1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

ताना बाना

25 साल बाद राष्ट्रपति पद छोड़ने का वादा

ट्यूनिशिया के राष्ट्रपति ज़ीने अल अबिदीन बेन अली ने कहा है कि 2014 में कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह दोबारा शासन में नहीं आएंगे. उनकी इस घोषणा के बाद ट्यूनिशिया की राजधानी में सड़कों पर जश्न का दृश्य देखा गया.

default

बेन अली 23 से अधिक वर्षों से कार्यालय में हैं और अपने शासन के सबसे बुरे दौर से गुज़र रहे हैं. बेन अली अब तक के ट्यूनीशिया के दूसरे राष्ट्रपति हैं. पिछले कई हफ्तों से प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच चल रही झड़प के बाद उन्होंने टेलीविजन पर एक भावुक भाषण में अपने प्रस्थान की तिथि निर्धारित की. स्थिति पूरी तरह से हाथ से निकलती देख 74 वर्षीय बेन अली को टीवी पर लोगों के सामने आना पड़ा. अपने भाषण के दौरान कई बार उनकी आंखें नम दिखाई दीं. उन्होंने पहली बार अरबी की बजाए वहां की स्थानीय बोली में भाषण दिया.

मुझे धोखा दिया गया

अपने भाषण में अली ने कहा, "मैं ट्यूनीशिया के लोगों की मांगों को समझता हूं. मुझे इस बात का दुख है कि 50 सालों की सैन्य सेवा के बाद ऐसा हो रहा है." वरिष्ठ अधिकारियों के संदर्भ में बात करते हुए उन्होंने कहा, "मुझे धोखा दिया गया है, उन्होंने मुझे धोखा दिया. मैं कोई सूरज नहीं हूं जो चमकता रहता है."

Flash-Galerie Tunesien Armee

ट्यूनीशिया के संविधान में राष्ट्रपति पद के लिए अधिकतम उम्र 75 वर्ष बताई गई है. ऐसा माना जा रहा था कि जिस तरह से बेन अली ने अतीत में संविधान में संशोधन किए हैं, इस बार भी वे वैसा ही करेंगे ताकि एक बार फिर इस पद के योग्य बन सकें. इस बारे में उन्होंने कहा, "मैंने 1987 में कहा था कि आजीवन कोई राष्ट्रपति नहीं रह सकता. मैं आज भी यही बात दोहराता हूं. मैं संविधान को छूने से इनकार करता हूं. मैं संविधान में तय की गई उम्र नहीं बदलूंगा."

बेन अली ने सुरक्षा बलों को भी आदेश दिया कि वे नागरिकों पर गोलीबारी बंद कर दें. साथ ही उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता और इंटरनेट साइटों पर लगी रोक को हटाने का भी वादा किया. बेन अली के भाषण के कुछ ही देर बाद यूट्यूब और डेलीमोशन जैसी जिन इंटरनेट साइटों को पिछले कई हफ़्तों से बंद किया हुआ था, उन्हें भी खोल दिया गया.

नागरिकों ने झंडे लहरा कर जताई खुशी

ट्यूनिस प्रांत के लाफायेत जिले में लोग बेन अली के भाषण के फ़ौरन बाद कर्फ्यू को नजरअंदाज करते हुए अपनी ख़ुशी ज़ाहिर करने के लिए सड़कों पर उतर आए. कई लोग ख़ुशी में कारों के हॉर्न बजा रहे थे तो कई हाथों में ट्यूनिशिया के झंडे लिए "ज़िंदाबाद बेन अली!" और "शुक्रिया बेन अली!" के नारे लगते हुए दिखे. एक 22 वर्षीय छात्र रमज़ी बेन क्राइम ने कहा, "हमें इस बात की ख़ुशी है कि उन्होंने लोगों की भाषा बोली. हमें उम्मीद है कि सभी बुरी यादें अतीत में ही छूट जाएंगी और हमारे पास केवल आज़ादी होगी".

No Flash Protest in Tunis

खुशी में सड़क पर उतरे लोगों ने इस बात की भी परवाह नहीं की कि कुछ ही घंटों पहले पुलिस ने गोली मार कर कुछ प्रदर्शनकारियों को घायल कर दिया था. प्रदर्शनकारियों ने बताया कि इस गोलीबारी में दो लोगों की मौत भी हुई और मृत लोगों के नाम भी बताए, लेकिन पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की.  पिछले दिनों हुई पुलिस और नागरिकों की झड़प में कई लोग मारे गए थे. सरकारी आंकड़े तो 23 ही बताते हैं, लेकिन प्रत्यक्षदर्शी और मानवाधिकार संगठनों के आंकड़े इस से कहीं ज़्यादा हैं.

विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि वे बेन अली के शासन में बेरोजगारी और स्वतंत्रता की कमी से तंग आ गए हैं. साथ ही कुछ ही लोगों के पास भारी धन संग्रह भी नाराज़गी का कारण बन गया था. इसके अलावा लोगों को इस बात की भी चिंता सताने लगी थी कि बेन अली छठी बार अपने शासन की अवधि बढ़ाने का प्रयास करेंगे.

अब आगे क्या?

बेन अली की सबसे मुखर विरोधी नजीब चेबी ने कहा कि राष्ट्रपति ने सही किया. नजीब चेबी को पश्चिमी राजनयिकों द्वारा विपक्ष में सबसे विश्वसनीय आदमी के रूप में देखा जाता है. उन्होंने कहा, "लेकिन अभी यह देखना बाकी है कि इसे व्यवहार में किस तरह से लाया जाएगा. मैं एक गठबंधन सरकार बनाए जाने का आग्रह करता हूं."

पर अभी भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है अगर बेन अली के विरोधी इसे किस तरह से देखते हैं: क्या वे उन्हें तुरंत ही कार्यालय छोड़ने पर मजबूर करेंगे या फिर कुछ साल और उनके स्वयं ही चले जाने का इंतज़ार करेंगे. बेन अली के बाद ट्यूनिशिया में कोई स्पष्ट उम्मीदवार भे नहीं है जो राजनीतिक जीवन और दरकिनार किए गए प्रतिद्वंद्वियों पर हावी हो सके.

रिपोर्ट: एजंसियां/ईशा भाटिया

संपादन: विवेक कुमार

DW.COM

WWW-Links