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दुनिया

39 साल के माक्रों फ्रांस के नये राष्ट्रपति

मारीन ले पेन को हराकर फ्रांस ने अपना सबसे युवा राष्ट्रपति चुना. यह पहला मौका है जब फ्रांस ने दो मुख्य राजनीतिक पार्टियों के बजाए किसी नये दल का राष्ट्रपति चुना.

मध्यमार्गी और यूरोपीय एकता की वकालत करने वाले 39 साल के इमानुएल माक्रों को 66.06 फीसदी वोट मिले. रविवार दिन भर चले मतदान के बाद देर शाम साफ हो गया कि माक्रों जीत रहे हैं. नतीजे देर रात आए. माक्रों की प्रतिद्ंवद्वी मारीन ले पेन को 33.94 फीसदी वोट मिले. यह न सिर्फ माक्रों की जीत है, बल्कि यूरोपीय संघ के लिए भी बड़ी राहत की बात है. मारीन ले पेन फ्रांस को यूरोपीय संघ से निकालने की वकालत कर रही थीं. वह यूरोपीय संघ में बने रहने के लिये जनमत संग्रह करवाने का वादा कर रही थीं. साथ ही यूरोजोन की साझा मुद्रा यूरो से भी फ्रांस को बाहर निकालना उनके चुनावी मुद्दों में शुमार था. नीदरलैंड्स के बाद फ्रांस में यह दूसरा मौका है जब राष्ट्रवादी और यूरोपीय संघ का विरोध करने वाले धड़े की हार हुई है.

1958 के बाद फ्रांस के आधुनिक गणतंत्र में यह पहला मौका है जब 39 साल का शख्स राष्ट्रपति चुना गया है. जीत के बाद आधी रात को पेरिस के मशहूर लुव्रे म्यूजियम के सामने माक्रों के हजारों समर्थक जुटे. नवनिर्वाचित राष्ट्रपति खुद भी वहां पहुंचे. माक्रों ने सभी का आभार जताते हुए कहा, "आज रात आप जीते हैं, फ्रांस जीता है. हर किसी ने हमसे कहा था कि यह असंभव है. लेकिन वे फ्रांस को नहीं जानते. हमारे पास ताकत है, ऊर्जा और इच्छाशक्ति है- और हम डर के सामने नहीं झुकेंगे."

माक्रों ने माना कि चुनाव ने एक विभाजित फ्रांस को सामने रखा है. पॉपुलिस्ट मारीन ले पेन को मिला व्यापक समर्थन इसका गवाह है. युवा राष्ट्रपति ने फ्रांस को फिर से एक साथ लाने का वादा किया. जीत के बाद अपने भाषण में माक्रों ने कहा, "देश की एकता की गारंटी की जाएगी और यूरोप की रक्षा और सुरक्षा की जाएगी."

अब माक्रों की अगली परीक्षा 11 और 18 जून को होगी. संसदीय चुनाव में ज्यादा सीटें जीतने पर राष्ट्रपति आसानी से अपनी योजनाएं लागू कर सकते हैं. वहीं हार के बाद ले पेन ने अपने समर्थकों के साथ संसदीय चुनाव के लिए जोर लगाने का आह्वान किया है.

(ले पेन से क्यों सब खौफ खाते हैं?)

ओएसजे/एमजे (एएफपी, डीपीए)

 

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