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मनोरंजन

15 साल की उम्र में खोली कैंडी फैक्ट्री

टॉफी या कैंडी में बच्चों की जान बसती हैं. शायद दुनिया भर के बेशुमार बच्चे यह सपना देखते हैं कि काश उनकी अपनी टॉफी कैंडी फैक्ट्री हो. सबका यह सपना सच हो या न हो, लेकिन जर्मनी के वेलेंटीन वेसल्स ने तो इसे साकार कर दिया है.

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15 साल की उम्र में उन्होंने अपनी खुद की कैंडी कंपनी शुरू कर दी. अब वालेंटीन की उम्र 19 साल है और उनकी कंपनी स्वीट मोमेन्ट्स ऑस्ट्रिया से लेकर हैम्बर्ग तक 150 कारोबारियों को कैंडी बेचती है. वह म्यूनिख के पास श्टार्नबेर्गेसे इलाके में रहते हैं. वहीं उन्होंने अपनी कंपनी की नींव रखी, अपने दादाजी के साथ मिलकर.

Süßwarenmesse in Köln

वालेंटीन का कहना है, "मैंने 12 साल की उम्र में पहली बार अपने दादाजी के साथ शुरुआत की. तब हम दोनों ने किचन में कुछ चीनी और शहद से कैरेमल तैयार किया था."

वालेंटीन के दादाजी की उम्र 81 साल है और वह हर कदम पर अपने पोते का साथ देते आए हैं. तभी तो वालेंटीन कहते हैं कि एक साथ मिला दें तो उनका अनुभव 100 साल का है. वेलेंटीन जर्मनी के सबसे युवा कैंडी उत्पादक है. जब वह सूट बूट में होते हैं तो यह लगता ही नहीं यह कोई यूनिवर्सिटी में पहले साल की पढाई करने वाला छात्र है. उनका कहना है, "मैं म्यूनिख में केमिस्ट्री यानी रसायन विज्ञान की पढ़ाई कर रहा हूं. मॉनराइस में मेरी कैंडी कंपनी है जहां हम पारंपरिक हाथ से बनी कैंडी तैयार करते हैं."

Süßwarenmesse in Köln

कैंडी के लगातार घटते बाजार में वालेंटीन कुछ नया करने पर जोर देते हैं. मसलन उन्होंने लाल पत्तागोभी से कैंडी तैयार की. यह कैंडी आप जैसे ही मुंह में डालते हैं तो यह अपना रंग बदल लेती है. इसके लिए वालेंटीन को 14 साल की उम्र में युवा रिसर्चर का पुरस्कार मिला. वह स्वीट ग्लोबल टैलेंट का पुरस्कार भी पा चुके हैं. खास बात यह है कि उनकी कैंडी में कोई कृत्रिम रंग इस्तेमाल नहीं होता. वह कहते हैं, "हम पारंपरिक कैंडी तैयार करते हैं, जिनमें कोई रंग इस्तेमाल नहीं होता. उनमें सिर्फ फल और सब्जियों के रस के प्राकृतिक रंग होते हैं." यही वजह है कि वेलेंटीन की कैंडी जरा सी महंगी होती हैं.

वह कई अलग अलग आकार में कैंडी बनाते हैं ताकि बच्चे खुश होकर उन्हें खाएं. उनकी कंपनी का स्लोगन है. कैंडी चूसो और खुद को खुश रखो. पर खुद वेलेंटीन को कैसी कैंडी पसंद हैं, वह कहते हैं, "मैं हर तरह की कैंडी खाता हूं. सब टेस्ट करने पड़ते हैं. लेकिन सुबह को मैं पुदीना और अदरक वाले स्वाद पसंद नहीं आते. ऐसी चीजें शाम को ठीक लगती है. सुबह को तो फल या फिर शैंपेन कैंडी पसंद आती है."

वालेंटीन ने पहली बार जर्मन शहर कोलोन के चॉकलेट मेले में अपनी कैंडी पेश की. इसके बाद वह धीरे धीरे बढ़ते गए. आज उनके ग्राहकों में कई ऐसी कंपनियां है जो उनसे अपने ब्रैंड के नाम वाली कैंडी तैयार कराती हैं. वैसे वालेंटीन का अपना स्वीट ब्रैंड अब खासा पॉपुलर है. इसलिए बहुत काम है. वह बताते हैं, "हम अपने सर्दियों के कलेक्शन की तैयारी कर रहे हैं. 10 से 15 तरह की नई कैंडी तैयार करेंगे, जिनमें खास तौर से कई वाइन फ्वेलर होंगे."

वैसे बढ़ती उम्र और अनुभव के साथ वालेंटीन की जिंदगी आसान नहीं, बल्कि मुश्किल होती जा रही है. क्योंकि उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं. बचपन से निकल कर उन्हें कारोबार की दुनिया में खुद को मजबूत और स्थापित करना है.

रिपोर्टः डीडब्ल्यू/ए कुमार

संपादनः वी कुमार