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मनोरंजन

हॉलीवुड को टक्कर देता भारत का 'बाहुबली'

भारतीय फिल्म 'बाहुबली 2' के विजुअल इफेक्ट्स का कोई जवाब नहीं है. इस मामले में यह हॉलीवुड को टक्कर देती है. जानिए भारत का तेजी से उभरता ग्राफिक्स कौशल कैसे रच रहा है फिल्मी पर्दे पर जादुई दृश्य.

दक्षिण भारतीय शहर हैदराबाद. रात आते आते बाहर भले ही सब कुछ शांत सा पड़ गया हो, दर्जन भर एनीमेटर कॉफी की मदद से जाग जाग कर अंधेरे स्टूडियो में अपनी कंप्यूटर स्क्रीनों पर भारत की आज तक की सबसे बड़ी और सबसे महात्वाकांक्षी फिल्म को कुछ फिनिशिंग टच दे रहे हैं.

बाहुबली 2 के निर्माता इस फिल्म में बेहतरीन विजुअल इफेक्ट्स चाहते हैं. फिल्मी पर्दे पर कुछ ऐसा दिखाना चाहते हैं कि भारतीय दर्शक हॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्मों का जलवा भूल जाएं. और यह जादू चलेगा भारत की पौराणिक कथाओं से निकाल कर लाए गए कुछ राजघरानों और उनके साम्राज्यों, उनकी विशाल सेनाओं, महलों, खूबसूरती और ढेर सारी काल्पनिक चीजों से.

इसी फिल्म के एक्शन सीन को कंप्यूटर जेनरेटेड इमेजरी से जोड़ने का काम करने वाली कंपनी माकुटा वीएफएक्स के सहसंस्थापक पीट ड्रेपर कहते हैं, "अगर कला आसान होती, हर कोई वो करता." ड्रेपर बताते हैं कि "हर एक शॉट की अपनी चुनौती होती है. तभी हर दिन उसे निपटाते हुए सुबह के 4 बज जाते हैं."

बॉक्स ऑफिस पर करीबी नजर रखने वाली एजेंसियों की मानें तो "बाहुबली 2" इस साल ही नहीं, इस पूरे दशक की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्म है. इसका मुकाबला हॉलीवुड की स्पाइडर-मैन या दूसरी ओवरसीज फिल्म से हो सकता है. बॉलीवुड में तो रेस में ही नहीं है.

बाहुबली का पहला पार्ट "बाहुबली: दि बिगिनिंग" 2015 में आया था. निर्देशक एसएस राजामौली 28 अप्रैल को आने वाली अपनी नई पेशकश में उससे भी बेहतर करना चाहते हैं. बचपन से हॉलीवुड की शाहकार 'बेन हर', 'दि टेन कमांडमेंट्स' जैसी फिल्मों से प्रभावित रहे राजामौली कुछ वैसा ही बड़ा रचना चाहते थे. 43 वर्षीय राजामौली कहते हैं, "अगर हम उसका 10 फीसदी भी भारतीय परिपेक्ष्य में बना सके, जिसमें हमारी कहानियां हों, हमारे हीरो और हिरोइन हों... तो हम आसानी से मुकाबला कर सकते हैं."

विजुअल इफैक्ट्स प्रमुख ड्रेपर हर दिन फिल्म के शूटिंग सेट पर होते थे. उनका काम यह सुनिश्चित करना होता था कि लोकेशन और एक्टरों के शॉट और हरकतें ऐसी हों, जिन्हें बाद में कंप्यूटर स्क्रीन पर सीजीआई-इनहैंस्ड रेंडरिंग के साथ सिन्क्रोनाइज करना संभव हो. दिन में सेट पर आधे अधूरे से महल के सेटो के साथ असली शूटिंग होती और रात में ग्राफिक्स की मदद से दृश्य को पूरा किया जाता. बेहद बारीकी के इस काम को करने में 80 से अधिक टेक्नीशियंस की टीम लगी थी. कुल बजट 6.7 करोड़ डॉलर का था. प्रोडक्शन के खर्च को सीमा में रखने के लिए सिर्फ भारत ही नहीं तमाम देशों के 35 बड़े स्टूडियो में बांट कर इसे किया गया.

आज तक भारत की सबसे मशहूर हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में ज्यादातर फिल्में रोमांस और ऐक्शन के एक तय फॉर्मूले पर ही बनती आयी हैं. अब तक बॉलीवुड में बाहुबली जैसी बड़ी कोई बिग टिकट फ्रैंचाइज नही विकसित हुई है. बाहुबली के एक ब्रांड बनने का सबूत इससे भी मिलता है कि फिल्म के अलावा उस पर आधारित एक स्पिन ऑफ टेलीविजन सीरीज, अमेजन वीडियोस्ट्रीमिंग पर एक एनिमेटेड पेशकश, एक कॉमिक बुक और एक संभावित तीसरी फिल्म पर भी विचार शुरू हो गया है.

आरपी/एके (रॉयटर्स)

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