षा बलों को पूरी जिम्मेदारी देने का अहम हिस्सा है. इस समारोह से दिखाने की कोशिश की जा रही है कि अफगानिस्तान सक्षम, आत्मविश्वासी और स्वायत्त होता जा रहा है."

3,000 कैदी बिना कानूनी कार्रवाई के बुरी से बुरी मानवीय स्थिति में वहां रहे. अफगानिस्तान की बगराम को लेकर जिम्मेदारी का विरोध मानवाधिकार संगठन कर रहे हैं. एमनेस्टी इंटरनेशनल कई सालों से वहां दी जा रही यातना और अमानवीय हालात की निंदा कर रहा है. संगठन ने अफगान सरकार से मांग की है कि वह जेल की प्रणाली को सुधारे और कैदियों की यातना और शोषण पर रोक लगाए. अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन यूनामा ने 2013 में बगराम के बारे में इन आरोपों की पुष्टि की है.

सरकार का खंडन

काबुल में सरकार इन आरोपों को खारिज करती है. उसने इस सिलसिले में अपनी जांच भी शुरू की जिसने एक बार फिर इन आरोपों को सही बताया. इसके बावजूद काबुल बगराम को अपने कब्जे में लेना चाह रहा था. करजई का मानना था कि अमेरिकी नियंत्रण से उनके देश की स्वायत्तता भंग हो रही है. साथ ही, बिना कार्रवाई के कैदियों को जेल में रखना भी एक मुद्दा था. अफगान सुरक्षा विश्लेषक जनरल अतीकुल्लाह अमरखेल कहते हैं, "अगर अमेरिका अफगानिस्तान की स्वायत्तता को मान्यता देता है तो उसे हक नहीं है कि वह अफगानों को अपनी जेल में रखे." अब भी साफ नहीं है कि बगराम में रखे गए कैदी बेकसूर या आंतकवादी हैं या उन्हें कितने दिनों तक वहां रखा जाएगा.

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50 विदेशी कैदी अमेरिका की जिम्मेदारी

अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी को सुरक्षित करने के लिए अफगान सरकार ने शर्त रखी थी बगराम उसके हवाले किया जाए. 2012 में दोनों देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए और अफगान सरकार अपने कैदियों की जिम्मेदारी लेने लगी. 9 मार्च को एक समारोह में बगराम को अफगान सरकार को देने की बात हुई. करजई ने कहा, "ईश्वर चाहे तो जल्दी ही यह आगे बढ़ेगा क्योंकि हमारे संयम के बांध टूट रहे हैं. जैसे ही सब कुछ तय हो जाता है हम मासूम लोगों को जेल से रिहा कर देंगे, चाहे इसके लिए जितनी भी आलोचना सहनी पड़े. हमें पता है, वहां मासूम लोग हैं. लेकिन जिन्होंने कुछ किया है, बम लगाए हैं और हत्या की है, उन्हें सजा मिलेगी."

9 मार्च को होने वाला यह कार्यक्रम नहीं हुआ. अमेरिका को डर था कि खतरनाक कैदी रिहा होंगे. अमेरिकियों का मानना था कि काबुल तालिबान के साथ शांति वार्ताओं में हिस्सा लेना चाहता है. विश्लेषक अमरखेल कहते हैं कि यह अमेरिका की गलतफहमी है क्योंकि अमेरिका के दुश्मन अफगानिस्तान के दुश्मन हैं, वह अफगानों के खिलाफ भी लड़ रहे हैं.

बगराम अब अफगान हाथों में है. शायद यह घटना अमेरिका और अफगानिस्तान के बीच बेहतर संबंधों का संकेत है. माना जा रहा है कि इससे एक द्विपक्षीय सुरक्षा प्रणाली बनाने में भी मदद मिलेगी जिसके आधार पर 2014 के बाद अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान में रहेंगे. अफगानिस्तान में इस वक्त करीब एक लाख अंतरराष्ट्रीय सैनिक हैं जिनमें से 66,000 अमेरिकी हैं. अमेरिका ने कहा है कि 2014 के बाद उसके 12,000 सैनिक अफगानिस्तान में तैनात रहेंगे.

रिपोर्टः वसलत हसरत-नजीमी/एमजी (एएफपी)

संपादनः आभा मोंढे

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