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मनोरंजन

हॉलैंड का खाना सबसे अच्छा

सवा सौ देशों पर हुए एक शोध में पाया गया है कि नीदरलैंड्स में सबसे ज्यादा और सबसे पौष्टिक खाना मिलता है. भारत इस सूची में 97वें स्थान पर रहा. सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे भारत में ही हैं.

नीदरलैंड्स ने खाने के लिए मशहूर फ्रांस और स्विट्जरलैंड को भी पीछे छोड़ दिया है. शोध करने वाले ऑक्सफैम के देबोराह हरदून ने कहा, "नीदरलैंड्स ने एक अच्छा बाजार बना लिया है और वह इस बात को सुनिश्चित कर पा रहा है कि नागरिकों को खाने के लिए अच्छा और भरपूर सामान मिल सके." हरदून ने बताया कि देश में खाने की चीजों के दाम काफी कम हैं और लोग संतुलित आहार ले रहे हैं, "वहां के हालात बाकी देशों की तुलना में बहुत बेहतर हैं."

ऑक्सफैम ने इस शोध के लिए खाने की क्वालिटी के अलावा उसके उपलब्ध होने और लोगों में उसे खरीदने के सामर्थ्य पर भी ध्यान दिया. साथ ही देश में कुपोषित और मोटापे के शिकार बच्चों की संख्या के आंकड़े भी जमा किए गए. यह भी देखा गया कि कितने लोगों तक पीने का साफ पानी पहुंच पा रहा है. मधुमेह और लाइफस्टाइल से जुड़े अन्य रोगों पर भी ध्यान दिया गया.

सूची में सबसे आगे यूरोप के देश ही रहे. इटली, आयरलैंड, पुर्तगाल और लक्जमबर्ग संयुक्त रूप से आठवें स्थान पर रहे. ब्रिटेन टॉप टेन में अपनी जगह नहीं बना सका. खाने पीने की चीजों के भारी दामों के कारण उसे 13वें स्थान पर रखा गया. ऑक्सफैम का कहना है कि अन्य चीजों की तुलना में खाने का महंगा होना ब्रिटेन को माल्टा, पेरू और किर्गिस्तान के बराबर ला खड़ा करता है. इन देशों को सूची में 33वां, 51वां और 65वां स्थान मिला है. खाद्य उद्योग के लिए मशहूर अमेरिका और जापान को संयुक्त रूप से 21वां स्थान दिया गया.

करोड़ों लोग हैं भूखे

सूची में सबसे नीचे 125वें स्थान पर रहा अफ्रीकी देश चाड. इस से पहले इथियोपिया और अंगोला हैं. अधिकतर अफ्रीकी देशों को आखिरी 30 में ही जगह मिली है. भारत और आसपास के देशों के लिए नतीजे काफी बुरे रहे हैं. भारत पाकिस्तान के साथ 97वें स्थान पर है और बांग्लादेश 102 पर. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत उन देशों में है जहां पोषण की दर सबसे बुरी है. सामान्य से कम वजन वाले सबसे ज्यादा बच्चे भी भारत में ही हैं.

ऑक्सफैम ने कहा है कि ताजा आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में करीब 84 करोड़ लोग हर रोज भूखे रह जाते हैं और ऐसा नहीं है कि इनके लिए खाना उपलब्ध नहीं है. रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक इस संख्या के 20 से 50 फीसदी तक बढ़ जाने की आशंका है. ऑक्सफैम ने देशों से आग्रह किया है कि खाद्य उद्योग के मूलभूत ढांचे को मजबूत किया जाए और दुनिया भर में खाने के वितरण के बारे में विचार किया जाए.

जिन देशों में खाने की गुणवत्ता अच्छी है वहां उसकी बर्बादी भी काफी हो रही है. ऐसे में इस बर्बादी को रोकने और विकासशील देशों में लोगों तक पौष्टिक आहार पहुंचाने पर काम करने की जरूरत है. इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए ऑक्सफैम ने संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों डब्ल्यूएचओ, आईएलओ और एफएएफ से डाटा जमा किया. यह रिपोर्ट अक्टूबर से दिसंबर 2013 से बीच जमा किए गए आंकड़ों पर आधारित है.

आईबी/एजेए (रॉयटर्स)

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