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दुनिया

हैजे के खिलाफ प्रदर्शन हैती की राजधानी तक पहुंचा

हैती की राजधानी में हर तरफ हैजे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. सैकड़ों लोगों ने जगह जगह संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों से झड़प की है. ये लोग संयुक्त राष्ट्र की लापरवाही को महामारी फैलने की वजह बता रहे हैं.

गुस्साए लोगों की नाराजगी हेती में हर तरफ नजर आ रही है. भूकंप से मलबे में तब्दील हो चुके शहर की गलियों और सड़कों पर जगह जगह संयुक्त राष्ट्र सैनिकों पर युवाओं ने पथराव किया. शांति सैनिकों ने भीड़ को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे. कई घंटों तक दोनों पक्षों के बीच संघर्ष चलता रहा. विरोधियों ने कई जगह टायर जला कर सड़कों को जाम कर दिया और नारे बाजी की. संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों ने लोगों को हटाने के लिए फायरिंग भी की है.

Haiti Cholera

प्रदर्शनकारियों की भीड़ में शामिल 40 साल के किसान एलेक्सिस क्लेरियस कहते हैं, "यूएन हमें मारने आया है हमें जहर देने." विरोध प्रदर्शन के आयोजक लोगों से हैती प्रशासन और संयुक्त राष्ट्र के खिलाफ गुस्सा जताने की अपील कर रहे हैं. ये लोग देश में फैली हैजा से नाराज हैं. अक्टूबर में शुरू हुई इस महामारी ने अब तक 1100 लोगों की जान ली है. हजारों लोग अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि हैजा की महामारी नेपाल से आए संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के सेप्टिक टैंक से फैला है. इस सेप्टिक टैंक का रिसाव आर्टिबोनाइट नदी में हो रहा है. इसी नदी का पानी स्थानीय लोग पीने, नहाने और कपड़े धोने के लिए इस्तेमाल करते हैं.

उधर संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि उसने नेपाली शांति सैनिकों के कैंप की छानबीन की है और उसे वहां हैजा के कोई लक्षण नहीं मिले हैं. स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इस बात का पता लगा पाना नामुमकिन है कि हैजा के वायरस कहां से आए. बेहतर ये होगा कि बीमारी को रोकने में अपना ध्यान लगाया जाए.

Haiti Cholera

18000 से ज्यादा लोग हैजे की चपेट में

इस बीच राष्ट्रपति रेने प्रेवाल ने लोगों से शांत रहने की अपील की है और उन लोगों की आलोचना की है जो इस मौके का फायदा उठाकर देश में गड़बड़ी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. देश में 28 नवंबर को चुनाव होने हैं जिसमें नया राष्ट्रपति चुना जाएगा.

राष्ट्रपति कुछ भी कहें लोगों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा. हैजा के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है. लोग अभी भी ये मानने को तैयार नहीं कि नेपाली शांति सैनिक इन सबके लिए जिम्मेदार नहीं हैं. 38 साल के सेराफाइन मकाउल्ट कहती हैं, "ये सब संयुक्त राष्ट्र की गलती है, हम जानते हैं कि हमारी बीमारी के पीछे नेपाली सैनिक हैं और वो हमें बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं." सेराफाइन की बेटी को भी हैजा ने अपनी गिरफ्त में लिया है.

संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के दल मिनुस्ताह ने लोगों को देश में अस्थिरता लाने वाली ताकतों के झांसे में न आने की अपील की है. विरोध प्रदर्शनों से संयुक्त राष्ट्र का काम और मुश्किल हो रहा है क्योंकि शांति सैनिकों को यहां चुनावों का इंतजाम भी देखना है. उधर स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि बीमारी पर जल्दी काबू नहीं किया जा सका तो इसका असर सालों तक बना रहेगा. अब तक 18000 से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः महेश झा

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