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मनोरंजन

हॉलीवुड लाया हैती के चेहरों पर मुस्कान

भूकंप और उसके बाद महामारियों से जूझते हैती में जब दुनिया राहत और बचाव के काम में मदद कर रही थी तब मारिया बेलो और उनके साथी यहां सिनेमा हॉल बनाने की सोच रहे थे. उनकी कोशिश रंग लाई और हैतीवासियों के चेहरे पर मुस्कान भी.

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जागती आंखों के सपने सी लगने वाली ये कोशिश कामयाब हुई और सितंबर में शुरु होने के बाद से ही सन सिटी पिक्चर हाउस ऐसी जगह बन गया जो बच्चों और बड़ों के चेहरे पर मुस्कान जगा रहा है. ये एक सामुदायिक केंद्र के रूप में भी काम आता है और स्कूल भी है. इसकी मदद से अलग अलग शिविरों में दो और थिएटर भी बन गए हैं.

इस सपने को देखने और फिर उसे सच में बदलने का श्रेय मारिया बेलो, ओलिविया विल्डे और उनके दोस्तों को जाता है. मारिया ने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर थिएटर को एक नई जिंदगी दी. इन्होंने अपनी कोशिशों पर सन सिटी पिक्चर हाउस नाम से एक डॉक्यूमेंट्री भी बनाई है जिसे आने वाले साल में सभी फिल्म समारोहों में दिखाने की उनकी योजना है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में बेलो ने कहा,"हैती को सबसे ज्यादा जिस चीज की जरूरत है वो है खुशी.ये फिल्म इसी के बारे मे है." सन सिटी पिक्चर हाउस हैती में राहत के कामों में जुटे रफाएल लुईगेने पर है जिनका सपना था हैती में एक मूवी थिएटर बनाना. दो अमेरिकी राहतकर्मी उनके इस सपने को साकार करने में मदद करते हैं. ये दोनो हैं, आर्टिस्ट्स फॉर पीस एंड जस्टिस के ब्रायन मूसर और ऑपरेशन ब्लेसिंग के लिए काम करने वाले डेव डार्ग.

डार्ग ने डॉक्यूमेंट्री फिल्म का निर्देशन किया और मूर ने इसे बनाया है. इन लोगों ने हैती के इकलौते फिल्म स्कूल सिने इंस्टीट्यूट के छात्रों को फिल्म की शूटिंग के लिए अपने साथ लिया. 43 साल की बेलो और 26 साल की विल्डे ने हैती में भूकंप से पहले समाज सेवा की थी. उस समय भी यहां थिएटर बहुत कम थे. विल्डे याद करती हैं कि जब एक रात उन्होंने हैती के 40 लोगों के साथ दीवार के सहारे एक कपड़े के पर्दे पर आउटडोर थिएटर बनाया और खड़े होकर फिल्म देखी. ये जगह सन सिटी नाम से एक झुग्गी बस्ती के रूप में जानी जाती है. हैतीवासियों के चेहरे को प्रोजेक्टर की रोशनी में देखना विल्डे के लिए एक अनोखा अनुभव रहा,"तब मुझे पीएस एंड जस्टिस फिल्म प्रोजेक्ट के लिए कलाकार की जरूरत का अहसास हुआ."

सन सिटी प्रोजेक्ट का सपना साकार होने की तरफ तब बढ़ा जब राहत के कामों के दौरान ही लुईगेने ने ड्रैग और मूसर से इसका जिक्र किया. दोनों उनकी मदद के लिए तैयार हो गए. भूकंप के बाद दोनों की जोड़ी सामान्य राहत के कामों में जुट गई. इनमें घर और स्कूल बनाना, दवाइयां, पानी और कपड़े पहुंचाना एक तरह से कहें तो टेंट में ही शहर बसा दिया गया.

इस बीच बेलो ओर विल्डे लगातार हैती का दौरा कर रही थी और उसी दौरान उन्हें महसूस हो रहा था कि अब वक्त आ गया है जब हैतीवासियों को उनकी मूल जरूररतों से आगे बढ़ कर कुछ मिले. आर्टिस्ट फॉर पीस एंडर जस्टिस ने निर्माण के लिए पैसा दिया और इलाके के लोगों ने इसमें मदद की. चार दिन में थिएटर बन कर तैयार हो गया और शुरुआत करने के लिए बेलो ने द ममी फिल्म दी . इस फिल्म में बेलो ने भी काम किया है. पहली रात हैती के 200 बच्चों ने पॉपकॉर्न और जूस के साथ ये फिल्म देखी.बच्चों के पीछे उनके मां-बाप भी खड़े थे और उनके चेहरे पर मुस्कान देखना बेलो ओर उनके दोस्तों के लिए जीवन भर न भूलने वाला पल बन गया.

सनसिटी पिक्टर हाउस अब आसपास के 5000 लोगों को खुद से जोड़ चुका है. सिर्फ फिल्म दिखाना ही नहीं ये इन सभी लोगों के लिए एक सामुदायिक केंद्र है. लोगों ने इसकी जिम्मेदारी खुद अपने हाथ में ले ली है वो इसे साफ रखते हैं और स्कूल चलाने और दूसरे कामों के लिए भी इसका उपयोग करते हैं.

ड्रैग और मूजर ने दो अलग अलग कैम्पों में भी इसी तरह का थिएटर बनाया है और वो यहीं रुकने को तैयार नहीं. हैती में हॉलीवुड का सफर जारी है.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः एस गौड़

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