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दुनिया

हैक हुआ जर्मन स्पेस स्टेशन

जर्मनी ने माना है कि पिछले कई महीनों से उसके स्पेस रिसर्च सेंटर डीएलआर पर साइबर हमले हो रहे हैं. हमले के लिए विदेशी खुफिया एजेंसियों को जिम्मेदार बताया गया है.

जर्मन पत्रिका श्पीगल ने लिखा है, "सरकार ने इसे बहुत बड़े खतरे की श्रेणी में रखा है क्योंकि बाकी सभी चीजों के अलावा यहां हथियारों और रॉकेट तकनीक को निशाना बनाया जा रहा है." कई आईटी एक्सपर्ट का कहना है कि साइबर हमले के लिए बेहद पेचीदा स्पाई प्रोग्राम का इस्तेमाल किया गया है. इनमें से कुछ ऐसे ट्रोजन हैं जो महीनों तक कंप्यूटर में रहते हैं और उसे किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाते. लेकिन कंप्यूटर का पूरा डाटा इनके कब्जे में होता है और ट्रोजन को चलाने वालों के पास कंप्यूटर की सारी जानकारी मौजूद होती है. कंप्यूटर इस्तेमाल करने वाले को इसकी जरा भी भनक नहीं लगती.

यहां तक कि एंटीवायरस प्रोग्राम भी इन्हें पहचान नहीं पाते. ये ट्रोजन कई महीनों तक कंप्यूटर में असक्रिय भी रह सकते हैं और बाद में ये अचानक से कंप्यूटर को हैक कर लेते हैं. इसके अलावा कंप्यूटर को नुकसान पहुंचाने के बाद जैसे ही किसी की इन पर नजर पड़ती है, ये खुद को नष्ट कर देते हैं.

श्पीगल ने लिखा है कि सभी हमले सुनियोजित रूप से किए गए हैं और इनका असर स्टेशन के लगभग सभी ऑपरेशन सिस्टम पर पड़ा है. जर्मन सरकार ने अभी तक किसी को भी इन हमलों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है. पर श्पीगल ने नाम ना बताने की शर्त पर एक सरकारी अधिकारी के हवाले से लिखा है कि संकेत चीन की ओर हैं. सरकार का कहना है कि मामले की जांच हो रही है लेकिन अभी किसी भी तरह की जानकारी देने से इनकार कर दिया है. जर्मनी का यह स्पेस स्टेशन कोलोन शहर के पास स्थित है.

आईबी/एएम (एएफपी/डीपीए)