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विज्ञान

2010 और साइंस की सरगर्मियां

कई बार विज्ञान की अहम खोजें अपनी जटिल शब्दावली की वजह से हमारी समझ में नहीं आतीं. लेकिन यही खोजें हमारे भविष्य का आधार होती हैं. 2010 में ऐसी ही कई खोजें हुई हैं. चलिए डालते हैं उन्हीं पर एक नजर.

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पहली क्वांटम मशीनः इस साल तक मानव की बनाई सभी चीजें मैकेनिक्स के पारंपरिक सिद्धांतों के मुताबिक ही काम कर रही थीं. लेकिन मार्च 2010 में कुछ वैज्ञानिकों ने एक ऐसा उपकरण बनाया जो कुछ इस तरह काम करता है कि उसे सिर्फ क्वांटम मैकेनिक्स के जरिए ही समझा जा सकता है. क्वांटम मैकेनिक्स ऐसे नियम हैं जो मोलेक्यूल्स, एटम और सबएटम जैसी सूक्ष्म चीजों के व्यवहार को नियंत्रित करते हैं.

यह उपकरण इतना छोटा है कि नंगी आंख से शायद ही दिखाई दे. इसका व्यास एक बाल के बराबर है. लेकिन मशहूर विज्ञान पत्रिका साइंस ने इसे 2010 की सबसे बड़ी खोज बताया है. यह उपकरण एटम या मोलेक्यूल की तरह काम करता है और हमेशा सक्रिय रहता है. कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के भौतिकशास्त्री एंड्रयू क्लीलैंड और जॉन मार्टिंस एक क्वांटम के जरिए अपनी बनाई इस मशीन की ऊर्जा को उठाने और गिराने में कामयाब रहे. यह सिर्फ क्वांटम मैकेनिक्स में ही संभव है. इसे दुनिया की पहली क्वांटम मशीन कहा जा रहा है.

Flash-Galerie ELROB Kampfroboter

क्वांटम भौतिकी महान जर्मन वैज्ञानिक माक्स प्लांक की खोज का नतीजा है. खोज यह थी कि कोई वस्तु या पिंड ऊर्जा का सतत, अविरत उत्सर्जन नहीं करता, बल्कि ऊर्जा के छोटे-छोटे कणों या पैकेटों के रूप में रुक-रुक कर उसे छोड़ता है. ऊर्जा के छोटे-छोटे कणों-जैसे इन पैकेटों को क्वांटम कहते हैं.

पहली क्वांटम मशीन के बारे में साइंस के न्यूज राइटर एड्रिन छो कहते हैं, “बुनियादी तौर पर इससे क्वांटम मैकेनिक्स की नई संभावनाओं का द्वार खुला है. इससे व्यावहारिक स्तर पर कई नए प्रयोग किए जा सकते हैं जो प्रकाश, विद्युत धाराओं और गति पर क्वांटम नियंत्रण को प्रदर्शित कर सकते हैं. शायद किसी दिन हम क्वांटम मैकेनिक्स की सीमाओं और सच के बारे में अपनी समझ को भी परख पाएं.” सच के बारे में अब तक की समझ को चुनौती देने का अर्थ समझाते हुए छो कहते हैं कि शायद ऐसे प्रयोग हों जिनके जरिए सामान्य आंख से दिखने वाली वस्तुओं को एक समय में ही दो अलग अलग स्थानों पर रख पाना मुमकिन हो जाए. एटोमिक और सबएटोमिक कणों को मिलाकर ऐसा संभव हो सकता है. ये प्रयोग इस बात को समझने का माध्यम भी बन सकते हैं कि मनुष्य जितनी बड़ी वस्तु को एक समय में दो अलग अलग स्थानों पर रखना संभव अभी क्यों नहीं है.

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