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दुनिया

150 अफगानों को जर्मन वीजा

अफगानिस्तान में जर्मन सेना की मदद करने वाले डेढ़ सौ क्षेत्रीय अफगानों के लिए जर्मन सरकार ने वीजा देने का प्रस्ताव रखा है. इन अफगानों को तालिबान के बदले का डर है. इन्हें जर्मनी में अनिश्चित काल का वीजा दिया जाएगा.

उत्तरी अफगानिस्तान के शहर मजार ए शरीफ में जर्मन पत्रिका डेय श्पीगेल को दिए एक इंटरव्यू में जर्मन सेना के ब्रिगेडियर जनरल मिषाएल फेटर ने बताया कि आने वाले कुछ दिनों में इन 150 अफगानों को उनके परिवारों सहित जर्मनी आने के लिए वीजा जारी कर दिए जाएंगे. जर्मनी में पिछले कुछ महीनों से यह बहस जारी थी कि जर्मन फौज की वापसी के बाद उन क्षेत्रीय लोगों का क्या होगा जो सेना की मदद करते आए है. इन लोगों को डर है कि सेना के हटते ही तालिबान उन्हें अपना निशाना बनाएंगे.

खतरे में अनुवादक

अफगानिस्तान में तैनात जर्मन सेना में लगभग 1200 क्षेत्रीय कर्मचारी हैं जिनमें से 180 से ज्यादा विदेश मंत्रालय और पुलिस की नौकरी में हैं और अधिकतर अनुवादक, सफाई कर्मचारी, रसोइए और सुरक्षा कर्मी हैं.

जर्मन सेना के साथ अनुवादक के रूप में काम करने वाले अफगानों को ज्यादा खतरा है. इनमें से कई ने शिकायत की है कि उन्हें तालिबान से धमकी भरे खत और चेतावनियां मिल रही हैं. इनमें से ज्यादातर जर्मनी में पनाह चाहते हैं जबकि बाकी आर्थिक मदद की मांग कर रहे हैं.

2014 में अफगानिस्तान में नाटो मिशन खत्म हो जाने के बाद वहां जर्मनी की उपस्थिति अफगान सेना को प्रशिक्षित करने भर तक सीमित हो जाएगी. तब वहां जर्मनी के लगभग 800 सैनिक रह जाएंगे. फिलहाल जर्मनी के 3,700 सैनिक अफगानिस्तान में तैनात हैं.

अफगान सरकार का विरोध

इस बीच अफगानिस्तान की सरकार ने जर्मनी के इस फैसले पर औपचारिक रूप से विरोध जताया है. अफगान सरकार के अनुसार इन लोगों को वीजा मिल जाने से देश में पढ़े लिखे लोगों की और कमी हो जाएगी, जबकि देश पहले से ही परेशानी के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में यह अच्छी बात नहीं होगी. इससे पहले जर्मन सेना ने कहा था कि उनके लिए काम करने वाले लोगों की सुरक्षा उनकी जिम्मेदारी है.

जर्मन सेना के अनुसार कई ऐसे भी अफगान हैं जो जर्मन सेना की मदद कर रहे थे लेकिन वे अपना देश छोड़ कर नहीं जाना चाहते. जनरल फेटर के अनुसार इनमें से कई अनुवादकों को दूसरे विदेशी संस्थानों में नौकरियों के मौके दिए जा रहे हैं. इसके अलावा जर्मन सेना का साथ देने वाले स्थानीय परिवारों की वित्तीय मदद भी बढ़ाई जा रही है. वीजा प्रस्ताव के अलावा सेना के चले जाने के बाद कुंदूज में सेना के लिए काम करने वाले इन स्थानीय लोगों को दो महीने का अतिरिक्त वेतन और बोनस भी दिया जाएगा.

एसएफ/एएम (एएफपी, डीपीए)

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