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दुनिया

21वीं सदी के समाजवादी

समर्थक उन्हें उद्धार करने वाला समझते थे तो विपक्ष के लिए वह लफ्फाज तानाशाह थे. वे खुद अपने को दक्षिण अमेरिका का मुक्तिदाता मानते थे. उनका एक सपना था जिसे वे हर हाल में पाना चाहते थे. अब उनकी मौत हो गई है.

2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए चावेज ने कहा था, "यहां अब भी गंधक की बू आ रही है....कल शैतान यहां आया था और उसने ऐसे बात की जैसे वह पूरी दुनिया का मालिक हो." चावेज ने यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश की आलोचना में कही थी. हूगो चावेज दो टूक बोलते थे. उनके भाषण ज्यादातर अमेरिका और उत्तर अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ होते थे. नव पूंजीवाद पर निशाना साधते चावेज ने दुनिया भर में वामपंथियों को अपने पक्ष में किया. कई लोगों के लिए वह एक मीडिया स्टार और विश्व को बचाने वाले थे.

Zum Tod von Hugo Chavez Venezuela SW

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उनका राजनीतिक करियर अच्छा तो रहा, लेकिन लोकतांत्रिक सिद्धांतों को उन्होंने कई बार अनदेखा किया. राजनीतिज्ञ होते हुए उन्हें पेंचीदा दांव खेलने वाले का दर्जा देना सही नहीं होगा, क्योंकि उनके दिलेर भाषणों पर विश्वास करना आसान था.

जनता के नेता

चावेज काउदियो परंपरा के थे. दक्षिण अमेरिका में 200 साल पहले काउदियो छोटे सैन्य गुटों के नेता होते थे. उन्होंने दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप के कई हिस्सों पर नियंत्रण कर रखा था. काउदियो ने सालों तक ओरिनोको नदी के इलाके में अपना दबदबा बनाए रखा. इसी इलाके में चावेज 28 जुलाई 1954 में पैदा हुए. इस इलाके में साल के छह महीनों में सूखा रहता था और बाकी छह महीनों में इलाका बाढ़ और बारिश की चपेट में रहता था. यहां रहने वाले लोग गाय चराकर गुजर करते थे. उनकी संस्कृति और उनके गीत अब भी वेनेजुएला की राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा हैं.

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कास्त्रो के साथ चावेज

30 साल की उम्र में चावेज वेनेजुएला की सेना में भर्ती हुए. 1983 में उन्होंने कुछ और सैन्य अधिकारियों के साथ बोलिवारियन क्रांतिकारी आंदोलन का गठन किया. चावेज ने सिमोन बोलिवार से प्रेरणा ली, जिन्होंने दक्षिण अमेरिका के उत्तरी हिस्से को स्पेनी उपनिवेशकों से आजाद कराया था. चावेज बोलिवार के अनुयायी थे.

चावेज का मानना था कि उस वक्त वेनेजुएला की राजनीति ज्यादातर लोगों को फायदा नहीं पहुंचा रही थी. उन्होंने 1992 में तख्तापलट की कोशिश की लेकिन राष्ट्रपति कार्लोस पेरेस की सरकार को गिरा नहीं पाए. पेरेस के बाद सत्ता में आने वाले राफाएल कालदेरा ने चावेज को दो साल बाद जेल से रिहा कर दिया. इसके बाद चावेज ने दक्षिण अमेरिका में अहम नेताओं का सहयोग जुटाने की कोशिश की. इसी दौरान वे क्यूबा के फीडेल कास्त्रो से भी मिले. 1996 में उन्होंने पांचवां गणतंत्र आंदोलन नाम की पार्टी का गठन किया और 1998 में चुनाव में उम्मीदवार बने.

गरीबों के राष्ट्रपति

पहले तो चावेज को बाहर के व्यक्ति के तौर पर देखा जा रहा था लेकिन जल्द ही वे लोकप्रिय हो गए. उन्होंने अपने समाजवादी सिद्धांतों को लोगों की भाषा में व्यक्त किया, उन्हें समझा और बहुमत के साथ राष्ट्रपति पद पर चुने गए.

पद संभालने के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने सरकार के लिए सबसे जरूरी औद्योगिक सेक्टरों, खास तौर पर खनिज तेल सेक्टर का राष्ट्रीयकरण किया. खनिज तेल की बिक्री से कमाए गए पैसों से सामाजिक कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया गया. गरीब लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं और बच्चों के लिए प्राथमिक शिक्षा को सुरक्षित किया गया. 2001 में बेकार पड़ी जमीन के इस्तेमाल के लिए भूमिसुधार नीतियां लागू की गईं. आज तक सरकार ने इस तरह 50 लाख हेक्टेयर जमीन हासिल की है और इसे गरीब किसानों और गड़रियों में बांटा है.

वामपंथियों के आदर्श

नव पूंजीवाद से मुंह मोड़ने वाले चावेज ने अपने इलाके में बहस छेड़ दी. आसपास के देशों में वामपंथ का रुख कर रहे नेताओं ने उनके पदचिह्नों पर चलना शुरू किया. उस वक्त अमेरिकी नव पूंजीवाद दक्षिण अमेरिकी देशों में शासन का सर्वोत्तम मॉडेल माना जा रहा था. इसके अलावा चावेज ने दक्षिण अमेरिका के लोगों की साझा पहचान को बढ़ावा देना शुरू किया और उन्हें भावनाओं के स्तर पर अमेरिका के खिलाफ किया. उत्तरी अमेरिका में अपना वर्चस्व स्थापित कर रहे देशों के खिलाफ चावेज ने सेलैक, आलबा और यूनासुर जैसे संगठनों के जरिए दक्षिण अमेरिकी देशों को संगठित किया.

वामपंथी होने के बावजूद चावेज अपने वर्गशत्रु अमेरिका को तेल बेचने से कतराते नहीं थे, लेकिन उनकी अमेरिका विरोधी भावनाएं पागलपन तक जा पहुंचीं. चावेज ने कई शरारतें भी कीं. 2006-2007 में उन्होंने गरीब अमेरिकियों में घर की हीटिंग के लिए तेल बांटा और जब जॉर्ज बुश ने चावेज और कास्त्रो की साझेदारी को "शैतान की धुरी" कहा, तो चावेज ने बेलारुस के अलेक्सांडर लूकाशेंको और ईरान के अहमदीनेजाद के साथ अपने सहयोग को "भले देशों की धुरी" का नाम दिया.

ईरान के साथ चावेज की दोस्ती कितनी गहरी थी, यह तब पता चला जब उन्होंने इस्राएल को अमेरिका के "खूनी हाथ" का नाम दिया. अपने पहले राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार के दौरान उन्होंने नाजी जर्मनी में यहूदियों के जनसंहार को नकारने वाले नोर्बेर्तो सेरेसोल को भी बढ़ावा दिया, जिसपर वेनेजुएला में रहने वाले यहूदियों को काफी आपत्ति की. उनकी नाराजगी इस बात पर भी थी कि सरकार से करीब मीडिया ने यहूदियों के खिलाफ खबरें जारी करनी शुरू कीं.

चावेज की विरासत

चावेज अपने देश में कितने सफल रहे, यह भी विवादास्पद है. उनके शासन के दौरान गरीबों को फायदा हुआ और बहुत से लोग अपनी जिंदगी सुधार पाए. लेकिन पहले की ही तरह अब भी आधी से ज्यादा आबादी गरीब है. भूमि सुधार के बावजूद 70 प्रतिशत खाद्य सामग्री आयात की जाती है और अर्थव्यवस्था विश्व बाजार में खनिज तेल के दामों पर निर्भर है. मूलभूत संसाधनों में भी निवेश ना के बराबर हुआ है. देश में नियंत्रित बाजार और कानूनी सुरक्षा के अस्त व्यस्त होने से वित्तीय सेक्टर बेकार हो गया है.

चावेज भ्रष्टाचार और संगठित अपराध से भी नहीं निबट पाए. 1999 के बाद से वेनेजुएला में हत्या की दर तीन गुनी हो गई है. हूगो रफाएल चावेज ने 21वीं सदी के समाजवाद की नींव रखी और उसे दक्षिण अमेरिका में आंदोलन बना दिया. लेकिन ब्राजील और चिली के नेताओं के मुकाबले उन्होंने आजादी और लोकतांत्रिक मूल्यों पर कम ध्यान दिया. उनपर अपनी बोलिवारियन मिलिशिया की मदद से विपक्ष को धमकाने और विपक्षी नेताओं के उत्पीड़न के अलावा मीडिया पर नियंत्रण और चुनावी धांधली के आरोप लगे. लेकिन चावेज जहां से आते हैं, वहां इसकी परंपरा है. इसलिए भी अपने देशवासियों के लिए वह एक प्रतीक बने रहेंगे.

रिपोर्टः यान डी वाल्टर/एमजी

संपादनः महेश झा

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