होम-किट पकड़ेगी दवाओं का ओवरडोज | विज्ञान | DW | 09.06.2014
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विज्ञान

होम-किट पकड़ेगी दवाओं का ओवरडोज

वैज्ञानिकों ने शरीर में दवाओं के ओवरडोज का पता लगाने का एक सस्ता और आसान तरीका विकसित किया है. दूरदराज के इलाकों और गावों में आसान और तुरंत नतीजे देने वाले एक टेस्ट से कई जानें बच सकेंगी.

अमेरिका और स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक ऐसा कण बनाया है जो रक्त में मिली हुई दवाओं की मात्रा के हिसाब से लाल या नीले रंग का दिखने लगता है. खास कण के इसी गुण का इस्तेमाल कर अब एक ऐसी होम-किट यानि घर पर खुद से इस्तेमाल की जाने वाली टेस्टिंग तकनीक बनाने पर काम चल रहा है जिससे दवा के ओवरडोज का संदेह होने पर तुरंत जांच की सके.

बहुत से लोग जिन्हें कैंसर, मिर्गी या दिल की बीमारियां हैं या फिर किसी अंग के प्रत्यारोपण के बाद इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं ले रहे हैं, उनमें दवाओं के साइडइफेक्ट या ज्यादा खुराक से मौत का खतरा भी रहता है. दूसरी ओर खून में दवा की कम मात्रा पहुंचने पर वह ठीक से असर नहीं कर पाती. ऐसे में खून में दवा की मात्रा का सही सही पता लगने से समय रहते इन समस्याओं से बचा जा सकेगा. फिलहाल ऐसी जांचों के लिए लैब में जाना पड़ता है और कोई कुशल जांचकर्ता ही इसका सही पता लगा पाता है. इसमें समय भी काफी लगता है.

स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट के रुडोल्फ ग्रिस अपने इस आविष्कार के बारे में बताते हैं, "इस प्रक्रिया में लैब के किसी उपकरण की जरूरत नहीं पड़ती और यह इतना आसान है कि मरीज इसे खुद ही कर सकते हैं." इस नए रंग बदलने वाले कण को बनाने वाले वैज्ञानिकों ने 'नेचर केमिकल बायोलॉजी' नामके जर्नल में लिखा है कि रक्त के संपर्क में आने पर इस अणु के रंग में बदलाव आता है जो एक साधारण डिजिटल कैमरे से ली गई तस्वीर में भी दिखाई देता है. इसी बदले हुए रंग का विश्लेषण कर ओवरडोज का पता लगाया जा सकता है.

डायबिटीज टेस्ट जैसा आसान

वैज्ञानिक बताते हैं कि शरीर में दवा के ओवरडोज का पता एक साधारण सी प्रक्रिया से लगाया जा सकता है. ग्रिस बताते हैं, "करना सिर्फ यह है कि सैंपल की एक बूंद लें और उसे कागज के एक टुकड़े पर डालें. इस कागज को फिर एक अंधेरे डब्बे में रखें और साधारण डिजिटल कैमरे से उसकी तस्वीर ले लें."

इस तस्वीर का फिर रंगों की माप करने वाले एक सॉफ्टवेयर से विश्लेषण कर खून में दवा की सान्द्रता का पता लग जाता है.

इस टेस्ट के प्रोटोटाइप को तीन तरह के इम्यूनोसप्रेसेंट, एक एंटी-इपिलेप्टिक, एक एंटी-एरिद्मिक और एक कैंसर की दवा पर सफलतापूर्वक टेस्ट किया गया. अब इस तकनीक को लेकर एक नई कंपनी शुरु होने जा रही है. ग्रिस कहते हैं, "अभी हम इस प्रक्रिया को इस तरह से बदलने की कोशिश कर रहे हैं जिसमें मरीज को सिर्फ खून की एक बूंद टेस्ट पेपर पर डाल कर, हाथ में पकड़े जा सकने वाले एक रीडर में खिसकानी हो और वह तुरंत नतीजा देख पाए. यह वैसा ही होगा जैसे डायबिटीज के शिकार लोग अपने खून में शुगर के स्तर की जांच करते हैं."

आरआर/ओएसजे (एएफपी)

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