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विज्ञान

होड़ में पिछड़ती हैं महिलाएं

आपस में कड़ी प्रतिस्पर्धा न हो तो महिलाओं का छोटा सा समूह बेहद रचनात्मक फैसले करता है. लेकिन अगर प्रतिस्पर्धा करनी पड़े तो महिलाओं की रचनात्मकता गड़बड़ाने लगती है. नया शोध यह दावा कर रहा है.

क्या रचनात्मकता के मामले में महिलाओं और पुरुषों में अंतर है, वॉशिंगटन की सेंट लुईस यूनिवर्सिटी ने इस सवाल पर शोध किया. रिसर्च में महिलाओं और पुरुषों को टीमों में बांटा गया. टीमों में विज्ञान, इंजीनियरिंग, तकनीक, तेल और गैस क्षेत्र में काम करने वाले 50 लोग शामिल हुए. उन्हें टीमों में बांटकर अलग अलग माहौल में काम कराया गया.

शोध पत्र के प्रमुख लेखक मार्कस बेयर के मुताबिक, "टीम में भीतरी प्रतिस्पर्धा दुधारी तलवार की तरह है. आखिरकार पुरुषों के ग्रुप को इससे बहुत साफ फायदा मिलता है, लेकिन ये महिलाओं के ग्रुप की रचनात्मकता को बुरी तरह प्रभावित करता है."

शोधकर्ताओं का मानना है कम चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में एक टीम के तौर पर महिलाएं बेहतर काम करती हैं, बशर्ते ग्रुप में आपसी प्रतिस्पर्धा न हो. इसे विस्तार से समझाते हुए बेयर कहते हैं, "टीमों के बीच बेहद कड़ी प्रतिस्पर्धा होने पर महिलाएं अपना योगदान कम से कम देती हैं और इसका असर महिलाओं की पूरी टीम पर पड़ता है."

टीमें अगर प्रतिस्पर्धा की बजाए सहयोग करते हुए काम करें तो महिलाएं पुरुषों से बहुत बेहतर साबित होती हैं. प्रतिस्पर्धा न होने पर पुरुष आलसी व्यवहार दिखाने लगते हैं. लेकिन, "जैसे ही आप कड़ी प्रतिस्पर्धा का तत्व डालते हैं, ये तस्वीर बदलने लगती है. ऐसी परिस्थितियों में पुरुष आसानी से घुल मिल जाते हैं. वे एक दूसरे के प्रति सहयोग बढ़ा देते हैं, महिलाएं ठीक इसका उल्टा करती हैं. लेकिन अगर आप कड़ी प्रतिस्पर्धा को हटा दीजिए तो फिर से यह तस्वीर बदल जाती है. तब महिलाएं ज्यादा अच्छे से काम करने लगती हैं."

शोध के नतीजे मैनेजमेंट के गुरुओं के लिए टिप्स का काम कर सकते हैं. आम तौर पर यह माना जाता है कि प्रतिस्पर्धा से हर क्षेत्र में बेहतर नतीजे आते हैं. बेयर के नतीजे उस शोध के बिल्कुल उलट हैं जिसमे यह कहा गया था कि टीम के तौर पर महिलाएं पुरुषों की तुलना ने ज्यादा सहयोगात्मक होती हैं.

हालांकि बेयर मानते है कि प्रतिस्पर्धा और रचनात्मकता के समीकरण सदियों से चले आ रहे पुरुष प्रधान समाज ने तय किये हैं, "समाज किस तरह महिलाओं को देखता है और किस तरह वो प्रतिस्पर्धा को देखता है, यह लिंग के आधार पर बंटा हुआ है, इसका असर हर क्षेत्र में बहुत साफ ढंग से देखा जा सकता है. इसकी वजह से व्यवहार और नतीजे बदल जाते हैं."

ओएसजे/एएम (एएलयू, वॉशिंगटन)

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