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दुनिया

"2050 तक खत्म करो टीबी"

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 30 बड़े मुल्कों से कहा है कि वे टीबी के खतरे को पहचानें और इसे 2050 तक खत्म करने में मदद करें. इन देशों को सलाह दी गई है कि वे इसके फैलने के इलाकों की पहचान करें.

हालांकि टीबी का इलाज हो सकता है लेकिन फिर भी विकसित देशों में हर साल डेढ़ लाख से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं. डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट कहती है कि इसकी वजह से हर साल 10,000 लोग मारे जाते हैं. यह बीमारी ऑस्ट्रेलिया से फ्रांस और जर्मनी तक में अब भी पाई जाती है.

कई लोग अनजाने में टीबी से प्रभावित हो जाते हैं. छींक के साथ टीबी के वायरस दूसरे लोगों तक पहुंच सकते हैं. डब्ल्यूएचओ में टीबी निरोधी कार्यक्रम से जुड़े मार्को राविगलियोनी का कहना है, "अगर आप इन देशों के आम लोगों से बात करेंगे, तो वे कहेंगे कि यह तो पुराने जमाने की बीमारी है और अब यह नहीं होता." पिछले साल टीबी की वजह से पूरी दुनिया में 13 लाख लोगों की जान गई और यह एड्स के बाद सबसे जानलेवा बीमारी बताई जाती है.

डब्ल्यूएचओ रोम में हो रहे कांफ्रेंस में टीबी से निपटने के तरीकों पर चर्चा करने वाला है. इसमें बेघर और प्रवासियों में इंफेक्शन नियंत्रण की भी बात है. जेल में रहने वाले कैदी, ड्रग्स के लती और एचआईवी संक्रमित लोगों में टीबी होने का खतरा ज्यादा रहता है. राविगलियोनी का कहना है कि सरकारें अगर सख्त कदम उठाएं, तो 2035 तक इनकी संख्या मौजूदा 10 लाख में 100 से घटा कर 10 लाख में 10 की जा सकता है, "हम चाहते हैं कि 2050 तक टीबी का खात्मा हो जाए, जिसका मतलब 10 लाख में एक से कम मामले सामने आएं."

एजेए/एएम (एएफपी)

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