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दुनिया

93 फ़ीसदी भारतीय विदेश में नौकरी को लालायित

एक रिपोर्ट के मुताबिक विदेश में काम करने की इच्छा रखने वाले लोगों में भारतीय सबसे आगे हैं. 93 फ़ीसदी भारतीय विदेश में काम करने की इच्छा रखते जबकि वैश्विक स्तर पर यह संख्या 50 फ़ीसदी है.

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कंसल्टिंग कपंनी प्राइसवॉटरहाउस कूपर्स ने अपनी एक रिपोर्ट के लिए एक विशेष तबक़े का अध्ययन किया जिसे 'मिलेनियल' का नाम दिया गया. 'मिलेनियल' को 'जनरेशन वाई' भी कहा जाता है जिनकी उम्र 15 से 35 साल के बीच है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 'मिलेनियल' पीढ़ी के लोगों में से 93 प्रतिशत अपने करियर के दौरान देश के बाहर काम करने को तैयार हैं.

दक्षिण अफ़्रीका में 92 प्रतिशत और तुर्की में 90 प्रतिशत लोग देश से बाहर काम करने को तैयार हैं यानी दोनों देश भारत से पीछे नहीं हैं. नीदरलैंड्स में सबसे कम, सिर्फ़ 62 प्रतिशत लोग अपना देश छोड़कर विदेश में काम करना चाहते हैं.

सर्वेक्षण के लिए 900 कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट से संबंधित जानकारी का विश्लेषण किया गया. साथ ही जनसंख्या संबंधित जानकारी और कंपनियों में काम कर रहे लोगों और कंपनी सीईओ की भी राय को ध्यान में रखा गया है.

प्राइसवॉटरहाउज़ कूपर्स के शंकर राममूर्ती का कहना है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए विदेश में अपने कर्मचारियों को भेजने का विकल्प उनकी समस्याओं का एक आसान समाधान है.

देशों में दाम और नियंत्रण बढ़ रहे हैं, साथ ही नई कुशलता वाले लोगों की भी ज़रूरत है. यह कंपनियों के लिए चुनौती है. राममूर्ती कहते हैं कि कम दाम में अच्छे काम के साथ साथ अगर लोगों को अलग संस्कृतियों के तौर तरीके भी सिखाए जाएं तो कंपनियां सफल हो सकती हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में 60 प्रतिशत लोग मानते हैं कि उन्हें अपनी नौकरियों में अपनी मातृभाषा के अलावा और भाषाओं का इस्तेमाल करना पड़ेगा.

94 प्रतिशत लोगों का मानना है कि वे अपने माता पिता के मुकाबले विदेश में ज़्यादा काम करेंगे. सर्वेक्षण में यह भी पता चला है कि भारत और चीन के कई नागरिक विदेश में सीखी कुशलताओं के साथ वापस अपने देश आ रहे हैं और उन्हें मिल रहे नए अवसरों को भुना रहे हैं.

रिपोर्टः पीटीआई/ एम गोपालकृष्णन

संपादनः एस गौड़

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