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दुनिया

70 साल बाद सेक्स बंधक की कहानी

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ली ओक सिओन को चीन के वेश्यालय में जापानी सैनिकों के लिए बंधक बनाकर रखा गया. वहां गुजरे तीन सालों की तकलीफ बीते 70 साल में भी खत्म नहीं हुई.

सिओन याद करते हुए बताती हैं कि उस समय वह 14 साल की थीं जब एक दिन बुसान में अपने घर से शाम के करीब 5 बजे निकलीं, और कुछ आदमियों ने जोर जबरदस्ती कर उन्हें कार में धकेल दिया. वे सिओन को चीन के एक वेश्यालय ले गए. युद्ध के अंत तक यहां हर दिन उनकी इच्छा के विरुद्ध जापानी सैनिक उनके साथ बलात्कार करते थे. सिओन कहती हैं कि उस समय उन्हें यह नहीं पता था कि अगले 60 सालों तक ना तो वह अपने देश कोरिया में दोबारा कदम रख पाएंगी ना ही अपने परिवार से मिल सकेंगी.

86 साल की हो चुकी सिओन इस बारे में खुल कर बात नहीं करतीं, "वह इंसानों के रहने लायक जगह नहीं थी," कहने में ही उनका गला रूंध गया. उन तीन सालों ने उनके बाकी के जीवन की इबारत लिख दी.

सेक्स बंधकों का दूसरा नाम

इस कड़वे अनुभव से गुजरने वाली सिओन अकेली नहीं थीं. आंकड़ों के अनुसार सिओन जैसी दो लाख और महिलाएं हैं जिन्हें सेक्स बंधक बनाकर इस्तेमाल किया गया. हालांकि पोट्सडैम यूनिवर्सिटी के इतिहासकार बर्न्ड स्टोएवर का कहना है कि इस संख्या के बारे में कोई पक्के सबूत मौजूद नहीं हैं. उन्होंने बताया कि इन महिलाओं को सेक्स बंधक के बजाय कंफर्ट विमेन यानि सेविका बुलाया जाता था.

1910 से 1945 के बीच जापानी उपनिवेश के दौरान यह स्थिति केवल कोरियाई महिलाओं की ही नहीं थी, इस काम में चीन, मलेशिया और फिलिपींस की महिलाओं को भी झोंका गया. इनमें ज्यादातर कम उम्र लड़कियां होती थीं जिनमें से कई इस यातना को बर्दाश्त नहीं कर पाईं. दो तिहाई लड़कियों की युद्ध खत्म होने से पहले ही मौत हो गई.

जुल्म की हद

सिओन ने बताया, "हमें डराने धमकाने के अलावा अक्सर छुरी चाकू भी हम पर इस्तेमाल होते थे. हम सभी 11 से 14 साल के बीच की उम्र की थीं और हमें नहीं लगता था कि कभी कोई हमें उस नर्क से बचा पाएगा." उस दौरान उन लोगों का बाहरी दुनिया से कोई नाता नहीं रह गया था. इस बीच कई लड़कियों ने आत्महत्या भी कर ली. कोई पानी में डूब गई तो किसी ने फांसी लगा ली. सिओन कहती हैं, "यह कहना बहुत आसान है कि इससे अच्छा तो मैं मर जाऊं, लेकिन ऐसा सचमुच कर पाना मुश्किल काम है. यह बहुत बड़ा कदम है."

Südkoreanerin Lee Ok-Seong

सिओन इस समय सिओल में सेक्स बंधकों के लिए बनाए गए एक आश्रम में रहती हैं.

युद्ध खत्म होने पर उस वेश्यालय का मालिक गायब हो गया. लड़कियां आजाद तो हो गईं थीं लेकिन यह नहीं जानती थीं कि अब वहां से जाएं कहां. सिओन आगे कहती हैं, "मेरे पास पैसे नहीं थे. पता नहीं था कहां जाना है. मैं बेघर हो गई थी और कई दिनों तक सड़कों पर सोई."

उन्हें यह भी नहीं पता था कि कोरिया वापस कैसे जाएं. सिर शर्म से झुका महसूस होता था. घर वालों से आंख मिला पाने की हिम्मत बाकी नहीं थी. उन्होंने चीन में ही रहने का फैसला किया.

नई जिंदगी

सिओन ने चीन में ही कोरियाई मूल के एक व्यक्ति से शादी कर ली. उसके पहले से बच्चे थे. सिओन कहती हैं, "मुझे लगा उन बच्चों की देखभाल करना मेरी जिम्मेदारी थी. उनकी मां मर चुकी थी और मेरे अपने कोई बच्चे होने नहीं वाले थे." वेश्यालय में रहने की वजह से उन्हें यौन रोग सिफिलिस भी हो गया और उनकी स्थिति काफी खराब हो गई. जान बचाने के लिए डॉक्टरों को उनका गर्भाशय निकालना पड़ा. वह हंसते हुए कहती हैं कि उनके पति ने उन्हें बहुत अच्छी तरह रखा वरना उनके लिए जीवन बहुत मुश्किल हो चुका था.

स्टोएवेर मानते हैं कि कुछ साल पहले तक सेक्स बंधकों के लिए समाज में कोई जगह नहीं थी और उनकी हालत बहुत खराब थी. युद्ध खत्म होने के सालों बाद लोगों ने इनके बारे में बात करना शुरू किया. पहली बार 1991 में एक सेक्स बंधक ने इस बारे में खुलकर बात की और अपने जैसी 250 महिलाओं को इस बारे में बात करने के लिए प्रेरित किया. ये वे महिलाएं थीं जिन्हें जापानी सैनिकों के लिए सेक्स बंधक बनाकर रखा गया था. उन्होंने जापान सरकार से माफी की भी मांग की. तब से सिओल में ये महिलाएं हर बुधवार जापानी दूतावास के बाहर इकट्ठा होती हैं और नारे लगाकर अपनी मांग जाहिर करती हैं. अभी तक उनकी मांग पूरी नहीं हुई है.

स्टोएवर ने बताया कि 1993 से अब तक जापान सरकार इन महिलाओं के बारे में कुछ मौकों पर अपनी चिंता जता चुकी है लेकिन उन्हें किसी तरह की मदद नहीं मिली है.

इस साल के शुरुआत में ओसाका के गवर्नर टोरू हाशिमोटो ने कहा था कि उस समय सेना को अनुशासित रखने के लिए सेक्स बंधकों का होना जरूरी था. सिओन को यकीन नहीं आता कि कोई ऐसी बात कह भी सकता है.

अकेले घर वापसी

सिओन इन दिनों दक्षिण कोरिया में अपने घर पर रहती हैं. 2000 में पति की मृत्यु के बाद उन्होंने घर वापस जाने का फैसला किया. वह सिओल में सेक्स बंधकों के लिए बनाए गए एक आश्रम में रहती हैं. यहां पहली बार उन्हें मनोवैज्ञानिक मदद मिली.

सिओन के पास अब नया पासपोर्ट है. अपने परिवार के बारे में पता करने पर उन्हें पता चला कि उनके माता पिता तो अब जिंदा नहीं है लेकिन छोटा भाई जरूर है. उनके भाई ने उन्हें शुरुआत में थोड़ी मदद की लेकिन पूर्व सेक्स बंधक रह चुकी बहन के साथ संबंध रखना भाई को ठीक नहीं लगा. सिओन कहती हैं मुझे इस बात का पहले से डर था और वही हुआ.

रिपोर्ट: एस्थर फेल्डेन/ एसएफ

संपादन: निखिल रंजन

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