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विज्ञान

2010: सेहत की चुनौतियां और खुशखबरियां

इंसान की सेहत के लिए जहां कई तरह की नई चुनौतियां पैदा हुईं, वहीं उन मुश्किल बीमारियों से कारगर तरीके से निपटने का रास्ता भी खुला जो हमें लंबे समय से परेशान कर रही हैं. जानिए क्या रहीं 2010 में चिकित्सा क्षेत्र की हलचलें.

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सुपरबगः इस साल चिकित्सा की दुनिया में सुपरबग की खूब चर्चा रही. यानी जीनों का एक ऐसा लूप है जो जीवाणु (बैक्टीरिया) को इतनी ताकत दे देता है कि फिर उस पर सभी ज्ञात एंटीबायोटिक दवाओं का असर होना बंद हो जाता है. जानकार मानते हैं कि यह आने वाले सालों में डॉक्टरों के लिए सिर दर्द साबित हो सकता है. इस तरह के एक सुपरबग जीन को नई दिल्ली मेटालोबेटा-लेक्टामेस-1 या एनडीएम-1 का नाम दिया गया है. 2008 में यह पहली बार सामने आया. एनडीएम-1 विविध तरह के उन जीवाणुओं में से एक है जिसमें एंटेरोबैक्टीरियासी फैमली, क्लैबसीएला और एशरशिया कोली शामिल हैं. इन सभी से कई तरह के संक्रमण हो सकते हैं.

Genproduktion GENEART in Regensburg Flash-Galerie

ब्रिटिश शोधकर्ताओं ने अगस्त में बताया कि एनडीएम-1 बांग्लादेश, भारत, पाकिस्तान और इंग्लैंड के मरीजों में पाया गया. अमेरिका, इस्राएल, तुर्की, चीन, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जापान, केन्या, सिंगापुर, ताइवान, उत्तरी यूरोप के देशों में भी इसके लक्षण दिखे.

वैसे एंटीबायोटिक को बेअसर करने वाले जीवाणु नई बात नहीं है. जब 1940 के दशक में पेन्सीलिन की शुरुआत हुई, तभी से जीवाणु ने इसके असर को खत्म करने की क्षमता भी विकसित करनी शुरू कर दी. इसीलिए डॉक्टरों को नई नई एंटीबायोटिक दवाएं तैयार करनी पड़ी है.

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