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दुनिया

2022 तक खत्म हो सकते हैं बाघ

वन्य जीव संरक्षण से जुड़ी संस्था वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ का कहना है कि 12 साल के भीतर दुनिया से बाघों का नामों निशान मिट सकता है. WWF के मुताबिक पिछले 100 सालों में बाघों की संख्या 97 फीसदी कम हुई है.

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बाघों के शिकार और सिकुड़ते जंगलों का जिक्र करते हुए वर्ल्ड वाइल्डलाइफ ने यह चेतावनी जारी की है. WWF की प्रवक्ता मारी फोन साइपेल ने कहा कि 2022 तक जंगलों से बाघों के विलुप्त होने का खतरा बना हुआ है. संस्था का अनुमान है कि दुनिया भर में अब सिर्फ 3,200 बाघ की बचे हैं. इनकी संख्या भी घटती जा रही है.

साइपेल ने कहा, ''अगर कोई विलक्षण कदम नहीं उठाया गया तो बाघों की संख्या विनाश की ओर जा रही है.'' स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में बाघों को बचाने के लिए एक सम्मेलन के दौरान यह बातें कही गईं. WWF 2022 तक दुनिया में बाघों की संख्या को दोगुना करने का अभियान छेड़े हुए है. लेकिन ऐसी रिपोर्टों से संस्था को मायूसी हो रही है.

Bagdad Zoo Flash-Galerie

दुनिया में इस वक्त सबसे ज्यादा बाघ भारत में हैं. बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु है, लेकिन अब संकट में है. भारत बाघों की घटती संख्या के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराता है. नई दिल्ली के मुताबिक चीन में बाघ के हर अंग को देसी दवाओं के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जिसके चलते भारत में शिकारी बाघों को ढूंढ ढूंढ कर मारते रहते हैं.

लेकिन अब रूस के शहर सेंट पीटर्सबर्ग में अगले महीने बाघों को बचाने के लिए इंटरनैशनल टाइगर समिट हो रहा है. सम्मेलन की मेजबानी खुद रूसी प्रधानमंत्री ब्लादिमीर पुतिन करेंगे. सम्मेलन में भारत, चीन समेत 13 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे. इन्हीं 13 देशों में अब जंगल राजा हांफते हुए अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है.

गुरुवार को भारत के रणथम्भौर रिजर्व में एक बाघ की मौत हो गई. वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इलाके की लड़ाई को लेकर बाघों की आपस में लड़ाई हुई, जिसमें तीन साल के बाघ ने दम तोड़ दिया.

रिपोर्ट: एजेंसियां/ओ सिंह

संपादन: एमजी

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