1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

16 साल की जर्मन लड़की पर आतंकवाद का केस

आईएस से प्रभावित होकर एक पुलिस अफसर पर जानलेवा हमला करने वाली किशोपी पर आरोप दर्ज कर दिए गए हैं. 16 साल की यह लड़की आईएस में शामिल नहीं हो पाई लेकिन जर्मनी में हमले को अंजाम दिया.

जर्मन पुलिस ने 16 साल की एक लड़की पर आईएस से प्रभावित होकर एक पुलिसकर्मी पर हमला करने के आरोप दर्ज किए हैं. साफिया नाम की इस लड़की के खिलाफ हत्या की कोशिश, गंभीर रूप से शारीरिक क्षति पहुंचाने और विदेशी आतंकी संगठन का समर्थन करने के आरोप लगाए गए हैं.

जर्मन पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मोरक्कन मूल की जर्मन लड़की के खिलाफ 12 अगस्त को ही आरोप दर्ज कर दिए गए थे. घटना फरवरी महीने की है. तब आरोपी साफिया 15 साल की ही थी. उसने एक पुलिस अफसर पर हनोवर में हमला किया था. यह हमला एक ट्रेन स्टेशन पर उस वक्त किया गया जब अफसर सामान्य जांच कर रहा था. व्यापार मेलों के लिए विख्यात देश के उत्तर में स्थित शहर हनोवर में लड़की ने प्लैटफॉर्म पर खड़े अफसर पर चाकू से हमला किया. हालांकि लोगों ने उसे काबू कर लिया. तब से साफिया पुलिस हिरासत में है.

अधिकारियों ने बताया कि लड़की आईएस के प्रभाव में थी. उसे पिछले साल नवंबर में कट्टरपंथी बनाया गया. जनवरी में वह इस्तांबुल गई थी जहां उसे आईएस के दो दलालों से मिलना था. ये दलाल सीरिया की सीमा पार कराने में उसकी मदद करने वाले थे. लेकिन योजना पूरी नहीं हो पाई क्योंकि लड़की की मां उसे वापस जर्मनी ले आई. तब आईएस ने उस लड़की को आदेश दिया कि घर पहुंचकर अपनी शहादत देते हुए कोई कारनामा कर दिखाए.

जांचकर्ताओं ने बताया कि साफिया ने अपनी योजना के बारे में मोहम्मद नाम के अपने साथी को बताया. सीरियाई मूल का जर्मन मोहम्मद उसकी इस्तांबुल यात्रा के बारे में जानता था. उसे साफिया की योजनाओं के बारे में पता चल गया था लेकिन वह पुलिस के पास नहीं गया. उसके खिलाफ भी आरोप दाखिल किए गए हैं.

साफिया के हमले में घायल हुए पुलिसवाले की जान पर बन आई थी. हालांकि सर्जरी के बाद उसकी जान बच गई. पिछले कुछ महीनों में जर्मनी में ऐसे ही कई हमले हो चुके हैं. जुलाई महीने में तो एक ही हफ्ते में चार ऐसे हमले हुए जब किसी अकेले व्यक्ति ने लोगों पर हमला बोल दिया. कुल मिलाकर 13 जानें गईं और दर्जनों लोग घायल हुए. इनमें से दो हमलों की जिम्मेदारी आईएस ने ली. इसके बाद जर्मनी में आंतरिक सुरक्षा को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई है. लोगों के बीच डर का माहौल है क्योंकि आईएस योजनाबद्ध आतंकी हमले नहीं कर रहा है बल्कि उससे प्रभावित लोग खुद ब खुद हमलों को अंजाम दे रहे हैं.

ऐसे आतंकवादी संगठन सबसे घातक हथियार बन गए हैं, कैसे, जानने के लिए यहां क्लिक करें.

वीके/एमजे (एएफपी)

DW.COM

संबंधित सामग्री