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खेल

हॉलैंड के नारंगी रंग में नहाया केपटाउन

हर मैच में जीत के साथ आगे बढ़ती जा रही नीदरलैंड्स ने सेमीफाइनल में यूरोप से बाहर की इकलौती टीम उरुग्वे का पत्ता साफ कर दिया और पूरे शान के साथ फाइनल में पहुंच गई. इस वर्ल्ड कप में हॉलैंड एक मैच भी नहीं हारा है.

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मैच के बाद रॉबेन और कोच मैवरिक

आर्यन रॉबेन, मार्क फॉन बॉमेल और श्नाइडर की तिकड़ी ने मैच शुरू होने के साथ ही ग्राउंड को नारंगी रंग से पाट दिया और पूरे मैच पर कब्जा कर बैठे. बीच बीच में उरुग्वे ने भी हमले किए लेकिन वे नाकाम साबित होते रहे. वैसे तो डच खिलाड़ियों में भी तालमेल बैठने में काफी वक्त लगा लेकिन पहला गोल करके उन्होंने मनोवैज्ञानिक बढ़त बना ली. इस तरह 1978 के बाद पहली बार नीरदलैंड्स की टीम फाइनल में पहुंचने में कामयाब हो पाई है, वह भी हर मैच जीत कर. उसे किसी मैच को ड्रॉ कराने की भी जरूरत नहीं पड़ी. विश्व कप इतिहास में सिर्फ ब्राजील ऐसी टीम है, जिसने 1970 का वर्ल्ड कप हर मैच जीत कर हासिल किया था.

केपटाउन का स्टेडियम लगभग 62,000 दर्शकों से भरा था और उन्हें खेल के पहले हाफ में दो बेहतरीन गोल देखने को मिले. हॉलैंड यानी नीदरलैंड्स के कप्तान फॉन ब्रान्कास्ट ने 30 मीटर की दूरी से जो शॉट लगाया, वह सीधे जाल में जा समाया. उरुग्वे के गोलकीपर मुसलेरा बस देखते ही रह गए. इसके बाद दूसरा गोल भी कप्तान की ही तरफ से आया, जब उरुग्वे के डियागो फोरलान ने झन्नाटेदार लेफ्ट फुटर से गेंद सीधी जाल में डाल दी. एक वक्त को बढ़त बना चुकी हॉलैंड की टीम में एकदम से सन्नाटा पसर गया. मुकाबला बराबरी पर आ चुका था.

दूसरे हाफ में ऐसा कोई गोल नहीं देखने को मिला, लेकिन नीदरलैंड्स की चपलता और तेजी जरूर देखने को मिली. नारंगी ब्रिगेड ने रणनीति बदल दी थी. तेजी और फटाफट पास शुरू हो गया और उरुग्वे की टीम एक बार फिर हाशिए पर चली गई. एक दो बार कप्तान फोरलान ने अपने पैर का करतब दिखाने की कोशिश की लेकिन वह नाकाम रहे. खेल आखिरी लम्हों में जा रहा था और एक्स्ट्रा टाइम का खतरा मंडराने लगा था.

लेकिन 70 वें मिनट में हॉलैंड के हीरो श्नाइडर ने बेहद ऊटपटांग तरीके से गेंद जाल में सरका दी. उरुग्वे के खिलाड़ी गेंद के आगे दीवार बन कर खड़े थे लेकिन उन्हें समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या. उन्होंने उम्मीद भरी नजरों से लाइन्समैन की तरफ देखा कि शायद ऑफसाइड का सिग्नल आ जाए. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.

उरुग्वे आखिरी वक्त वाले गोल के जाल में फंस चुका था और निकलने की पूरी कोशिश कर रहा था. लेकिन आर्यन रॉबेन ने

Fußball WM 2010 Niederlande Uruguay Flash-Galerie

इस बीच अपने सिर की ठोकर से उसकी जख्म को और हरा कर दिया और तीन मिनट बाद ही नीदरलैंड्स को दो गोल की बढ़त मिल गई. रॉबेन इस गोल के बाद खुशी से झूम उठे और खुद ही अपने माथे को पीटते पीटते साइडलाइन तक पहुंच गए.

फुटबॉल समझने वालों के लिए भले ही खेल खत्म हो चुका होगा लेकिन उरुग्वे के लिए नहीं. आखिरी मिनटों में टीम ने पूरी ताकत झोंक दी और गेंद को तकरीबन हॉलैंड के ही पाले में झुलाते रहे. पर 90 मिनट का खेल पूरा हुआ और तीन मिनट का एक्स्ट्रा टाइम मिला.

कप्तान फोरलान बाहर जा चुके थे लेकिन उरुग्वे ने यहां अपनी आखिरी सांस लड़ा दी और एक्स्ट्रा टाइम के पहले ही मिनट में गोल ठोंक दिया. अबकी बारी सन्न होने की बारी नीदरलैंड्स की थी. गेंद लगभग हर वक्त नीदरलैंड्स के डी के अंदर घूम रही थी. कोच बर्ट फैन मैवरिक की सांसें थम गई थीं. वह बेचैन होकर साइडलाइन के किनारे टहल रहे थे.

उधर घड़ी तेजी से घूमने लगी और इधर उरुग्वे के खिलाड़ियों के पांव. मैच मानो हॉलैंड से नहीं, बल्कि वक्त से हो रहा हो. लेकिन जैसा कि हर बार होता आया है, जीत वक्त की हुई. उरुग्वे हार गया.

केपटाउन के स्टेडियम का वही हाल हुआ, जो पिछली मैच में ब्राजील को पराजित करने पर पोर्ट एलिजाबेथ का हुआ था. पूरा स्टेडियम नारंगी रंग से नहा उठा. ग्राउंड के अंदर हॉलैंड के खिलाड़ी और स्टेडियम में ऑरेंज रंग की लिबास पहने प्रशंसक झूम उठे. 32 साल बाद टीम फाइनल में पहुंच चुकी थी.

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