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दुनिया

163 साल बाद आए रेल ड्राइवरों के अच्छे दिन

अब लोकोमोटिव पायलटों यानी ट्रेन चालकों को रेल इंजन में ही टॉयलेट की सुविधा मिल सकेगी. इंजन में टॉयलेट न होने और रिफ्रेशमेंट ब्रेक न मिलने के चलते अभी ट्रेन चालकों को बेहद ही मुश्किल परिस्थतियों का सामना करना पड़ता है.

163 साल बीतने के बाद आखिरकार भारतीय रेलवे इंजन ड्राइवरों के अच्छे दिन आ गए हैं. अब उन्हें अपना पेशाब घंटों रोके नहीं रहना पड़ेगा. रेलवे अब ट्रेनों के इंजन में भी टॉयलेट की सुविधा देने जा रहा है. इसकी शुरुआत पिछले हफ्ते ही रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने एक मालगाड़ी के इंजन में दी गई टॉयलेट की सुविधा वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर की है. इस इंजन को डीजल लोकोमोटिव वर्क्स वाराणसी में तैयार किया गया है. सुरेश प्रभु का कहना है कि चरणबद्ध तरीके से अन्य ट्रेनों के इंजन में भी ऐसे टॉयलेट लगाए जाएंगे.

इंजन में बायो टॉयलेट
4500 हाई हॉर्स पावर वाले इंजन में वैक्यूम टाइप मॉड्यूल बैक्टीरियोलॉजिकल आधारित बायो टॉयलेट बनाया है. इसमें वेस्टर्न स्टाइल कमोड और वॉश बेसिन की व्यवस्था है. इस टॉयलेट में बायो-डाइजेस्टर लगा होने के कारण अशोधित मानव अपशिष्ट रेल लाइन पर नहीं गिरेगा. पानी की बचत का भी ध्यान इस अत्याधुनिक टॉयलेट में रखा गया है. एक बार फ्लश के लिए केवल 250 मिलीलीटर पानी खर्च होगा, जबकि परंपरागत डिजाइन वाले टॉयलेट में एक बार फ्लश करने पर लगभग 10 लीटर पानी खर्च हो जाता है. टॉयलेट में प्रयोग के लिए 300 लीटर का वॉटर टैंक रखा गया है.

Suresh Prabhu

भारतीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु

इंजन में टॉयलेट की सुविधा के साथ ही यात्रियों और ट्रेन की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है. डीजल इंजन में लगाए गए टॉयलेट की विशेषता यह है कि इसका दरवाजा तभी खुलेगा जब ट्रेन रुकी हुई अवस्था में होगी. चलती ट्रेन में चालक दल इस टॉयलेट का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे. इस टॉयलेट में कई तरह के सेंसर लगाए गए हैं. अगर चालक टॉयलेट में होगा और दरवाज़ा अन्दर से बंद होगा तो इंजन के ब्रेक को किसी भी हालत में नहीं हटाया जा सकता. टॉयलेट के उपयोग की अवस्था में कंट्रोल डेस्क के एलसीडी डिस्प्ले पर ऑडियो-विजुअल अलर्ट भी प्रदर्शित होगा.

लंबे समय की मांग

रेल इंजनों में टॉयलेट की सुविधा न होने से ट्रेन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. उन्हें स्टेशनों पर या फिर कहीं ट्रेनों के रुकने की स्थिति में शौच और पेशाब आदि से निपटने के लिए बाहर जाना पड़ता है. इस वजह से कई ट्रेनें घंटों लेट हो जाती हैं. पिछले काफी समय से ट्रेन चालक इंजन में ही टॉयलेट की व्यवस्था की मांग करते आ रहे थे. इंडियन रेलवे लोको रनिंग मेन्स ऑर्गनाइजेशन का कहना है कि चालकों के लिए यह परिस्थितियां अमानवीय हैं और इससे उन्हें गंभीर शारीरिक और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है. इससे कई दुर्घटनाएं होने की आशंका भी बनी रहती है. अपनी इस मांग को लेकर उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक में गुहार लगाई.

रेलवे की ओर से सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए इंजन में टॉयलेट की सुविधा देने से अब तक इंकार कर दिया जाता था. लेकिन इस बार उनकी समस्या के प्रति रेल मंत्रालय ने गंभीरता और तत्परता .

Bildergalerie Hochgeschwindigkeitszüge Deutschland ICE3

जर्मनी तेज रफ्तार ट्रेन का कॉकपिट

दिखायी और टॉयलेट युक्त इंजन को ट्रैक पर उतार दिया. रेल मंत्री सुरेश प्रभु का कहना है, ''रेल यात्रियों के साथ रेलवे स्टाफ की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह वैक्यूम टॉयलेट इसी दिशा में एक प्रयास है.'' भारतीय रेलवे में ड्राइवर रहे और बाद में स्वास्थ कारणों से ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेने को विवश हुए अवधेश कुमार ने रेलवे के इस कदम का स्वागत किया है. उनका कहना है, ''शौच या पेशाब के लिए जाएं तो कहां जाएं की समस्या अब नहीं होगी.''

टॉयलेट सुविधा से लैस यह अभी इकलौता इंजन है. रेलवे के पास कुल दस हज़ार से ज़्यादा इंजन हैं. जिनमे आधे से अधिक डीजल इंजन हैं. फिलहाल टॉयलेट सुविधायुक्त इंजन का इस्तेमाल डीजल इंजन वाले मालगाड़ी के लिए किया जाएगा. बाद में चरणबद्ध तरीके से सभी इंजनों में टॉयलेट की सुविधा दी जाएगी.


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