8.6 करोड़ बच्चों ने सिर्फ संघर्ष देखा है | दुनिया | DW | 25.03.2016
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दुनिया

8.6 करोड़ बच्चों ने सिर्फ संघर्ष देखा है

संयुक्त राष्ट्र बाल संस्था यूनीसेफ के मुताबिक दुनिया भर में सात साल की उम्र तक के 8.6 करोड़ ऐसे बच्चे हैं जिन्होंने जिंदगी में जंग और बर्बादी के अलावा कुछ नहीं देखा है. शांति क्या होती है उन्हें पता ही नहीं.

ये वे बच्चे हैं जिनका जन्म संघर्ष वाले इलाकों में हुआ और वे वहीं बड़े हो रहे हैं. लगातार तनाव और सदमों के बीच ही उन्होंने अब तक की जिंदगी गुजारी है. इन हालात में उनका मानसिक विकास भी ठीक ढंग से नहीं हो पाता. यूनीसेफ ने चेतावनी दी है कि संघर्ष के चलते इन बच्चों के दिमाग पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव जिंदगी भर के लिए उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन कर रह जाते हैं.

इन बच्चों में तमाम मानसिक समस्याएं विकसित हो जाती हैं. वे नहीं जानते कि सुरक्षा का अहसास क्या होता है. किसी शांत इलाके में रहने वाले बच्चों के जीवन में खेलकूद, दोस्त, नियमित दिनचर्याएं होती हैं. जबकि संघर्ष भरे इलाकों में रह रहे ये बच्चे जानते ही नहीं कि ऐसा जीवन कैसा होता होगा. खेलकूद, परिवार और दोस्तों का प्यार बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए अहम माना जाता है. यूनीसेफ प्रमुख पिया ब्रितो के मुताबिक कठिन परिस्थितियों में ये सब उन्हें नहीं मिल पाता, यह जिंदगी भर का नुकसान है जिसकी कोई भरपाई नहीं है.

संघर्ष के साये में

2011 से शुरू हुआ सीरिया का गृहयुद्ध अब तक ढाई लाख से अधिक जानें ले चुका है. देश की आधी आबादी देश छोड़ कर जाने पर मजबूर है. शरणार्थियों की जरूरतों से निपटना यूरोपीय देशों समेत संयुक्त राष्ट्र और मानव अधिकार संगठनों के लिए बड़ी चुनौती है. यूरोप में शरणार्थियों की संख्या 11 लाख तक पहुंच गई है. सीरिया और इराक में निकट भविष्य में संकट रुकता नजर नहीं आ रहा. लाखों शरणार्थियों को अपने यहां पनाह देने वाले मेजबान देशों के लिए भी मुश्किलें आसान होती नहीं दिख रही हैं. सीरिया से भाग रहे लोग यूरोप में प्रवेश करने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं.

साल 2014 के आंकड़ों पर आधारित ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स के मुताबिक इराक आतंकी गतिविधियों में सबसे आगे हैं. 2014 में इराक में 3370 आतंकी हमले हुए जिनमें करीब 10,000 लोग मारे गए और 15,000 के करीब घायल हुए. दूसरे स्थान पर है अफगानिस्तान. 2014 में अफगानिस्तान में हुए आतंकी हमलों में 4500 लोग मारे गए और 4700 जख्मी हुए. रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान से अंतरराष्ट्रीय शांति सैनिकों के हटाए जाने के बाद भी वहां तालिबान का साया बरकरार है. बीते दिनों कुंदुस में हुए हमलों में बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए.

वहीं नाइजीरिया में आतंकवादी समूह बोको हराम के 662 हमलों में 7512 लोग मारे गए. इन हमलों में 22,000 लोग घायल हुए. विजन ऑफ ह्यूमैनिटी की रिपोर्ट के मुताबिक बोको हराम के हमलों में मारे जाने वाले 77 फीसदी लोग निहत्थे नागरिक थे. पाकिस्तान में 2014 में आतंकवाद संबंधी 1821 घटनाएं हुईं. इनमें 1760 लोग मारे गए और 2836 घायल हुए. पाकिस्तान में कई आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं लेकिन प्रमुख है तहरीक ए तालिबान. पेशावर में स्कूल पर हुए हमले की जिम्मेदारी भी इसी संगठन ने ली थी जिसमें 132 स्कूली छात्र मारे गए. इसके अलावा यमन, लीबिया और सोमालिया जैसे देशों में भी हालात नहीं सुधर रही है..

एसएफ/एमजे (डीपीए/एफपी)

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