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खेल

हॉकी महासंघ को भंग करने का आदेश खारिज

दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के इंडियन हॉकी फ़ेडरेशन को भंग करने के आदेश को खारिज कर दिया है. 2008 में रिश्वत लेने के आरोप और ख़राब प्रदर्शन के आधार पर आईएचएफ़ को भंग कर दिया गया था.

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अप्रैल 2008 में हॉकी इंडिया नाम से एक संगठन की शुरुआत की गई थी जो उसके बाद से हॉकी खेलों का आयोजन कर रहा था. दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को भंग किए गए फ़ेडरेशन के प्रमुख केपीएस गिल की याचिका पर सुनवाई की. अदालत ने कहा कि भारत में हॉकी को नया जीवन देने के लिए नई शुरुआत की ज़रूरत है.

जज एस मुरलीधर ने सुनवाई के बाद कहा कि "भारतीय हॉकी की समस्याओं की ठीक से जांच करने के लिए ज़रूरी है कि इंडियन हॉकी फेडरेशन पर से निलंबन हटाया जाए और एक नई शुरुआत की जाए."

भारतीय हॉकी महासंघ को 2008 में ओलंपिक में क्वालिफ़ाइ नहीं कर पाने के कारण और उसके सचिव कंडस्वामी ज्योथीकुमारन को रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने के बाद भंग कर दिया गया था. ज्योथीकुमारन ने रिश्वत लेने से इनकार किया था और कहा था कि उन्होंने पैसे किसी खिलाड़ी को टीम में शामिल करने के लिए नहीं लिए थे बल्कि प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट शुरू करने के लिए लिये थे. गिल ने पीटीआई से बातचीत के दौरान कहा, "मैं बहुत ख़ुश हूं कि अंततः न्याय हुआ. अब हमें ध्यान रखना होगा और ये भी देखना होगा की हॉकी की हालत ठीक हो."

जज मुरलीधर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि केंद्र सरकार और भारतीय ओलंपिक संघ को पहले किसी भी खेल संघ को कारण बताओ नोटिस जारी करना चाहिए और उसके बाद ही सज़ा दी जानी चाहिए.

रिपोर्टः एजेंसियां/आभा मोंढे

संपादनः महेश झा

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