1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

मंथन

28 हजार यूरो की च्युइंग गम से बनी मूर्ति

इटली के मूर्तिकार मॉरीत्सियो साविनी अपने अजीबोगरीब काम के लिए जाने जाते हैं. वे च्युइंग गम से मूर्तियां बनाते हैं जो हजारों यूरो में बिकती हैं.

La Lupa

मॉरीत्सियो साविनी की "ला लुपा" की कीमत है 28 हजार यूरो

बीते दस साल में मॉरीत्सियो साविनी की कई प्रदर्शनियां लग चुकी हैं. लोग उन्हें जानने लगे हैं, लेकिन इसके बावजूद जब भी कोई उनसे पहली बार मिलता है कि तो एक ही सवाल करता है, "पहला सवाल, हर कोई मुझसे यही पूछता है कि क्या आप खुद ये सारी च्युइंग गम चबाते हैं? ये सवाल मैं लाखों बार सुन चुका हूं. मुझे कभी कभी इससे खीज भी मचती है लेकिन शायद ज्यादातर लोग ऐसा ही सोचते हैं. नहीं, मैंने कभी इन्हें नहीं चबाया है."

मॉरीत्सियो साविनी की "ला लुपा" उनकी सबसे जानी मानी मूर्तियों में से एक है. यह एक मादा भेड़िया है, जो इटली की लोककथाओं का पात्र है. माना जाता है कि रोम की स्थापना करने वाले राजाओं को ला लुपा ने अपना दूध पिला कर पाला था. इटली के शहरों में ला लूपा की कांसे की मूर्तियां देखने को मिलती हैं. लेकिन साविनी वाली मूर्ति बनी है 14 किलो च्युइंग गम से और इसकी कीमत है 28 हजार यूरो.

कैसे बनती है च्युइंग गम वाली मूर्ति

साविनी पहले च्युइंग गम को गर्म करते हैं, ताकि वह प्लास्टर के ढांचे पर आसानी से बैठे. ढांचा जरूरी है. अंदर अगर प्लास्टर नहीं होगा, तो च्युइंग गम की उनकी मूर्तियां बेहद अस्थिर होंगी. साविनी के लिए च्युइंग गम भी दूसरे किसी मटीरियल की तरह ही है. हालांकि इसके पीछे भी एक कहानी है, "मैं कुछ ऐसा ढूंढ रहा था जिसका उद्योग, कला और सांस्कृतिक इतिहास से नाता हो. यह मटीरियल 1945 में यूरोप आया, वो भी ऐसे समय में जब द्वितीय विश्वयुद्ध खत्म होने जा रहा था. 1950 तक यह कोका कोला और नायलॉन स्टॉकिंग्स के साथ यूरोपीय संस्कृति का हिस्सा बन गया और आज तक बना हुआ है."

वीडियो देखें 00:18

वर्चुअल दुनिया की सैर

मॉरीत्सियो के साथ उनकी दो असिस्टेंट काम करती हैं, जो च्युइंग गम को गर्म कर, गूंथकर और बेलकर, एक कलाकृति में तब्दील करने में उनकी मदद करते हैं. ऐसा उन्हें हर बार करना होता है. लेकिन अपने काम के लिए वे हर तरह का च्युइंग इस्तेमाल नहीं करते हैं. यह एक खास ब्रैंड हैं, जिसका नाम वे बताना नहीं चाहते. एक कलाकृति बनाने में कई बार 3,000 च्युइंग गम लग जाती हैं.

वर्चुअल दुनिया का सच

इसके अलावा मंथन में इस बार बात होगी वर्चुअल गुड्स यानि आभासी चीजों की, जो सिर्फ आभासी दुनिया में होती हैं. ये कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के बाइनरी नंबर सिस्टम या बिट्स से बनी होती है, लेकिन इसके बावजूद कई लोग इन्हें हासिल करने के लिए अच्छा खासा पैसा खर्च करते हैं. ऐसी चीजों पर दुनिया भर में बहुत खर्च किया जा रहा है जो वास्तव में हैं ही नहीं. आखिर क्यों कोई कंप्यूटर गेम खेलते हुए अपनी जान बचाने के लिए वर्चुअल सिक्के जमा करने लगता है और कई बार उनके लिए असली पैसे भी खर्चने को राजी हो जाता है? इस सवाल का जवाब मिलेगा आपको मंथन की खास रिपोर्ट में.

इसके साथ साथ बात जर्मनी के ऑटो सेक्टर की और रोम की गुफाओं में घूमते रोबोट की भी. इन सब रोमांचक बातों के लिए देखना ना भूलें मंथन, शनिवार सुबह 11 बजे डीडी नेशनल पर.

ओएसजे/आईबी

DW.COM

इससे जुड़े ऑडियो, वीडियो